अवैध कब्जा हटाने के दौरान बवाल, आशियाना उजड़ते ही पीड़ित ने पिया जहर, गंभीर हालत में भर्ती, भेदभाव के सवाल, गांव में भड़का आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
Uproar during anti-encroachment drive; victim consumes poison as home is demolished and is hospitalized in critical condition; allegations of discrimination spark village-wide outrage and threats of protest.
धमतरी/मगरलोड/छीपली : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम छीपली में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस समय हड़कंप मच गया. जब पीड़ित पक्ष के चम्पा लाल साहू ने मौके पर ही जहर का सेवन कर लिया। घटना के बाद उन्हें फौरन इलाज के लिए मगरलोड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया. जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम छीपली में तहसीलदार मनोज भारद्वाज, पुलिस और पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी. इसी दौरान चम्पा लाल साहू के पशु आवास को अतिक्रमण बताकर बुलडोजर से हटाया गया. कार्रवाई से आहत होकर उन्होंने जहर सेवन कर लिया. घटना के बाद बड़ी तादाद में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और तनाव के हालात बन गए. पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि गांव में कई जगह अतिक्रमण है. लेकिन कार्रवाई सिर्फ दो परिवारों को निशाना बनाकर की गई.
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
परिजनों का आरोप है कि जिस जमीन पर पशु आवास बना था. वह गांव वालों की सहमति से दी गई थी. लेकिन अब उसे मुक्तिधाम की आरक्षित भूमि बताकर हटाया गया. ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
एसडीएम ने स्थानांतरण की कार्रवाई पर लगाई रोक
वहीं, तहसील प्रशासन द्वारा हटाए गए मलबे को अन्यत्र ले जाने के निर्देश दिए जाने को लेकर भी पीड़ित पक्ष में नाराजगी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम नभ सिंह कोसले के निर्देश पर सामग्री स्थानांतरण की कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई है.
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर गांव में मौजूद सभी अतिक्रमण पर समान रूप से कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करेंगे. फिलहाल मौके पर पुलिस बल तैनात है और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं.
कार्यवाही सिर्फ अतिक्रमण हटाना या पुरानी रंजिशें निकलना?
क्या बुलडोजर की कार्यवाही सिर्फ अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई थी, या फिर इसके पीछे गांव की पुरानी रंजिशें और प्रभावशाली लोगों का दबाव भी काम कर रहा था? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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