रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़, महाकुंभ स्नान के लिए जा रहे 18 श्रद्धालुओं की जिंदगी खत्म, मरने वालों में 14 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल, 25 घायल
Stampede broke out at the railway station, 18 devotees going for Maha Kumbh bath lost their lives, 14 women and 3 children were among those killed, 25 injured.
नई दिल्ली : नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात करीब 9.30 बजे भगदड़ मची. इसमें अब तक 18 श्रद्धालुओं की मौत हो गई. इस तादाद में और इजाफा भी हो सकता है. मरने वालों में 14 महिलाएं और 3 बच्चे हैं. 25 से ज्यादा लोग घायल हैं.
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की घटना के प्रभावित लोगों को मुआवजे का ऐलान हो चुका है. सरकार मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए का मुआवजा देगी. इसके साथ ही गंभीर रुप से घायल लोगों को 2.5 लाख का मुआवजा और मामूली घायल लोगों को एक लाख का मुआवजा देने का ऐलान भी हुआ है.
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में हुईं 18 मौतों को कांग्रेस ने नरसंहार बताया है. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि रेलवे प्रशासन की निष्क्रियता की वजह से यह घटना हुई है. सुप्रिया श्रीनेता ने पूछा कि इन मरने वालों की क्या गलती थी. यह हादसा नहीं नरसंहार है.
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि रेल मंत्री ने इस्तीफा देने की बजाय बेशर्मी से कहा कि सब कुछ ठीक है. श्रद्धालुओं के इस नरसंहार का जिम्मेदार कौन है. रेलवे की निष्क्रियता के कारण अब तक 18 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं.
रेल मंत्री पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि अश्विनी वैष्णव मौत के आंकड़ों को छुपाने में लगे हुए हैं. रेल मंत्री द्वारा हादसे पर पर्दा डाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब लोग मर रहे थे तब रेल मंत्री मौत का आंकड़ा छुपा रहे थे. हादसे के लिए रेल मंत्री को जिम्मेदार ठहराने के बजाय उस जनता को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जो महाकुंभ के लिए जाना चाहती थी. अगर यह जिम्मेदारी नहीं ले सकते तो सरकार में क्यों बैठे हैं. इस देश में अब आम आदमी की कोई कीमत नहीं बची है.
प्रयागराज जा रहे एक श्रद्धालु ने बताया कि प्लेटफॉर्म नंबर-12 पर शिवगंगा एक्सप्रेस जा रही थी. गाड़ी के जाते ही सारी भीड़ प्लेटफॉर्म 14-15 पर आ गई. प्लेटफॉर्म भीड़ संभाल नहीं पाया और भगदड़ मच गई. भीड़ एस्क्लेटर और स्टेशन के दरवाजों की ओर भागी। इससे ओवरब्रिज व सीढ़ियों पर भीड़ बढ़ गई.
श्रद्धालुओं के मुताबिक महाकुंभ के लिए जाने वाली दो ट्रेनें लेट हो गई थी. इस वजह स्टेशन पर बड़ी तादाद में श्रद्धालु इकट्ठे हो गए थे. ये लोग अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे. इसी बीच अचानक प्लेटफॉर्म चेंज का अनाउंसमेंट होने की वजह से लोग एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म की तरफ भागने लगे. जिसकी वजह से भगदड़ के हालात बने.
शनिवार-रविवार की छुट्टी के चलते महाकुंभ में जाने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने से स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई. भीड़ को काबू करने के लिए पर्याप्त अमला न होने से हालात बेकाबू हाे गए. भीड़ एक-दूसरे पर चढ़ने लगी.
श्रद्धालुओं ने यह भी बताया कि प्लेटफॉर्म से ज्यादा भीड़ पुल पर थी और वहीं पर भगदड़ मची.
रेलवे ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. एनडीआरएफ की टीम भी राहत के लिए स्टेशन पहुंच गई. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि पूरी टीम प्रभावितों की मदद में जुटी है.
मौतों के बाद भी अफसर घर से नहीं निकले, बताते रहे अफवाह
स्टेशन पर हालात बेकाबू होने से भगदड़ और दबकर मौतों के बाद भी रेल अफसर घर से नहीं निकले. बल्कि हादसे को अफवाह बताते रहे. उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने भगदड़ से इंकार किया. उन्होंने कहा कि कोई भगदड़ नहीं हुई. यह अफवाह है. भारी भीड़ की वजह से यात्रियों ने एक-दूसरे को धक्का दे दिया. जिससे कुछ यात्रियों को चोटें आईं. हालांकि कुछ देर बाद ही दिल्ली उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मौतों की पुष्टि की और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई. हालांकि बाद में सक्सेना ने ट्वीट बदल दिया.
शोक संवेदना के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर पीएम मोदी तक इस हादसे पर शोक जता चुके हैं. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रेलवे की बदइंतजामी पर भी सवाल खड़े किए हैं. कई विपक्षी नेताओं ने इस हादसे के लिए मोदी सरकार पर निशाना साधा है.
कांग्रेस सांसद ने इसे रेलवे की नाकामी करार दते हुए कहा कि प्रयागराज जा रहे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए स्टेशन पर बेहतर इंतजाम किए जाने चाहिए थे. बेहतर इंतजाम नहीं होने के कारण ये हादसा हुआ है.
रायबरेली सांसद ने लिखा कि- हमारी मांग है कि मृतकों व घायलों की संख्या जल्द से जल्द घोषित की जाए व गुमशुदा लोगों की पहचान भी सुनिश्चित की जाए. पीड़ितों के परिजनों को हमारी गहरी संवेदनाएं.. घायलों को तत्काल इलाज के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस हादसे पर दुख जताया हैष उन्होंने कहा कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई मौतों के मामले में मोदी सरकार द्वारा सच्चाई छिपाने की कोशिश बेहद शर्मनाक और निंदनीय है.
खड़गे ने लिखा, ‘नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ से कई लोगों की मृत्यु हो जाने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है. स्टेशन से आ रहे वीडियो बेहद हृदयविदारक है. हमारी मांग है कि मृतकों व घायलों की संख्या जल्द से जल्द घोषित की जाए व गुमशुदा लोगों की पहचान भी सुनिश्चित की जाए. पीड़ितों के परिजनों को हमारी गहरी संवेदनाएं. घायलों को तत्काल इलाज के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (15 फरवरी 2025) की रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसे पर गंभीर चिंता जाहिर की है. उन्होंने एक्स पर कहा कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे में महाकुंभ जा रहे श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत बेहद दुखद एवं पीड़ादायक है.
आप के राष्ट्रीय संयोजक ने एक्स पर लिखा कि- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे में महाकुंभ जा रहे श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत बेहद दुखद एवं पीड़ादायक है. ईश्वर उनकी आत्माओं को शांति प्रदान करें। हादसे में जिन परिवारों ने अपनों को खोया उन सभी के प्रति मेरी संवेदनाएँ हैं.
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हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है उनमें आभा देवी, पिंकी देवी, शीला देवी, व्योम, पूनम देवी, ललिता देवी, सुरुचि, कृष्णा देवी, विजय साहा, नीरज, शांति देवी, पूजा कुमार, संगीता मलिक, पूनम, ममता झा, रिया सिंह, बेबी कुमारी और मनोज शामिल हैं.
इस घटना में दिल्ली में किराड़ी के रहने वाले उमेश गिरी अपनी 45 वर्षीय पत्नी शीलम देवी को खो चुके हैं. गिरधारी का कहना है, "हम दोनों पटना से पहले आनंद विहार ट्रेन से आए फिर पानीपत जाने के लिए नई दिल्ली से ट्रेन पकड़ रहे थे, लेकिन प्लेटफ़ॉर्म 14 पर भगदड़ मचने से मामी की मौत हो गई."
उमेश अपनी आंखोदेखी बताते हैं, "मेरे सामने पहले से कई लोगों की बॉडी गिरी हुई थी. उसके बाद वो लोग टकराए हैं, उनके ऊपर से लोग जाने लगे हैं." उन्होंने बताया, "उस समय लोगों (बॉडी) को झीने के सामने ही लगा रखा था. उस समय वहां पर न कोई मीडिया थी और न कोई प्रशासन था."
मदद को लेकर उमेश कहते हैं, "मदद तो कुछ नहीं मिली. बाद में बहुत देर हो गई थी. मैंने कई पुलिस वाले, आरपीएफ़ वालों को कहा लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था." दिल्ली के सुल्तानपुरी की रहने वालीं शोभा मूलरूप से बिहार की हैं. इस घटना में उन्होंने अपनी देवरानी को खो दिया है.
शोभा बताती हैं, "मेरे देवर जख्मी थे, उन्होंने फोन कर बताया कि वो घायल हैं, जल्दी आओ." वो बताती हैं, "मेरे देवर ने फोन किया, यहां भगदड़ मच गई, मैं घायल हूं और पत्नी की मौत हो गई. उनके दोनों बच्चे दबे हुए थे, वो सही सलामत हैं, लेकिन पत्नी की मौत हो गई."
अस्पताल की स्थिति पर शोभा कहती हैं, "घायलों से पूरा वार्ड भरा पड़ा है. वहां बहुत सारी डेड बॉडीज़ हैं. मैंने खुद देखी है. एक बेड पर चार-चार लोग पड़े हैं. जिस बेड पर मेरी देवरानी हैं, उसमें तीन लोग हैं."
अपने परिवार के साथ कुंभ के लिए निकले संजय ने इस घटना में अपनी बहन को खो दिया है. संजय ने बताया, "हम 12 लोग प्रयाग एक्सप्रेस से कुंभ के लिए जा रहे थे, लेकिन हम लोग प्लेटफॉर्म तक पहुंच ही नहीं पाए. पहले ही झीने पर ही मौत हो गई."
संजय कहते हैं, "मेरे छोटे भाई की पत्नी और मेरी बेटी फंस गई थी. उनको हमने निकाला. मेरी बहन मुझे आधे घंटे बाद मिली. तब तक वो मर चुकी थीं. एक घंटा हमने उसे सीपीआर भी दिया. लेकिन एक घंटे तक कोई भी नहीं आया."
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