आदिवासी नेता को निष्कासन की धमकी, BJYM के प्रदेशाध्यक्ष रवि भगत को नोटिस पर गर्म हुई सियासत, कोई पत्र लिख तो कोई गाना गाकर जता रहा विरोध
Tribal leader threatened with expulsion, politics heated up over notice to BJYM state president Ravi Bhagat, some are protesting by writing letters and some by singing songs
रायपुर : छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार और संगठन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. ये हम नहीं कह रहे हैं ये सब बीजेपी नेताओं की कार्यशैली से जाहिर हो रहा है. दरअसल, कैडर बेस्ड पार्टी में नेता सार्वजनिक तौर से अपना दुख जाहिर कर रहे हैं. बीते दिनों भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने गाना गाकर उनके क्षेत्र में डीएमएफ फंड से भी काम नहीं होने का दुख जाहिर कर खुद की सरकार को घेरा था. जिसके बाद राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि सत्ता और संगठन में तालमेल बैठ नहीं पा रहा है.
भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत को अनुशासनहीनता के मामले में नोटिस दिए जाने पर कांग्रेस ने भाजपा पर सवाल खड़ा किया है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि रवि भगत ने डीएमएफ की राशि रायगढ़ के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी खर्च किए जाने की बात उठाई है. सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए. लेकिन भाजपा ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया है.
उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासी नेता रवि भगत को नोटिस देकर डरा रही है. इसका मतलब भाजपा में लोकतंत्र खत्म हो चुका है. दीपक बैज ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर भाजपा पर निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया में तंज कसा है कि आखिरकार ब्यूरोक्रेसी और RSS के बीच चल रहे संघर्ष में आदिवासी युवा नेता रवि भगत की लगाम कसने बीजेपी आगे आ गई है. उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर निष्कासन करने की खुली धमकी दी गई है. यानि अब डबल इंजन में डीएमएफ का बंदरबाट जारी रहेगा. खबरदार अगर किसी ने आवाज उठाई.
रवि भगत ने हाल के दिनों में जिला खनिज न्यास (DMF) फंड के उपयोग और रायगढ़ क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार सवाल खड़े किए थे. उनके इन बयानों ने पार्टी के अंदर ही असहजता की स्थिति पैदा कर दी थी. भाजपा के अंदरुनी सूत्रों का मानना है कि रवि भगत के सोशल मीडिया पोस्ट से संगठन की सार्वजनिक छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है. पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इसे सार्वजनिक मंच पर पार्टी की नीतियों और कामकाज को चुनौती देने वाला कदम बताया है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव के निर्देश पर रवि भगत को यह नोटिस जारी किया गया है. जिसमें उनसे पूछा गया कि उन्होंने पार्टी मंच के बाहर सार्वजनिक तौर पर इस तरह की टिप्पणियां क्यों कीं. पार्टी ने इसे “अनुशासनहीनता” करार देते हुए रवि भगत से 7 दिन में लिखित जवाब मांगा है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत का खुलकर समर्थन किया. भूपेश बघेल ने X पोस्ट में लिखा है कि “रवि भगत को सिर्फ इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वे 'अडानी संचार विभाग' के प्रवक्ता (जो मंत्री भी हैं) से लगातार सवाल पूछ रहे हैं.” उन्होंने दावा किया कि भगत की विचारधारा अलग हो सकती है. लेकिन उन्हें दबाने की कोशिश एक आदिवासी युवा की आवाज को खामोश करने का प्रयास है.
इस समर्थन पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश भाजपा सह मीडिया प्रभारी अनुराग अग्रवाल ने भूपेश बघेल पर पलटवार करते हुए कहा कि, “पूर्व सीएम को आदिवासी नेताओं की चिंता अब क्यों हो रही है?” उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल ने अपने कार्यकाल में डीएमएफ फंड में हुए घोटालों को नजरअंदाज किया और अब उन्हीं मुद्दों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान कवासी लखमा जैसे आदिवासी नेताओं को केवल चेहरा बनाकर करोड़ों का खेल रचा गया. लेकिन अब जब सवाल उठे हैं. तो बचाव की राजनीति हो रही है.
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि भाजपा जिसे अनुशासन बताती रही है. वह तानाशाही है. इसके खिलाफ भाजपा के नेता और कार्यकर्ता मुखर हो रहे हैं. रवि भगत हों, या नारायणपुर के भाजपा के नेता हों, या पूर्व मंत्री ननकी राम हों. वह पहले ही कह चुके हैं कि सरकार में किसी के काम नहीं हो रहे हैं. बृजमोहन अग्रवाल कई बार पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा, भाजपा के कमल के फूल में जितनी पंखुड़िया हैं, बीजेपी में उतने गुट बन चुके हैं. यह एक-दूसरे की टांग खींच रहे हैं. बीजेपी की तानाशाही के खिलाफ लोग आकर्षित हो चुके हैं. यही स्थिति केंद्र में है. आरएसएस और पीएम मोदी का अलग टकराव चल रहा है.
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