गरियाबंद में स्कूल पहुंचने के लिए रोजाना 20 फीट ऊंचे पिलर से जंग लड़ रहे नौनिहाल, पैरी नदी के अधूरे पुल ने बच्चों को बनाया ‘जान जोखिम में डालने’ को मजबूर
In Gariaband, young children battle a 20-foot-high pillar daily to reach school; an incomplete bridge over the Pairi River forces them to risk their lives.
गरियाबंद : शिक्षा को हर बच्चे का अधिकार माना जाता है, लेकिन गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र में शिक्षा हासिल करने के लिए नौनिहालों को हर रोज अपनी जान की बाजी लगानी पड़ रही है. एक ऐसा ही खौफनाक और दिल दहला देने वाला नजारा तहसील मुख्यालय मैनपुर के नजदीक महज 5 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी मे सामने आया है. जहां स्कूली बच्चे 20 फीट ऊंचे पिलर पर लगी लोहे की सीढ़ी चढ़कर और उतरकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं. यहां हर कदम पर मौत का साया मंडरा रहा है और जरा सा पैर फिसलते ही किसी बड़ी अनहोनी या जानलेवा दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है. जान हथेली पर रखकर रोजाना सुबह जब ये मासूम बच्चे अपने घरों से स्कूल के लिए निकलते हैं. तो उनके बस्ते में किताबों के साथ-साथ एक अनजाना डर भी होता है.
रास्ते में पड़ने वाले एक अधूरे पुल निर्माण या ऊंचे पिलर को पार करने के लिए संबंधित ठेकेदार एवं शासन प्रशासन या स्थानीय स्तर पर कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं की गई है. विकल्प के तौर पर खड़ी की गई लोहे सरीया की संकरी सीढ़ी ही इन बच्चों का एकमात्र सहारा है. भारी-भरकम स्कूल बैग पीठ पर लादे ये बच्चे जब एक-एक कदम फूंक-फूंक कर इस सीढ़ी पर रखते हैं. तो नीचे खड़े अभिभावकों और देखने वाले ग्रामीणो की सांसें अटक जाती हैं. बारिश के दिनों में या सीढ़ी पर हल्की सी फिसलन होने के कारण स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाती है. परिजनों का कहना है कि वे हर वक्त इसी चिंता में डूबे रहते हैं कि उनका बच्चा सुरक्षित घर लौटेगा या नहीं। ग्रामीणों के मुताबिक इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं. लेकिन अब तक शासन-प्रशासन की नींद नहीं खुली है. क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
5 वर्षों बाद भी करोड़ों का पुल निर्माण कार्य अधूरा कलेक्टर का फटकार का असर नहीं पड़ा
तहसील मुख्यालय मैनपुर से 5 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी में पिछले 5-6 साल से विशाल पुल निर्माण कार्य किया जा रहा है. पुल निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है. इसकी शिकायत ग्रामीणों द्वारा करने पर क्षेत्रीय विधायक जनक ध्रुव एवं गरियाबंद के तत्कालीन कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने एक साल पूर्व निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी ठेकेदार एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी तब निर्माण एजेंसी द्वारा 6 माह के भीतर बारिश से पहले पूल निर्माण कार्य पूरा करने की बात कही थी. लेकिन कलेक्टर की फटकार का असर ठेकेदार पर नहीं देखा गया जिसके परिणाम स्वरूप अधूरे पूल में जान जोखिम में डालकर बच्चे स्कूल तक आने मजबूर हो रहे हैं. अगर कोई बड़ी दुर्घटनाएं घटती है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा. और तो और अधूरे पुल जिसकी लंबाई करीब 300 मी के आसपास है उसके ऊपर लोहे के सरिया का राड जगह-जगह खतरनाक स्थिति में खुले नुकीले निकले हुए हैं. जिसमें बच्चे और ग्रामीण आए दिन जख्मी हो रहे हैं. लगातार बारिश की वजह से स्कूली बच्चों को 20 फीट ऊंचे पिलर को सीढ़ी के सहारे पर कर आने जाने मजबूर होना पड़ रहा है.
सरकार के दावों की खुली पोल
एक तरफ सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया, तो बढ़ेगा इंडिया’ और ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ जैसे बड़े-बड़े नारे लगाती है. वहीं दूसरी तरफ आदिवासी विकास क्षेत्र धरातल पर इन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. सुरक्षित रास्ता न होने की वजह से कई बच्चों ने डर के मारे स्कूल जाना भी कम कर दिया है. जिससे उनका भविष्य अंधकार में लटक रहा है. अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या फिर इन नौनिहालों को यूं ही मौत के साए में सफर करने के लिए छोड़ दिया जाएगा.
ग्राम पंचायत के सरपंच ने कहा, बच्चों की जान जोखिम में अधूरे पुल को लेकर करेंगे आंदोलन
ग्राम पंचायत के सरपंच महेश दीवान, जनपद सदस्य प्रताप सिंह मरकाम, पूर्व उपसरपंच पवन दीवान, लोकेश साण्डे, लीलाधर ,रामप्रसाद, सोहन नागेश बुधराम साण्डे, हितराम, देवन सिंह नेताम, सोहन नागेश, पूर्व सरपंच डिकेश्वरी साण्डे एवं ग्रामीणों ने बताया पुल ठेकेदार द्वारा बेहद कछुए की चाल से निर्माण कार्य किया जा रहा है. कई बार शिकायत किया जा चुका है. बारिश के इन दिनों में दर्जनों बच्चे नदी उसपार खामभाठा यह अन्य मोहल्ले से प्राथमिक या मिडिल ,हाईस्कूल पढ़ाई करने आ रहे हैं. नदीपार कर या उफान पर होने के कारण 20 फीट ऊंचे पिलर को चढ कर स्कूल पहुंच रहे हैं. कभी भी गंभीर दुर्घटना घटना की अंदेशा बनी हुई है. ग्रामीणों ने गरियाबंद कलेक्टर एवं शासन प्रशासन से मांग किया है कि इस ओर गंभीरता से ध्यान दिया जाए नहीं तो मजबूरन ग्रामीण और छात्र नेशनल हाईवे 130 सी में चक्का जाम करने मजबूर होंगे.
विधायक जनक ध्रुव ने कहा अधूरे पुल का निरीक्षण कर एक साल पहले ही निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया था. 6 माह के भीतर पुल निर्माण करने का आश्वासन दिया था. अब बच्चों को भारी परेशानी हो रही है साथ ही ग्रामीण भी जान जोखिम में डालकर आना-जाना कर रहे हैं. लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग के अवसर और संबंधित निर्माण एजेंसी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इन पर तत्काल कार्रवाई किया जाना चाहिए.
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