बजट के दावे और जमीनी सच्चाई के बीच गंभीर अंतर, नई संरचनात्मक पहल का अभाव - भारतीय किसान यूनियन प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही
Serious gap between budget claims and ground reality, lack of new structural initiatives - Bharatiya Kisan Union State General Secretary Tejram Vidrohi
राजिम : भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 का गहन अध्ययन करने से यह स्पष्ट होता है कि बजट के दावे और जमीनी सच्चाई के बीच गंभीर अंतर है. सरकार ने कृषि और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देने का दावा किया है. लेकिन तुलनात्मक विश्लेषण से यह बजट किसानों की मूलभूत समस्याओं के समाधान में अपर्याप्त प्रतीत होता है.
बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि पिछले बजट में कृषि अनुदान, धान खरीदी और ग्रामीण अधोसंरचना पर जो घोषणाएँ की गई थीं. उनमें से कई अधूरी रहीं. वर्तमान बजट में उन्हीं योजनाओं को पुनः पैकेजिंग कर प्रस्तुत किया गया है. लेकिन नई संरचनात्मक पहल का अभाव है. वास्तविक निवेश की वृद्धि मुद्रास्फीति की दर की तुलना में नगण्य है. जिससे किसानों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होने वाला नहीं है.
राज्य सरकार किसानों को धान पर 3286 रुपये प्रति क्विंटल की दर अंतर की राशि देने बजट में प्रावधान नहीं किया है जिससे किसनो को प्रति एकड़ करीब चार हजार रुपये नुकसान होगा. कृषि लागत (डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी) में लगातार वृद्धि हुई है. अगर वास्तविक लागत की तुलना समर्थन मूल्य से की जाए. तो किसानों का लाभांश घटता हुआ दिखाई देता है. बजट में लागत नियंत्रण के ठोस उपायों का अभाव है.
सिंचाई विस्तार की घोषणाएँ वर्षों से की जाती रही हैं. लेकिन वास्तविक सिंचित रकबा अपेक्षित गति से नहीं बढ़ा. इस बजट में भी नई बड़ी सिंचाई परियोजनाओं की तुलना में रखरखाव पर अधिक बल है. जल संकट और वर्षा पर निर्भरता की समस्या का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत नहीं किया गया.
फसल बीमा योजना के अंतर्गत खेतों को इकाई मानकर प्रीमियम कटौती नियमित है. लेकिन मुआवजा भुगतान के समय खेतों को इकाई आं मानकर ग्राम पंचायत व तहसील को इकाई माना जाता है. जिससे बीमा का लाभ किसानों को नहीं मिलता है बजट में बीमा दावों के पारदर्शी और समयबद्ध निपटान के लिए कोई स्वतंत्र निगरानी तंत्र प्रस्तावित नहीं है.
ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि आधारित उद्योग, प्रसंस्करण इकाइयों और भंडारण सुविधाओं में निवेश अपेक्षाकृत कम है. अगर अन्य राज्यों के कृषि-उद्योग मॉडल से तुलना की जाए. तो छत्तीसगढ़ का बजट इस दिशा में पीछे दिखाई देता है.
वहीं अंशकलिक, अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने व आंदोलनरत कर्मियों जैसे, बीएड डीएड संघ, रसोय्या संघ, स्वस्थ्य कर्मचारियों, आंगनबाड़ी, विकलांग संघ, आदि की मांगों को पूरा करने कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB



