सरकार की उपेक्षा से नाराज छग कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का 29 दिसंबर से 3 दिवसीय हड़ताल का ऐलान, 11 सूत्रीय मांग को लेकर होगा धरना

Angered by the government's neglect, the Chhattisgarh Employees and Officers Federation has announced a three-day strike from December 29th, and will protest over 11-point demands.

सरकार की उपेक्षा से नाराज छग कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का 29 दिसंबर से 3 दिवसीय हड़ताल का ऐलान, 11 सूत्रीय मांग को लेकर होगा धरना

रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सरकार की उदासीनता के खिलाफ 28 दिसंबर को नवा रायपुर के तुता में तीन दिवसीय जंगी प्रदर्शन किया जाएगा. यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के बैनर तले आयोजित होगा. जिसमें प्रदेश के 32 संगठनों से जुड़े हजारों अनियमित कर्मचारी शामिल होंगे.
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला संयोजक टेकराम सेन ने बताया कि मोदी की गारंटी में कर्मचारी अधिकारियों के लिये बहुत सारी घोषणाएं की गई थी. लेकिन आज कर्मचारियों को महंगाई भत्ता जैसे मूलभूत अधिकार के लिये सडक़ पर उतरना पड़ रहा है.
फेडरेशन का कहना है कि अनियमित कर्मचारी पिछले 5 साल से लेकर 25-30 सालों तक शासन की जनहितकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. लेकिन आज भी उन्हें “अनियमित” कहकर उपेक्षित किया जा रहा है. कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी हालत अब मध्यकालीन बंधुआ मजदूरों से भी बदतर हो चुकी है. पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक असुरक्षा, बेरोजगारी और प्रशासनिक दबाव के चलते वे लंबे समय से अन्याय सहने को मजबूर हैं.
चुनाव पहले मिले आश्वासन, सरकार बनने के बाद चुप्पी
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने कहा कि चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने अनियमित कर्मचारियों के मंच पर आकर उनकी समस्याएं सुनी थीं और सरकार बनने पर जल्द निराकरण का आश्वासन दिया था. इसके बावजूद भाजपा सरकार के 17 महीने पूरे हो जाने के बाद भी अनियमित कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
‘मोदी की गारंटी’ के वादे पूरे नहीं होने का आरोप
फेडरेशन ने आरोप लगाया कि ‘मोदी की गारंटी 2023’ पत्र के अंतर्गत वचनबद्ध सुशासन के बिंदु क्रमांक 2 में अनियमित कर्मचारियों को शामिल कर एक समिति गठित कर समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी. लेकिन समिति गठन के आदेश में अनियमित कर्मचारियों का कोई उल्लेख नहीं किया गया और न ही उनके संगठनों के पदाधिकारियों को समिति में शामिल किया गया। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है.
वेतन नहीं, छंटनी का संकट
अनियमित कर्मचारियों का कहना है कि न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 और संविदा नियम 2012 के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों से आधे से भी कम वेतन दिया जा रहा है. न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण वर्ष 2017 के बाद नहीं हुआ है. वहीं संविदा वेतन में अगस्त 2023 के बाद कोई वृद्धि नहीं की गई. कई विभागों में कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है. और कई जगह पर सालों से कार्यरत कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है.
प्रमुख मांगें
अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने सरकार के समक्ष प्रमुख रूप से पाँच मांगें रखी हैं—
अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण/स्थायीकरण
निकाले गए कर्मचारियों की बहाली
न्यून मानदेय कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जाना
अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जाना
आउटसोर्सिंग, ठेका, सेवा प्रदाता एवं समूह-समिति के माध्यम से नियुक्ति प्रणाली बंद कर विभागों में समायोजन
फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा. 28 दिसंबर का जंगी प्रदर्शन इसी चेतावनी का हिस्सा है.
आंदोलन के लिये कर्मचारी नेता प्रमोद तिवारी, उमेश भारती गोस्वामी, अशोक गिरि गोस्वामी, डा. रामकुमार चंद्राकर, कमलेश ध्रुव, एस पी ध्रुव, शिव कुमार साहू, अरुण कुमार प्रधान, मनीष ठाकुर, सिराज बक्श, राकेश थवाईत, दीपक तिवारी, ओमनारायण शर्मा, ईश्वर चंद्राकर, राजेश शर्मा, कमल यादव, उमेश साहू, मिलाप यादव, संदीप तिवारी, रामनारायण चंद्राकर, चिन्ताराम साहू, अविनाश लाल, हेमेन्द्र आचार्य, विष्णु यादव, दिनेश प्रधान सहित कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला संयोजक टेकराम सेन, महामंत्री दिलीप तिवारी ने कर्मचारियों से अपील किया कि संगठन शक्ति का परिचय देते हुए सरकार के वादा खिलाफी के लिये आवाज बुलंद करें. उक्त जानकारी संदीप तिवारी और दीपक तिवारी ने दी है.
जनसेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर
तीन दिनों तक सरकारी कामकाज बंद रहने से
प्रमाण पत्र और लाइसेंस से जुड़े कार्य
राजस्व और तहसील स्तर के मामले
आरटीआई आवेदन
पेंशन, वेतन और भुगतान प्रक्रियाएं
प्रभावित हो सकती हैं। इसके चलते आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
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