पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने का आरोप, एसपी तक पहुंची शिकायत, चौकी प्रभारी और एएसआई लाइन अटैच, पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
Police personnel accused of demanding bribes; complaint reaches the SP; outpost in-charge and an ASI moved to police lines, causing a stir within the police department.
कांकेर : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जनप्रतिनिधियों से कथित रूप से पैसों की मांग किए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने हल्बा चौकी प्रभारी दीपा केंवट और एएसआई चेतन साहू को लाइन अटैच कर दिया है. दोनों पुलिसकर्मियों पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण के लिए नदी से रेत निकालने के मामले में पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है. शिकायत मिलने के करीब 24 घंटे के भीतर हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में चर्चा तेज हो गई है.
पीएम आवास के लिए रेत निकालने को लेकर शुरु हुआ विवाद
मिली जानकारी के मुताबिक मामला प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण से जुड़ा हुआ है. स्थानीय स्तर पर कुछ लोग पीएम आवास के निर्माण के लिए नदी से रेत निकाल रहे थे. इसी दौरान हल्बा चौकी पुलिस की तरफ से इस मामले में कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है. आरोप है कि कार्रवाई की बात कहकर जनप्रतिनिधियों से कथित रुप से पैसों की मांग की गई. इस मामले में जनपद सदस्य ने हल्बा चौकी प्रभारी दीपा केंवट और एएसआई चेतन साहू पर गंभीर आरोप लगाए. शिकायत के मुताबिक पुलिसकर्मियों के व्यवहार और कथित पैसे की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जताई और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की.
एसपी तक पहुंची शिकायत
बताया जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों की शिकायत पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा तक पहुंची थी. शिकायत में लगाए गए आरोपों को संज्ञान में लेने के बाद पुलिस विभाग ने दोनों संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई की. एसपी के निर्देश पर हल्बा चौकी प्रभारी दीपा केंवट और एएसआई चेतन साहू को लाइन अटैच कर दिया गया. इस फैसले के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को फिलहाल उनकी नियमित फील्ड ड्यूटी से हटा दिया गया है.
लाइन अटैच का क्या होगा असर?
पुलिस विभाग में किसी अधिकारी या कर्मचारी को लाइन अटैच किए जाने का मतलब है कि उसे फिलहाल थाने या चौकी की नियमित फील्ड जिम्मेदारी से हटाकर पुलिस लाइन में पदस्थ किया जाता है. यह प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है और कई बार शिकायत, विभागीय जांच या अन्य आवश्यक परिस्थितियों में ऐसा कदम उठाया जाता है. हालांकि लाइन अटैच होना अपने आप में किसी आरोप के साबित होने का प्रमाण नहीं है. इस मामले में भी दोनों पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की सच्चाई की जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगी.
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल मामले में शिकायत और जनप्रतिनिधियों की तरफ से लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है. जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि नदी से रेत निकालने के मामले में हकीकत में क्या हालात थे. और क्या किसी पुलिसकर्मी ने नाजायज तरीके से पैसों की मांग की थी. जांच में सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी. अब सभी की नजर जांच के निष्कर्ष पर है. यह देखना अहम होगा कि मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है.
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