सरकारी योजनाओं और जनसेवा के मंच पर सम्मान का उठ रहे सवाल, सरपंचों को नीचे उतारा तो जमीन पर बैठकर जताया गुस्सा!, घटना को बताया निंदनीय
Questions regarding protocol and respect have arisen at a public service event featuring government schemes; when Sarpanchs were asked to step down from the dais, they sat on the ground to express their anger, terming the incident condemnable.
धमतरी/नगरी : मंच सजा था. अफसर मौजूद थे. सरकारी योजनाओं और जनसेवा का संदेश देने के लिए सेवा संकल्प का बड़ा आयोजन था. लेकिन इसी मंच से एक ऐसी तस्वीर सामने आई. जिसने पूरे कार्यक्रम की चमक के बीच जनप्रतिनिधियों के सम्मान पर तीखा सवाल खड़ा कर दिया. पहले सरपंचों को मंच पर जगह मिली और फिर कथित तौर पर उन्हें नीचे बैठने के लिए कह दिया गया. बात सम्मान पर आई तो सरपंच भी अड़ गए. मंच से उतरे और कुर्सी छोड़ सीधे जमीन पर बैठ गए. देखते ही देखते सेवा का मंच विरोध की तस्वीर में बदल गया और घंटों समझाइश का दौर चलता रहा.
लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं हुआ. सिहावा की मौजूदा विधायक अंबिका मरकाम ने भी कार्यक्रम की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा जिला स्तरीय कार्यक्रम होने के बावजूद उन्हें निमंत्रण तक नहीं दिया गया. उन्होंने सरपंचों को मंच से नीचे उतारने की घटना को निंदनीय बताते हुए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान का मुद्दा उठाया.
अब सवाल सिर्फ मंच की एक कुर्सी का नहीं है. सवाल उस लोकतांत्रिक सम्मान का है जो जनता के वोट से चुनकर आए प्रतिनिधि के साथ जुड़ा होता है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि गांव की सरकार चलाने वाले सरपंचों को सम्मान की लड़ाई जमीन पर बैठकर लड़नी पड़ी? और जिला स्तरीय आयोजन में क्षेत्र की मौजूदा विधायक को निमंत्रण नहीं मिलने की बात सामने आ रही है तो प्रोटोकॉल आखिर कहां चूक गया?
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