सुप्रीम कोर्ट का फैसला, पुलिस-ED-CBI समेत तमाम एजेंसियों को अब गिरफ्तार करने से पहले लिखित कारण देना जरुरी, गिरफ्तारी में नहीं होगी मनमानी

Supreme Court's decision, all agencies including police, ED, CBI are now required to provide written reasons before making an arrest, there will be no arbitrariness in arrests.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, पुलिस-ED-CBI समेत तमाम एजेंसियों को अब गिरफ्तार करने से पहले लिखित कारण देना जरुरी, गिरफ्तारी में नहीं होगी मनमानी

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा कि अब किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी से पहले पुलिस, ED, CBI या कोई भी जांच एजेंसी आरोपी को लिखित रुप से गिरफ्तारी का कारण बताएगी. अदालत ने साफ किया कि गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं हो सकती. बल्कि उसके पीछे ठोस, स्पष्ट और कानूनी आधार होना जरुरी है.
अदालत ने कहा कि गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि उसे किस मामले में और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है. इसके साथ ही एजेंसी को गिरफ्तारी के समय लिखित नोटिस/गिरफ्तारी मेमो देना जरुरी होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलिस, ईडी, सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों के लिए साफ दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले या गिरफ्तार करने के फौरन बाद उसे उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रुप से गिरफ्तारी का कारण बताना जरुरी होगा। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि अगर गिरफ्तारी की वजह आरोपी को उसकी भाषा में लिखित रुप से नहीं बताई गई. तो ऐसी गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा.
अदालत ने अपने फैसले में निम्न प्रमुख बिंदु निर्धारित किए हैं
गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताना संविधान का आदेश है और यह किसी भी हालत में टाला नहीं जा सकता.
गिरफ्तारी का कारण लिखित रुप में दिया जाना अनिवार्य होगा और वह भाषा वही होनी चाहिए जिसे आरोपी समझ सके.
अगर गिरफ्तारी के समय अधिकारी तत्काल लिखित कारण देने में असमर्थ हो तो पहले मौखिक रुप से कारण बताए जाएं। और बाद में लिखित नोटिस, रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले आरोपी को सौंपा जाना चाहिए.
अगर गिरफ्तारी के कारण लिखित रुप में नहीं बताए गए तो गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा और आरोपी को रिहा होने का अधिकार होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि यह फैसला पूरे भारत में तुरंत प्रभाव से लागू हो.
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