राजिम के मंदिर की मूर्तियों पर खून का तिलक, अंधविश्वास की अंधी दौड़ से गांव में दहशत, दो गिरफ्तार, पूछताछ में निकला चौंकाने वाला सच

Tilak of blood on the idols of Rajim temple, panic in the village due to blind race of superstition, two arrested, shocking truth came out during interrogation

राजिम के मंदिर की मूर्तियों पर खून का तिलक, अंधविश्वास की अंधी दौड़ से गांव में दहशत, दो गिरफ्तार, पूछताछ में निकला चौंकाने वाला सच

गरियाबंद/राजिम : गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देवरी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है. जहां एक मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियों पर खून के तिलक लगाए जाने से पूरे गांव में डर, सन्नाटा और अंधविश्वास का माहौल फैल गया. यह मामला ग्राम देवरी (स्कूलपारा) स्थित एक प्राचीन मंदिर का है. जहां सुबह पूजा करने पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि मूर्तियों के माथे पर खून सना हुआ था। यह नजारा देखकर गांव में हड़कंप मच गया.
मिली जानकारी के मुताबिक देवरी गांव के मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं की मूर्तियों पर किसी ने खून से तिलक कर दिया था. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब रविवार सुबह ग्रामीण पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे और मूर्तियों की हालत देख सन्न रह गए. मंदिर के पुजारी और गांव के जिम्मेदार लोग फौरन थाना राजिम पहुंचे और इस घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई.
मामला जैसे ही राजिम पुलिस के पास पहुंचा. थाना प्रभारी ने इसे गंभीरता से लिया. धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने की वजह से पुलिस ने बिना देर किए जांच शुरु की. मंदिर परिसर के आसपास पूछताछ की गई. संदिग्धों से जानकारी जुटाई गई. जिसके बाद पुलिस की निगाह गांव के ही दो व्यक्तियों लीलाराम साहू उम्र 42 साल और कामता प्रसाद साहू उम्र 50 साल पर जाकर टिक गई. दोनों आरोपी ग्राम देवरी स्कूलपारा के रहने वाले हैं.
पुलिस टीम ने दोनों को हिरासत में लेकर बारीकी से पूछताछ की. पूछताछ के दौरान जो खुलासा हुआ उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया. दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने ही मंदिर की सभी मूर्तियों पर खून से तिलक लगाया था. उनके मुताबिक “हमें कहीं से यह जानकारी मिली थी कि देवी-देवताओं पर खून का तिलक लगाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और धन-दौलत आती है. इसी अंधविश्वास में आकर हमने ऐसा किया”
चूँकि कानून के मुताबिक यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 298 और BNS की धारा 3(5) के तहत अपराध की श्रेणी में आता है. आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. साथ ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके खिलाफ अलग से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही भी की है.
घटना के बाद से गांव देवरी में डर, गुस्सा और ताज्जुब का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर उनके गांव की आस्था का केंद्र है. “इस तरह की हरकत से गांव का माहौल खराब हो सकता था. पुलिस ने फौरन कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ा. इसके लिए हम प्रशासन के आभारी हैं.” मंदिर समिति के अध्यक्ष रामाधार ने कहा.
वहीं, कुछ ग्रामीणों ने आरोपियों के इस कार्य को “अंधभक्ति की पराकाष्ठा और मूर्खता” बताया. उनके मुताबिक यह किसी भी दृष्टिकोण से धार्मिक कार्य नहीं बल्कि मूर्तियों का अपमान और समाज में गलत संदेश फैलाने वाला कृत्य है.
धारा 298 (IPC) के मुताबिक कोई भी अगर यदि किसी अन्य की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के मकसद से कोई भी शब्द कहता है या कार्य करता है. तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है. इस जुर्म के लिए दंड स्वरुप कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.
राजिम थाना प्रभारी ने बताया कि “मामला बेहद संवेदनशील था. धार्मिक भावनाओं से जुड़ा था. जिससे गांव में तनाव फैल सकता था. इसी को देखते हुए फौरन आरोपियों को पकड़कर उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की गई है. समाज में किसी भी तरह का अंधविश्वास फैलाना अपराध की श्रेणी में आता है.”
गरियाबंद पुलिस अधीक्षक ने भी साफ संदेश देते हुए कहा कि “धार्मिक आस्था का अपमान करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. अंधविश्वास के नाम पर किसी भी तरह की अवैज्ञानिक गतिविधि करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”
सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि “यह घटना बताती है कि आज भी गांवों में अंधविश्वास किस कदर फैला हुआ है. शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार-प्रसार होना जरुरी है. ताकि लोग ऐसे जुर्म की तरफ न बढ़ें. देवी-देवता पर खून चढ़ाना घोर अमानवीय और धार्मिक दृष्टि से भी अनुचित है.”
फिलहाल राजिम पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, मामले की जांच जारी है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस कार्य के लिए खून कहां से लाया गया. यह जानवर का था या अन्य स्रोत से.. एफएसएल टीम को भी जरुरत पड़ने पर बुलाया जाएगा ताकि सबूतों की पुष्टि हो सके.
गांव देवरी का यह मामला बताता है कि आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा कितनी महीन है. एक तरफ देवी-देवताओं के प्रति असीम श्रद्धा, तो दूसरी तरफ तंत्र-मंत्र और अवैज्ञानिक मान्यताओं में उलझा समाज.. गरियाबंद पुलिस की तत्परता ने एक बड़े विवाद और संभावित साम्प्रदायिक तनाव को टाल दिया. लेकिन यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर कब तक लोग अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़े रहेंगे.
अब सवाल ये कि
•क्या यह सिर्फ अंधविश्वास था या इसके पीछे कोई और साजिश?
•मंदिरों को निशाना बनाने की ये कोई बड़ी योजना तो नहीं?
गरियाबंद पुलिस की मुस्तैदी ने एक बड़े अंधविश्वासी पाखंड का पर्दाफाश कर दिया है। लेकिन सवाल अभी भी हवा में हैं. क्या ये अंत है या किसी डरावने सिलसिले की शुरुआत?
गिरफ्तार आरोपी:
लीला राम साहू पिता श्याम लाल साहू, उम्र 42 साल निवासी ग्राम देवरी स्कूलपारा, थाना राजिम जिला गरियाबंद छत्तीसगढ़
कामता प्रसाद साहू पिता अधारी साहू, उम्र 50 साल निवासी ग्राम देवरी स्कूलपारा, थाना राजिम जिला गरियाबंद छत्तीसगढ़
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