तीजा-पोरा तिहार एवं पारंपरिक खेल महोत्सव, पूर्व CM भूपेश बघेल सपरिवार हुए शामिल, जन्मदिन पर शुभकामनाओं की लगी बौछार
Teeja-Pora Tihaar and Traditional Sports Festival, former CM Bhupesh Baghel attended with his family, received a shower of wishes on his birthday
रायपुर : छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत करने वाला तीजा-पोरा तिहार रायपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में धूमधाम से मनाया गया. पारंपरिक खेल, लोकगीत, व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से माहौल उत्सवमय हो गया. इस मौके पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और एआईसीसी राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल सपरिवार शामिल हुए.
इस कार्यक्रम की शुरुआत भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना से हुई. भूपेश बघेल ने सपरिवार शामिल होकर श्रद्धापूर्वक भगवान शंकर की पूजा कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की. उन्होंने कहा कि “तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ की संस्कृति का आधार है. इन पर्वों से हमारी लोक परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंचती हैं.”
कार्यक्रम में फुगड़ी, पिट्ठुल, रस्साकशी, गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेलों का आयोजन हुआ. महिलाएं फुगड़ी खेलते हुए पूरे मैदान में उत्साह भर रही थीं. लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीतों और नृत्यों से कार्यक्रम को और भी रंगीन बना दिया. पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं और युवतियों ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर संस्कृति का सुंदर प्रदर्शन किया.
स्टेडियम में चिला, फरा, ठेठरी-खुरमी, पुआ और अरसा-भजिया जैसे व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच रही थी. तीजा-पोरा तिहार मातृशक्ति को समर्पित पर्व है, इस मौके पर मायके आई बहनों और बेटियों का विशेष सम्मान किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि “बेटियों का सम्मान हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।”
भूपेश बघेल का जन्मदिन – शुभकामनाओं की बौछार
इस खास दिन पर भूपेश बघेल का जन्मदिन भी मनाया गया। उन्होंने अपने जन्मदिन की शुरुआत परिवार के साथ की। सुबह से ही शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा रहा. कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर बधाई संदेश पोस्ट किए। #HappyBirthdayBhupeshBaghel और #तीजा_पोरा_तिहार सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं.
कार्यक्रम की झलकियां तेजी से वायरल हो रही हैं. लोग तीजा-पोरा तिहार की पारंपरिक झलकियों और भूपेश बघेल की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं. रायपुर सहित पूरे प्रदेश में त्योहार और जन्मदिन को लेकर उत्साह का माहौल बना रहा.
आयोजन समिति ने बताया कि इस कार्यक्रम का असल मकसद छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को संरक्षित करना, पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना और समाज में आपसी भाईचारा कायम रखना है. आधुनिक समय में जहां लोग पारंपरिक पर्वों से दूर हो रहे हैं. ऐसे आयोजन इन पर्वों को नई ऊर्जा देते हैं.
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रायपुर राजधानी में पिछले बहुत साल से चले आ रहे पारंपरिक पोरा तिहार को ऐतिहासिक स्थान रामसागर पारा में बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. जिसमें पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के संरक्षण में एवं आयोजक छत्तीसगढ़ पारंपरिक पोरा तिहार उत्सव समिति रामसागर पारा द्वारा मेन रोड में मंच लगा कर बैला दौड़ का आयोजन कराया गया.
जिसमें समस्त बैल जोड़ों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया. साथ में सम्मान राशि के रूप में सर्वश्रेष्ठ बैल जोड़ों को 6100 रुपये एवं प्रथम बैल जोड़े को 5100 रुपये, द्वितीय बैल जोड़े को 4100 रुपये एवं अन्य सभी बैल जोड़ों को प्रोत्साहन राशि के रुप में 3100 रुपये की उपहार राशि दी गई. साथ ही प्रशस्ति पत्र देकर सभी बैल जोड़ों के मालिकों का उत्साह वर्धन किया गया.
छत्तीसगढ़ प्रदेश में खेती में योगदान देने वाले बैलाें को सम्मान देने के लिए गांव-गांव से लेकर शहर भर में आज 23 अगस्त को पोला पर्व श्रद्धा-उल्लास से मनाया गया.
छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार पोला पर्व पर बैलों की पूजा आरती कर ठेठरी, खुरमी, चीला आदि छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भोग लगाया गया.
छत्तीसगढ़ के पारम्परिक तिहार हमेशा की तरह रायपुर शहर के रामसागर पारा में
पोरा तिहार ( महोत्सव ) बड़े ही धूम धाम से बड़े स्तर पर क्षेत्र वासियो की मौजूदगी में मनाया गया. रामसागर पारा मेन रोड मे दर्जनों बैलो की जोड़ियों ने दौड़ लगाकर मौजूद लोगो का अपनी तरफ ध्यान खींचा. जहां एक तरफ बैल की जोडिया दौड़ लगा रही थी. वहीँ दूसरी तरफ बैलो के ऊपर आकर्षक मनमोहक झाकिया भी लोगो का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी. रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने खुद बैल जोड़ी के लगाम को पकड़ कर रोड मे दौड़ लगाई और इस बैल दौड़ की प्रतियोगिता मे हिस्सा लिया.
इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के साथ शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गिरीश दुबे, विजय साहू, ऋषि साहू, शत्रुघ्न निषाद पोतू राम साहू, मंगल राम साहू, प्रीतराम साहू, प्रहलाद मिश्रा, सियाराम अग्रवाल, फागुराम राम साहू, आनंद राम साहू, मोहन साहू, भंगोली, श्याम रत्न साहू, हरीश साहू, विवेक उपाध्याय सहित बड़ी तादाद में क्षेत्र वासी मौजूद रहे
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कृषि मंत्री रामविचार नेताम के शासकीय बंगले में पोरा तिहार का होगा भव्य आयोजन
रायपुर : कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नवा रायपुर अटल नगर स्थित एम-5 सेक्टर-24, शासकीय निवास परिसर में 23 अगस्त को पोरा का भव्य आयोजन सुबह बजे हुआ. इस आयोजन में छत्तीसगढ़ सरकार के सभी मंत्री, विधायक तथा आमजन शामिल हुए.
मंत्री रामविचार नेताम के बंगले में पोरा तिहार मनाया गया. छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक परब पोरा तिहार के पावन मौके पर मंत्री रामविचार नेताम के नवा रायपुर स्थित शासकीय आवास/कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए.
इस मौके पर प्रदेशवासियों को पोरा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएं दी. पोरा तिहार हमारे संस्कृति, खेती-किसानी और पशुधन के महत्व को बताता है. किसान भाई तिहार में पशुधन की पूजा-अर्चना कर समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हैं.
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मैनपुर क्षेत्र में पोला पर्व पर यादव समाज ने शोभा यात्रा निकाल पूजा अर्चना किया
गरियाबंद : छत्तीसगढ़ की धरती पर कृषि प्रधान जीवनशैली और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. इन्हीं परंपराओं में से एक है पोला पर्व, जो भादो मास की अमावस्या को धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन किसान अपने मेहनतकश साथी बैलों को साज सजाकर उनकी पूजा अर्चना करते हैं.
सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सव का माहौल दिखाई दिखा बैलों को स्नान कराकर उनके सींगों में रंग–रोगन कर सजावट कर पूजा किया गया व मिट्टी के बैल बनाकर उनकी पूजा अर्चना कर पारंपरिक व्यजंन चीला रोली का प्रसाद भोग लगाया गया. इसके बाद बैलों को हार, फूल, घंटियों से सजाया गया.
यादव समाज द्वारा मैनपुर नगर में शोभायात्रा निकालकर साहडा देव स्थल पर पूजा अर्चना किया गया. इसमें ग्राम पंचायत मैनपुर के सरपंच श्रीमती हनीता नायक, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण, एनएसयूआई प्रदेश सचिव चित्रांश ध्रुव, गेंदु यादव, सुखराम यादव, दयाराम यादव एवं बड़ी संख्या में नगर व क्षेत्र के लोग मौजूद थे,
पोला यह पर्व केवल आस्था तक सीमित नहीं है. बल्कि किसान और बैल के अटूट रिश्ते का प्रतीक है, खेतों में कठिन परिश्रम करने वाले बैलों के प्रति आभार व्यक्त करने की अनोखी परंपरा इसी दिन निभाई जाती है.
पोला पर्व चत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में गहरे तक जुड़ा हुआ है। यह न सिर्फ कृषि प्रधान समाज की पहचान है. बल्कि पर्यावरण और पशु–प्रेम का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है.
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