एक तरफ आजादी का महापर्व और दूसरी ओर श्रमिकों के हक और सम्मान की लड़ाई चौथे दिन भी जारी, कबीरधाम में मजदूर एकता जिंदाबाद के लगे नारे

On one hand, there is the grand celebration of Independence, while on the other, the struggle for workers' rights and dignity continues for the fourth consecutive day; slogans of "Mazdoor Ekta Zindabad" (Long live workers' unity) were raised in Kabirdham.

एक तरफ आजादी का महापर्व और दूसरी ओर श्रमिकों के हक और सम्मान की लड़ाई चौथे दिन भी जारी, कबीरधाम में मजदूर एकता जिंदाबाद के लगे नारे

जब तक तुम्हारे नेता का फोन नहीं आएगा,काम पर वापस नहीं करूंगा”, प्रबंध संचालक के कथित बयान से श्रमिकों में आक्रोश
कबीरधाम/पंडरिया : कारखाना में कार्यरत श्रमिकों की जायज मांगों, लंबे समय से लंबित समस्याओं और मौलिक अधिकारों की रक्षा को लेकर भारतीय मजदूर संघ के तत्वावधान में जारी ‘टूल-डाउन’ आंदोलन शुक्रवार को चौथे दिन भी पूरी एकजुटता और दृढ़ता के साथ जारी रहा। प्रबंधन द्वारा चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई सार्थक हल न निकालने से श्रमिकों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है.
भारतीय मजदूर संघ ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का न होकर कारखाना के सभी श्रमिकों के अधिकार, आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य का है. संगठन ने प्रबंधन के तानाशाही रवैये और श्रमिकों के दमन की कड़ी निंदा की है.
प्रमुख मुद्दे एवं मांगें:
????बकाया वेतन का भुगतान: पिछले 7 महीनों से ज्यादा समय से लंबित वेतन का त्वरित एवं पूर्ण भुगतान किया जाए.
????हड़ताल अवधि का बकाया: बीते 2 साल के दौरान हड़ताल अवधि के रोके गए पैसे का अविलंब भुगतान हो.
????अवैध निष्कासन पर रोक: अपनी जायज मांगों एवं जानकारी मांगने वाले श्रमिकों की आईडी डिलीट कर उन्हें नौकरी से निकाले जाने की दमनात्मक कार्रवाई तुरंत रद्द की जाए.
????श्रमिक ललित की सकुशल काम पर वापसी: प्रबंधन की व्यक्तिगत दुर्भावना और मनमाने बयानों पर रोक लगाते हुए निष्कासित श्रमिक ललित को तत्काल प्रभाव से सम्मानपूर्वक काम पर वापस लिया जाए.
प्रबंधन के तानाशाही रवैये का कड़ा विरोध
संगठन ने प्रबंध संचालक के उस गैर-जिम्मेदाराना बयान पर गहरा आक्रोश जताया है. जिसमें कहा गया कि “जब तक तुम्हारे नेता का फोन नहीं आएगा, ललित को काम पर वापस नहीं करूंगा.”
भारतीय मजदूर संघ का दोटूक संदेश
“श्रमिकों का रोजगार और उनके अधिकार किसी व्यक्ति विशेष की मर्जी या फोन कॉल के मोहताज नहीं हैं. अपनी वाजिब समस्याओं पर सवाल पूछना श्रमिक का लोकतांत्रिक अधिकार है. और उसका जवाब देना प्रबंधन का वैधानिक कर्तव्य है. डरा-धमकाकर या अनुचित दबाव बनाकर श्रमिकों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता.”
आंदोलन जारी रखने का संकल्प
चार दिन के लगातार संघर्ष के बाद भी भारतीय मजदूर संघ और तमाम श्रमिक पूरी मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं. संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी मांगों का सम्मानजनक एवं स्थाई समाधान नहीं निकल जाता. तब तक यह लड़ाई पीछे नहीं हटेगी और आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा.
जारीकर्ता: भारतीय मजदूर संघ पंडरिया इकाई
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