विश्व आदिवासी दिवस पर गरियाबंद में अमित बघेल शामिल, संजय सिंह बोले- सरकार हमारे जंगलो को छीनकर उद्योगपतियों को दे रही, निकली भव्य रैली
Amit Baghel participated in the World Tribal Day event in Gariaband; Sanjay Singh stated that the government is snatching away forests and handing them over to industrialists; a grand rally was also held.
गरियाबंद : विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर 9 अगस्त को गरियाबंद में आदिवासी समाज ने शक्ति, एकता और अधिकारों का जोरदार प्रदर्शन किया. कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली विधायक मुकेश सहरावत, क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल और बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव सहित हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए.
इस कार्यक्रम से पहले मालगांव से मोटरसाइकिल रैली निकाली गई. जो तिरंगा चौक पहुंची।यहां आतिशबाजी और जोरदार नारों के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया. मंच पर आदिवासी संस्कृति की झलक भी देखने को मिली. पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समाज के लोगों ने कार्यक्रम को भव्य रूप दिया.
इस दौरान संजय सिंह बोले 10 करोड़ की आबादी, फिर भी एक भी आदिवासी भारत रत्न क्यों नहीं? सभा को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आदिवासी समाज के अधिकार,शिक्षा, स्वास्थ्य और जल-जंगल-जमीन के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि भारत में आदिवासी समाज की आबादी करीब 10 करोड़ है. लेकिन अब तक किसी आदिवासी को भारत रत्न नहीं मिला. उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद समाज को विकास की मुख्यधारा से दूर क्यों रखा गया?
संजय सिंह ने बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर के शिक्षा संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा ही अधिकार और बदलाव का सबसे बड़ा हथियार है. उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कहीं अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. स्कूल बंद हो रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार विकास की बात कर रही है.
उन्होंने विपक्षी नेताओं और आंदोलनों को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए संजय सिंह ने कहा कि अगर सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए जेल भेजने का रास्ता अपनाती है तो वे जेल जाने से डरने वाले नहीं हैं. “जेल भेजना है तो भेजिए, हम जेल जाने को तैयार हैं. लेकिन झुकना पसंद नहीं है.”
संजय सिंह ने सामाजिक भेदभाव और सांप्रदायिक राजनीति का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने सवाल किया कि आदिवासी, किसान, छात्र और आम जनता के मुद्दों को छोड़कर समाज को धर्म और जाति के नाम पर क्यों बांटा जा रहा है. उन्होंने कहा कि असली मुद्दे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आरक्षण और नागरिक अधिकार हैं. उन्होंने किसानों और छात्रों के आंदोलनों का जिक्र करते हुए सरकार पर आंदोलनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप लगाया और पूछा कि आखिर सरकार किसके हित में काम कर रही है.
अडानी का मुद्दा उठाकर सरकार पर हमला
संजय सिंह ने छत्तीसगढ़ में खनिज संपदा और जंगलों को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कोयला, बिजली, पानी और खनिज संसाधनों पर बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में किसी कंपनी के काम के लिए ग्रामसभा की भूमिका और संवैधानिक अधिकार महत्वपूर्ण हैं. लेकिन उनके मुताबिक इन अधिकारों की अनदेखी की जा रही है.
उन्होंने मंच से कहा कि “जल, जंगल और जमीन की लड़ाई में मैं आपके साथ खड़ा रहूंगा.”
मुकेश सहरावत बोले- आदिवासी पेड़ काटे तो जेल, बड़े कारोबारी काटें तो सरकार खामोश?”
दिल्ली विधायक मुकेश सहरावत ने भी आदिवासी अधिकारों और जंगलों के मुद्दे पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि अगर कोई आदिवासी एक पेड़ काटता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो जाती है. लेकिन बड़े उद्योगों द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के आरोपों पर सरकार की भूमिका पर सवाल उठते हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ में जंगल और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा.
इस मौके पर क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने अपने संबोधन में आदिवासी और छत्तीसगढ़ के मूलनिवासी अधिकारों को लेकर तीखा तेवर दिखाया. उन्होंने “जय जोहार” के नारे के साथ कहा कि छत्तीसगढ़ के निवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा.
अमित बघेल ने कहा कि जब समाज अपने अधिकार मांगता है तो आंदोलनकारियों को जेल भेज दिया जाता है. लेकिन वे जेल जाने से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े महापुरुष भी जेल गए थे और अगर छत्तीसगढ़ के मूलनिवासियों के हक के लिए जेल जाना पड़े तो वे इसके लिए तैयार हैं.
“अगर हमारे संवैधानिक अधिकार नहीं मिलेंगे तो हम अपने अधिकार छीनकर लेंगे।” “आदिवासी सिर्फ वोट बैंक नहीं”
अमित बघेल ने राजनीतिक दलों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि अब आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक समझने की राजनीति नहीं चलेगी. उन्होंने समाज के लोगों से अपील किया कि जब चुनाव के समय कोई राजनीतिक दल वोट मांगने आए तो उससे पूछा जाए कि आदिवासी समाज के लिए उसकी ठोस योजना क्या है. उन्होंने हसदेव क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के विरोध में अपने आंदोलन और जेल जाने का जिक्र करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के मूलनिवासियों के अधिकारों के लिए आवश्यकता पड़ी तो वे लंबे संघर्ष के लिए भी तैयार हैं.
आयोजन में दिखी आदिवासी एकता
विश्व आदिवासी दिवस के इस आयोजन में हजारों की तादाद में समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए. मंच पर अतिथियों का सम्मान किया गया और आदिवासी संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया. इस कार्यक्रम के दौरान जल-जंगल-जमीन, संवैधानिक अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे।पूरे कार्यक्रम में आदिवासी समाज की एकजुटता और अधिकारों को लेकर मुखरता दिखाई दी.
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विश्व आदिवासी दिवस पर निकली भव्य रैली
गरियाबंद/देवभोग : आदिवासी समाज द्वारा काफी धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मुख्यालय में आदिवासी दिवस मनाया गया. इस बीच भारी तादाद में युवक-युवती सहित पूरे सामाजिक लोग पारंपरिक वेशभूषा धारण कर तीर कमान के साथ विशाल सांस्कृतिक रैली निकाली. रैली ने देवभोग नगर का वातावरण आदिवासी संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया.
सबसे पहले हाई स्कूल मैदान कार्यक्रम स्थल पर आदिवासियों को विरासत बिरसा मुंडा तात्या भील के अलावा बाबा साहब आंबेडकर जैसे अन्य महापुरुषों चित्र पर पुष्प अंजली अर्पित करते नमन किया तत्पश्चात मुख्य अतिथि अजजा शासकीय सेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.एन. ध्रुव और कार्यक्रम की अध्यक्षता टेक चंद्र ने की.
इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष गरियाबंद गौरी शंकर कश्यप, टेकचंद मांझी, धनसिंह मरकाम, लोकेंद्र कोमर्रा ने सामाजिक लोगो संबोधन करते शिक्षा पर जोर देने का अपील किया. उसके बाद हाई स्कूल से गांधी चौक और गांधी चौक स्तंभ से बाबा साहब आंबेडकर के प्रतिमा पर पूजा अर्चना किया इस बीच पारंपरिक लोक नृत्य, लोकगीत एवं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों ने लोगों का मन मोह लिया। जगह-जगह नागरिकों ने रैली का स्वागत किया.
सबसे खास बात तो यह रही कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, भाषा, परंपराओं एवं बस्तर के प्रसिद्ध लोक नृत्यों के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ समाज के अधिकारों एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश देना रहा. रैली में बड़ी तादाद में कार्यक्रम में अजजा शासकीय सेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.एन. ध्रुव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.
कार्यक्रम की अध्यक्षता टेक चंद्र ने की। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष गरियाबंद गौरी शंकर कश्यप, टेकचंद मांझी, धनसिंह मरकाम, लोकेंद्र कोमर्रा सहित युवा, महिलाएं, बुजुर्ग एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, एकजुटता और स्वाभिमान का परिचय देते हुए समाज की परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया. पूरे आयोजन के दौरान उत्सव जैसा माहौल बना रहा.
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विश्व आदिवासी दिवस का विरोध कर भाजपा आदिवासी अस्मिता का विरोध कर रही – दीपक बैज
भाजपा सरकार के द्वारा विश्व आदिवासी दिवस को शासकीय स्तर पर नहीं मनाये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा जिस प्रदेश की 32 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की हो. जहां पर दुनिया की सबसे प्राचीन आदिवासी सभ्यता निवास करती हो वहां की सरकार अगर आदिवासी दिवस मनाने से परहेज कर रही है तो यह आदिवासी समाज का अपमान है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन आदिवासी सभ्यता और संस्कृति पर गौरव का दिन है. आदिवासी संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन और मौलिक संस्कृति है. इस दिवस को मनाने का मकसद दुनिया के सामने यह बताना है कि आदिवासी समाज और उनकी सभ्यता किसी से कम नहीं. यह दिन आदिवासी समाज के लिये गर्व का दिन है. प्रदेश का मुखिया आदिवासी समाज से आता है. उसके बाद प्रदेश में शासकीय तौर पर आदिवासी दिवस मनाने से परहेज किया जा रहा है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि विश्व आदिवासी दिवस का विरोध कर भाजपा ने आदिवासियों व उनकी संस्कृति का जो खुला विरोध किया है. उसे छत्तीसगढ़ के आदिवासी नहीं भूलेंगे और भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे. भाजपा आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक की तरह देखती है और इसीलिए उसने कहने को तो एक आदिवासी को मुख्यमंत्री बना दिया है. लेकिन उन्हें अपने आदिवासी भाई बहनों के साथ उत्सव मनाने से भी रोक रही है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आज का दिन केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है. आज का दिन हमें अपनी जड़ों को याद करने का दिन है. आज का दिन उन महान परंपराओं को नमन करने का दिन है. जिन्होंने सदियों से जल, जंगल, जमीन, प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन बनाकर रखा है. हमारे आदिवासी समाज ने हमें सिखाया है कि जंगल केवल लकड़ी नहीं है. नदी सिर्फ पानी नहीं है और जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं है. जंगल हमारा जीवन है. जल हमारी सांस है. जमीन हमारी पहचान है. और हमारी संस्कृति हमारी आत्मा है. छत्तीसगढ़ की पहचान आदिवासी संस्कृति के बिना अधूरी है. बस्तर की धरती हो, सरगुजा की पहाड़ियां हों, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोरबा, जशपुर, बलरामपुर और गरियाबंद के वनांचल हों. हर जगह आदिवासी समाज ने अपनी मेहनत, संस्कृति और संघर्ष से छत्तीसगढ़ की पहचान बनाई है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि वीर आदिवासी नायकों को नमन का दिन है. आज के दिन हम उन सभी आदिवासी वीरों और वीरांगनाओं को नमन करते हैं. जिन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया. हम भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर और देश के असंख्य ज्ञात-अज्ञात आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं. इन वीरों ने हमें सिखाया कि अन्याय के सामने झुकना नहीं है. उन्होंने हमें सिखाया कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना अपराध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता से कोई समझौता नहीं होगा. आदिवासी अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा. जल-जंगल-जमीन के अधिकार से कोई समझौता नहीं होगा. भाजपा और आरएसएस भले ही आदिवासी दिवस का विरोध करे. आदिवासी समाज इसे गर्व से मनाता रहा है, मनाता रहेगा.
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