मैनपुर क्षेत्र के जंगल में जंगली हाथियों का कहर जारी, शाम होते ही डर के कारण नहीं निकल रहे घरों से ग्रामीण, 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा की मांग
Wild elephants continue to wreak havoc in the forests of the Mainpur region. Villagers are afraid to leave their homes after dusk, demanding compensation of 50,000 per acre.
गरियाबंद : गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर मुख्यालय के नजदीक गांव में इन दिनों हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है. साथ ही किसानों के धान और मक्के की फसल को जमकर नुकसान पहुंचा रहा है. जिसके चलते ग्रामीणों में भारी डर और दहशत देखने को मिल रही है. ग्रामीण हाथियो के डर के चलते फसल की सुरक्षा करने भी खेत की तरफ नहीं जा पा रहे हैं.
तहसील मुख्यालय मैनपुर से महज 5 से 10 किमी दूर सिकासार दल के करीब 20 हाथियो का दल ग्राम छिन्दौला, धोबीपारा, लुठापारा, रामपारा, जिड़ार, चलकीपारा, दबनई में पिछले 10 दिनो से विचरण कर रहा है.
वन विभाग और हाथी मित्र दल के सदस्य लगातार गांव -गांव पहुंचकर ग्रामीणों को जंगलो की तरफ अकेले नही जाने की अपील कर रहे हैं. लेकिन दूसरी तरफ हाथियों का दल लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है. सोमवार को रात में हाथियो के दल ने नेशनल हाइवे को पारकर छोटेगोबरा भटगांव की जंगल के तरफ रुख किया था. लेकिन मंगलवार को शाम 4 बजे के आसपास हाथियों के दल अचानक मैनपुर से महज 4 किमी दूर नेशनल हाइवे 130 सी गौरघाट बजरंग बली मंदिर के सामने सड़क पार किया तो दोनो तरफ वाहनों की काफिला लग गया. कई लोगों ने हाथियों की तस्वीर अपने कैमरे में कैद किया. जो लगातार क्षेत्र के सोशल मिडिया में वायरल हो रही है. क्योंकि हाथियों का दल पहली बार मैनपुर के बहुत नजदीक और दिन के समय सड़क पार करते नजर आ रहा है.
मैनपुर क्षेत्र के ग्राम जिड़ार निवासी सोमनाथ, हेमसिंह, हरिसिंह, लुठापारा के रामेश्वर, रामनाथ, लेडीबहार के पिलसाय, पुरूषोत्तम, भानुशंकर ने बताया हाथियो के दल ने क्षेत्र के किसानो के धान और मक्के के फसल को रौंद रहा है. गांव से जंगल लगा हुआ है और जंगल किनारे किसानों का खेत है. खेतों में हाथियों का दल घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है. किसान इतना डरे हुए है कि हाथियों से फसल की सुरक्षा के लिए खेत की तरफ जाना छोड़ दिये है.
मैनपुर क्षेत्र के बिजलीविहीन ग्रामों में हाथियो के डर से ग्रामीण रात में गांव के युवाओं का बकायदा ड्यूटी लगाया जा रहा है. जो मशाल जलाकर रात-रात भर रतजगा कर हाथियों से बचाव के लिए गांव के चारो तरफ पहरा दे रहे हैं. क्योंकि हाथियों के दल ने खेतों में एक दर्जन से ज्यादा लारी और झोपड़ियों का तहस-नहस कर दिया है.
वन विभाग के एसडीओ मनोज चंद्राकर ने कहा कि पिछले एक हफ्ते से हाथियों का दल मैनपुर क्षेत्र के जंगलों में डेरा डाले हुए हैं. और कल गोबरा के तरफ रुख किया था. लेकिन आज शाम 4 बजे के आसपास नेशनल हाइवे को पारकर फिर वापस लौट गया है. वन विभाग एवं हाथी मित्र दल लगातार उनके हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं. साथ ही गांव-गांव मुनादी करवा कर ग्रामीणों को जंगल की तरफ अकेले नहीं जाने की अपील किया जा रहा है. चंद्राकर ने बताया फसल क्षतिपूर्ति आकलन किया जा रहा है. किसानों को फसल क्षतिपूर्ति दिया जाएगा.
गरियाबंद जिले के बोड़ापाला (जंगल धवलपुर) गांव के किसान इन दिनों दो दुश्मनों से लड़ रहे हैं. पहला हाथियों का झुंड और दूसरा प्रशासन का मुआवजा फॉर्मूला. साल भर की मेहनत धान की फसल पर हाथियों ने धावा बोला और सरकार ने किसानों के घाव पर नमक छिड़कते हुए सिर्फ 9 हजार प्रति एकड़ का मुआवजा थमा दिया. अब किसान पूछ रहे हैं. धान बेचे या सरकार को चूना लगाने की ट्रेनिंग लें?
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि इस हालात में किसान हँसे या रोएं, समझ नहीं पा रहे हैं. क्योंकि बाजार में एक एकड़ धान से किसान औसतन 50 हजार की कमाई करता है. मगर प्रशासन का कैलकुलेटर शायद किसी और जरिए से पर बना है. तभी तो नुकसान की भरपाई 9 हजार से करने की बात हो रही है.
संजय नेताम ने कहा है कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा. उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि शासन को प्रस्ताव भेजकर कम से कम 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा सुनिश्चित किया जाए. वरना किसान अब जंगल से हाथी भगाने के बजाय प्रशासन को जगाने की तैयारी में हैं. आंदोलन की चेतावनी देकर उन्होंने माहौल गर्म कर दिया है.
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