नन गिरफ्तारी केस, बजरंगदल कार्यकर्ताओं पर FIR की मांग, युवतियां बोलीं बैड टच किया गया, गंभीर आरोप लगाकर एसपी को लगाई इंसाफ की गुहार
Nun's arrest case, demand for FIR against Bajrang Dal workers, girls said they were touched inappropriately, made serious allegations and appealed to SP for justice
बिलासपुर/नारायणपुर : शुक्रवार को एनआईए कोर्ट में केरल की दो नन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि नन ने जांच में मदद किया है और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए दोनों नन को जमानत दे दी है. पुलिस ने दोनों नन पर मानव तस्करी और मतांतरण की साजिश का आरोप लगाया. जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को बेबुनियाद बताया.
ननों की गिरफ्तारी के मामले को लेकर प्रदेश में सियासत गर्म हो चुकी है. जिसकी आंच दिल्ली और केरल तक महसूस की जा रही है. जगदलपुर पहुंचे उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में बढ़ते मतांतरण पर चिंता जताई और इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा बताया. उन्होंने सभी दलों से अपील की कि मतांतरण के खिलाफ मिलकर प्रयास करें. इधर कांग्रेस और वाम दलों ने गिरफ्तारी को पूर्वनियोजित और सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ बताया.
वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने इसे गंभीर अन्याय बताया और कहा कि नन सिर्फ आदिवासी लड़कियों को नौकरी के लिए शहर ले जा रही थीं. वहीं सांसद जेबी माथर ने गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संसद में आवाज उठाने की बात कही.
इस मामले में डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए केरल भाजपा अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कैथोलिक बिशप्स कान्फ्रेंस आफ इंडिया के अध्यक्ष आर्चबिशप एंड्रयूज थाझथ से भेंट की. आर्चबिशप ने कहा कि चर्च इस गिरफ्तारी से व्यथित हैं. क्योंकि इनमें से एक नन तीन दशक से कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रही थीं.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में नन गिरफ्तारी मामले में अब अबूझमाड़ की 3 युवतियों ने बजरंगदल के कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज करने नारायणपुर SP को आवेदन दिया है. इनका आरोप है कि दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 100 से 200 लड़कों ने उन्हें घेर लिया था. जातिगत गालियां दी. बैड टच किया. फिर पुलिस स्टेशन लेकर गए. वहां हमें एक कमरे में रखा. पुलिस जवानों को बाहर कर एक कमरे में घुस गए. कमरे के अंदर ज्योति शर्मा और उसके साथ 20 से 25 लड़के थे. कमरे में भी हमें पीटा गया. FIR कराने हम पर जबरदस्ती दबाव बनाया गया. FIR नहीं कराने पर धमकी देने लगे.
दरअसल, ये तीनों युवतियां नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ के अलग-अलग गांवों की रहने वाली हैं. ये ईसाई धर्म को मानती हैं. कुछ दिन पहले 2 नन के साथ आगरा जा रही थी. इसी बीच दुर्ग रेलवे स्टेशन पर इन्हें रोक लिया गया था. ननों की गिरफ्तारी हुई थी. हालांकि 2 अगस्त को उन्हें बेल मिल गई है.
शनिवार को को ही ये तीनों युवतियां नारायणपुर SP कार्यालय पहुंचीं. इन्होंने लिखित आवेदन देकर SP से FIR की मांग की. इन तीनों युवतियों में एक की उम्र 21 साल, 2 युवतियों की उम्र 19-19 साल है. इन्होंने कहा है कि दुर्ग में पुलिस ने कोरे कागज पर दस्तखत करवाया.
उनका आरोप है कि उन्हें सखी वन स्टॉप सेंटर भेज दिया था. वहां भी हमें 4 दिनों तक एक कमरे में बंद कर रखा था. न तो किसी से बात करने दिया गया और न ही कमरे से बाहर जाने दिया. इनका कहना है कि वे अपने परिजनों की इजाजत से ही ननों के साथ जा रही थीं. इनके आरोप के बाद हमने नारायणपुर SP रॉबिंसन गोरिया से भी बात करने की कोशिश की. हालांकि उन्होंने फोन नहीं उठाया.
वहीं बता दें कि नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर कुकुडाझोर गांव में रहने वाली कमलेश्वरी प्रधान ने बताया कि हम हमारी मर्जी से मिशन अस्पताल में काम करने के लिए भोपाल जा रही थी. रेलवे स्टेशन में बजरंग दल के लोग पकड़कर ले गए और झूठा मामला बना दिया.
उन्होंने ननों को निर्दोष बताते हुए कहा कि बजरंग दल के लोगों के द्वारा दबाव बनाकर नन को जेल भिजवाया गया है. दोनों नन और एक सुखमन मंडावी निर्दोष हैं. हम अपनी मर्जी से आगरा होते हुए भोपाल जा रहे थे. परिजनों की सहमति से मिशन अस्पताल काम करने जा रहे थे. हमारे नाम से झूठा मामला बनाया गया हैं.
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