‘जो करना है कर लो’ टिप्पणी पर घिरे IAS कटारिया, सांसद बृजमोहन की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने मांगी रिपोर्ट, पूर्व CM बघेल ने बढ़ाई सियासी हलचल
IAS officer Kataria faces heat over 'do whatever you want' remark; Lok Sabha Secretariat seeks report following complaint by MP Brijmohan; former CM Baghel intensifies political stir.
रायपुर : रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के स्वास्थ्य सचिव, 2004 बैच के IAS अमित कटारिया पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की और कटारिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की सूचना भी लोकसभा को दी है. शिकायत और लोकसभा सचिवालय के पत्र की प्रतियों के मुताबिक बृजमोहन अग्रवाल का आरोप है कि अमित कटारिया ने उनसे कहा- ‘जो करना है कर लो!’ इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी भाजपा सांसद के समर्थन में बयान देते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है.
बता दें कि वर्ष 20 मई को बृजमोहन अग्रवाल को शिकायत थी कि जनहित से जुड़े मामलों और प्रशासनिक बातों को लेकर अमित कटारिया उनकी चिट्ठियों और स्मरण पत्रों का जवाब नहीं देते. ऐसा कई महीनों से चल रहा था.
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह एक निर्वाचित प्रतिनिधि के प्रति एक अफसर का गैरजिम्मेदाराना रवैया था. एक प्रशासनिक अफसर के रूप में यह अमित कटारिया की अपनी जवाबदेही के प्रति उदासीनता थी.
अगले दिन, 21 मई को लोकसभा अध्यक्ष को दी गई अपनी औपचारिक शिकायत में उन्होंने लिखा कि ‘लगातार गैर जवाबदेही का यह रवैया संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत उनके विशेषाधिकार का हनन और केंद्र सरकार द्वारा 1 दिसंबर 2011 और 13 सितंबर 2022 को जारी प्रोटोकॉल के दिशा निर्देशों का सरासर उल्लंघन है.’
20 मई को क्या हुआ?
करीब ढाई महीने पहले 20 मई को यह विवाद तब गंभीर हो गया जब बृजमोहन अग्रवाल के मुताबिक अमित कटारिया ने कथित रूप से फोन पर उनसे वह विवादित बात कह दी.
बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी शिकायत में इस घटना का जो ब्योरा दिया है उसके मुताबिक उन्होंने 20 मई की शाम 5:43 बजे मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को फोन कर स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की इस निष्क्रियता के खिलाफ शिकायत की. इस पर सुबोध सिंह ने फौरन अमित कटारिया को फोन पर ही निर्देशित किया कि वे सांसद से फौरन बात करें और उनके संसदीय क्षेत्र से जुड़े सारे मुद्दों को हल करें. अमित कटारिया ने 7:44 बजे बृजमोहन अग्रवाल को फोन किया. तब अग्रवाल व्यस्तता की वजह से उनका फोन रिसीव नहीं कर पाए. लेकिन जैसे ही उन्हें फुर्सत मिली उन्होंने फौरन अमित कटारिया को कॉल बैक किया.
अग्रवाल की शिकायत के मुताबिक उन्होंने कटारिया से अपने सभी लंबित मामलों की स्थिति जाननी चाही. उनका कहना है कि इस पूरे संवाद के दौरान अमित कटारिया बेहद रूखे, अपमानजनक और बेहद अनादरपूर्ण लहजे में बात कर रहे थे. उन्होंने पूरी बातचीत में अहंकारपूर्ण और अमर्यादित ढंग से बात की.
बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा कि अमित कटारिया ने उनसे यहां तक कहा – ‘जो करना है कर लो!’ उन्होंने कहा कि कटारिया का यह व्यवहार वरिष्ठ आईएएस अफसर से अपेक्षित आचरण के विपरीत और संवैधानिक मूल्यों, संसदीय प्रोटोकॉल और स्थापित प्रशासनिक आचरण के खिलाफ था.
बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी शिकायत में लिखा कि अगर एक लोकसभा सदस्य के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है तो इस बात का अंदाज लगाया जा सकता है कि आम नागरिकों के साथ इस अफसर का व्यवहार कैसा होगा.
उन्होंने यह भी लिखा कि इस अफसर के खिलाफ पहले भी कई जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें आती रहीं हैं.
बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले का गंभीरता के साथ संज्ञान लेने का आग्रह करते हुए नियम 227 के तहत मामला विशेषाधिकार समिति को भेजे जाने की मांग की है. साथ ही अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 18 या केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम के नियम 20 के तहत कार्मिक विभाग से स्वास्थ्य सचिव के विरुद्ध कार्रवाई करने की भी मांग की है.
अब क्या हो रहा है?
लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय को पत्र भेजकर मामले पर अंग्रेजी और हिंदी, दोनों भाषाओं में ‘फैक्चुअल नोट’ अविलंब उपलब्ध कराने को कहा है. ताकि इसे लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखा जा सके. सचिवालय ने यह भी पूछा है कि क्या इस नोट की एक प्रति सांसद को भी दी जा सकती है.
फिलहाल इस पूरे कथित प्रकरण पर न तो सांसद बृजमोहन अग्रवाल और न ही IAS अधिकारी अमित कटारिया की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. अगर भविष्य में इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण, जांच या तथ्य सार्वजनिक होते हैं, तो उसके बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस मामले को फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और कथित दावों के रूप में ही देखा जा रहा है..
इस बारे में यह स्पष्ट नहीं है कि सांसद ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी इस मामले की शिकायत की या नहीं.
उल्लेखनीय है अमित कटारिया कुछ बरस प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में काम कर हाल ही में अपने कैडर वाले राज्य छत्तीसगढ़ लौटे हैं. प्रशासन में अमित कटारिया की छवि एक सख्त मिजाज अफसर की है. लेकिन उनका विवादों से नाता पुराना है.
बात 2015 की है और संयोग से वह भी मई का महीना था. तब 9 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बस्तर दौरे पर आये थे. तब कटारिया बस्तर कलेक्टर थे और इस नाते प्रधानमंत्री की उन्होंने अगवानी की. लेकिन ऐसा करते हुए उन्हें ध्यान नहीं रहा कि उन्होंने आंखों पर धूप का काला चश्मा पहना हुआ है. और इसे गरिमा के प्रतिकूल माना जाएगा. तब राज्य सरकार ने उन्हें आचार संहिता के विपरीत आचरण करने के लिए सचेत करते हुए नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में कहा गया था कि इस तरह का कोई भी कृत्य भविष्य में ना करें जो अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी के गरिमा के अनुरूप ना हों.
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भूपेश बघेल ने सांसद बृजमोहन का किया समर्थन, सरकार पर साधा निशाना
मामले ने राजनीतिक रंग तब पकड़ लिया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि उनकी और बृजमोहन अग्रवाल की वैचारिक असहमतियाँ हो सकती हैं. लेकिन वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधी है. देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के सदस्य है। राजधानी रायपुर के सांसद हैं.
भूपेश बघेल ने आरोप लगाते हुए कहा, एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह का बर्ताव यह दर्शाता है कि प्रदेश की कमान दिल्ली और नागपुर के हाथों में है. यही वजह है कि अधिकारियों को जनता के काम और जनप्रतिनिधियों की मांग से कोई फर्क नहीं पड़ता. वे सिर्फ दिल्ली और नागपुर को खुश कर अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, बल्कि उन सभी मतदाताओं का भी अपमान है. जिन्होंने अपने प्रतिनिधि को चुनकर संसद भेजा है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बृजमोहन अग्रवाल का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा है. वे संगठन और शासन-प्रशासन दोनों को अच्छी तरह समझते हैं और अधिकारियों से कैसे निपटना है. यह भी जानते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सांसद अपने मतदाताओं को निराश नहीं करेंगे.
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