किडनी मरीज के परिजन को कथित धमकी मामले में BMO हटाने से भड़का विरोध, डॉक्टरों ने दी ‘नो वर्क, नो पे’ की चेतावनी, समर्थन में उतरा समाधान मंच
The removal of the BMO in connection with the alleged threat to a kidney patient's family sparked protests. Doctors issued a 'no work, no pay' warning and the Samadhan Manch came out in support.
गरियाबंद/देवभोग : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवभोग के बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू को पद से हटाए जाने के आदेश के बाद क्षेत्र में विरोध का स्वर तेज हो गया है. बुधवार को समाधान मंच के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता इकठ्ठा हुए और कार्रवाई का विरोध करते हुए डॉ. साहू को यथावत पदस्थ रखने की मांग की.
मिली जानकारी के मुताबिक 3 जून को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा डॉ. प्रकाश साहू को बीएमओ पद से हटाने का आदेश जारी किया गया था. आदेश के बाद सबसे पहले कर्मचारी यूनियन ने इसका विरोध दर्ज कराया. वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तीन चिकित्सकों ने भी डॉ. साहू के समर्थन में “नो वर्क, नो पे” पर जाने की अनुमति मांगी है.
मामले की शुरुआत 31 मई को हुई थी, जब एक मरीज के परिजन ने डॉ. साहू पर दुर्व्यवहार करने और थप्पड़ मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था. इस घटना के बाद एक सामाजिक संगठन भी विरोध में सामने आया था.
हालांकि डॉ. साहू के समर्थकों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना ही उन्हें पद से हटा दिया गया. कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस इंजेक्शन की मांग मरीज के परिजन द्वारा की जा रही थी. उसे देने का कोई चिकित्सकीय प्रावधान नहीं था. इसी बात को लेकर विवाद हुआ और बाद में बीएमओ के खिलाफ शिकायत की गई.
समर्थकों का कहना है कि बिना जांच के हुई कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और डॉक्टरों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है. उनका कहना है कि अगर किसी भी शिकायत पर फौरन कार्रवाई कर अधिकारियों को हटा दिया जाएगा तो इससे चिकित्सा कर्मियों का मनोबल प्रभावित होगा.
समाजसेवी कन्हैया मांझी ने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और निष्पक्ष जांच के आधार पर होनी चाहिए. बिना पूरी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. उन्होंने जिला प्रशासन से पारदर्शी जांच प्रक्रिया अपनाने की मांग की.
फिरोज खान ने कहा कि वायरल ऑडियो और आरोपों की तकनीकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए. अगर किसी की गलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो. लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी मान लेना उचित नहीं है.
रणवीर सोनी ने कहा कि सिर्फ एक लेटर पैड या शिकायत के आधार पर किसी अधिकारी को एकतरफा तरीके से पद से हटाना उचित नहीं है. किसी भी निर्णय से पहले मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जांच के बाद जो तथ्य सामने आएं. उसी के आधार पर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए. ताकि न्याय और पारदर्शिता बनी रहे.
वहीं समाधान मंच और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और डॉ. प्रकाश साहू को पुनः पदस्थ करने की मांग की है. अब इस पूरे घटनाक्रम पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
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