हरियाली के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट!, आय से अधिक संपत्ति और रिश्तेदारों के नाम पर भुगतान का आरोप,PMO पहुंची शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
Misappropriation of government funds in the name of greenery! Allegations of amassing assets disproportionate to income and making payments to relatives; complaint reaches the PMO; demands for an impartial probe intensify.
कोरबा : कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र में तैनात डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. इस बार मामला सिर्फ कथित भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है. बल्कि विभागीय कार्यों में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं, आय से अधिक संपत्ति, रिश्तेदारों के नाम पर भुगतान, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और पहले ग्रामीणों को खुलेआम धमकाने जैसे आरोपों से जुड़ गया है. इन आरोपों को लेकर अब शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच चुकी है. जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
सूत्रों के मुताबिक अयोध्या प्रसाद सोनी करीब 12 साल से एक ही वन परिक्षेत्र में पदस्थ हैं. इस दौरान उन्हें सिंचित प्लांटेशन, बनिया जलाशय-2, कूप कटाई, नर्सरी संचालन, स्टॉपडेम निर्माण और अन्य करोड़ों रुपये की योजनाओं की जिम्मेदारी मिली. आरोप है कि इन्हीं योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं.
हरियाली के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि सीपतपारा क्षेत्र में पौधारोपण, नर्सरी और स्टॉपडेम निर्माण के नाम पर लाखों रुपये खर्च दर्शाए गए. लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यों की स्थिति सवालों के घेरे में है. आरोप है कि कई स्थानों पर कागजों में हरियाली दिखाई गई. जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है. वनाधिकार से जुड़े कार्यों और वन प्रबंधन योजनाओं में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं.
आय से अधिक संपत्ति के आरोप
सूत्रों के मुताबिक डिप्टी रेंजर पर वैधानिक आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में पूर्व वन प्रबंधन समिति अध्यक्ष के नाम पर करीब 5 एकड़ आदिवासी भूमि खरीदी गई. इसके अलावा पेंड्रा क्षेत्र में कई जमीनें और एक पॉश इलाके में आलीशान मकान होने की भी चर्चा है. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है.
रिश्तेदारों के नाम पर भुगतान का आरोप
आरोप यह भी हैं कि विभागीय मजदूरी और अन्य भुगतान रिश्तेदारों एवं परिवार से जुड़े लोगों के नाम पर किए गए. सूत्रों का दावा है कि डिप्टी रेंजर के बेटे एक निजी बैंक में कार्यरत बताए जाते हैं. उनके नाम पर भी भुगतान होने की शिकायत है. अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है.
जंगल की मोटर पहुंची निजी घरों तक?
ग्रामीणों का आरोप है कि पौधारोपण की सिंचाई के लिए लाई गई मोटरों को वन प्रबंधन समिति से जुड़े कुछ लोगों द्वारा निजी उपयोग में लगा लिया गया. सवाल यह उठ रहा है कि अगर जंगल के लिए खरीदी गई सरकारी सामग्री निजी परिसरों तक पहुंच गई. तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
पहले धमकी का वीडियो, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ग्राम जलके में वन प्रबंधन समिति के चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने फेंसिंग कार्य में कथित भ्रष्टाचार और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे. इसी दौरान डिप्टी रेंजर अयोध्या प्रसाद सोनी का एक वीडियो वायरल हुआ. जिसमें वे कथित रूप से ग्रामीणों को “एक मिनट के भीतर उठवा लेने” की धमकी देते हुए दिखाई दिए. वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने कार्रवाई की मांग की थी. लेकिन अब तक किसी निलंबन या कठोर विभागीय कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई.
अब सवाल उठ रहे हैं कि जब एक सरकारी अधिकारी पर सार्वजनिक रूप से धमकी देने का आरोप लगा और उसका वीडियो भी सामने आया. तब भी अगर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. तो क्या इसी वजह से भ्रष्टाचार के आरोपों को बढ़ावा मिला?
PMO तक पहुंची शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
पूरे मामले की शिकायत अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है. शिकायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति, विभागीय संसाधनों के दुरुपयोग और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है. स्थानीय लोग चाहते हैं कि मामले की जांच लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW), ACB अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए. ताकि तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके.
सबसे बड़ा सवाल
अगर आरोप निराधार हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए. लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं. तो यह सिर्फ एक अधिकारी का मामला नहीं रहेगा. बल्कि वन विभाग में योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा.
(अस्वीकरण: इस समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतों, स्थानीय सूत्रों और उपलब्ध दावों पर आधारित हैं. इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है. संबंधित अधिकारी या वन विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा.)
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