PM जनमन योजना में बड़ा खेला, बिना कॉलम के खड़े कर दिए आदिवासियों के मकान, ठेकेदार बोला- सब ऐसे ही बना रहे, ओके रिपोर्ट और भुगतान
A big scam was played under the PM Janman Yojana scheme, tribal houses were built without columns, the contractor said – everything should remain as it is, OK report and payment.
सरगुजा : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से विकास कार्यों में बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. यहां विशेष पिछड़ी जनजाति ‘पहाड़ी कोरवाओं’ के लिए बनाए जा रहे प्रधानमंत्री जनमन योजना के घर ताश के पत्तों की तरह कमजोर नजर आ रहे हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि बिना कॉलम और बीम के ही मकानों पर छत ढाल दी गई है. जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है.
1. बिना नींव और कॉलम के ‘हवाई’ मकान
सरगुजा जिले के मैनपाट ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत पिडिया के घोराघाट में इंजीनियरिंग का एक अजीबोगरीब नमूना देखने को मिला है. यहां करीब दो लाख रुपये की लागत से बनने वाले घरों में मजबूती के बुनियादी मानकों को ताक पर रख दिया गया है. पहाड़ी इलाकों में जहां जमीन उबड़-खाबड़ होती है. वहां बिना कॉलम के मकान खड़ा करना सीधे तौर पर जान से खिलवाड़ माना जा रहा है.
2. लागत बचाने के लिए तीन घरों की ‘साझा’ दीवार
ठेकेदारों की मनमानी का आलम यह है कि पैसे बचाने के लिए तीन घरों को एक-दूसरे से सटाकर बना दिया गया है. ठेकेदार शंकर और राजेश यादव ने संतोष कोरवा और सूखल कोरवा के घरों के बीच ढुढीबाई का घर सिर्फ इसलिए बनाया ताकि दो तरफ की दीवारें न बनानी पड़ें. इस ‘जुगाड़’ से ठेकेदार ने अपनी लागत तो बचा ली. लेकिन गरीबों के सिर पर मौत का साया खड़ा कर दिया.
3. ठेकेदार का बेतुका तर्क: “हमें नियम ही नहीं पता”
जब इस घटिया निर्माण और 12 एमएम के बजाय 8 एमएम का पतला सरिया लगाने पर सवाल किया गया तो ठेकेदार राजेश यादव ने चौंकाने वाला बयान दिया. ठेकेदार का कहना है कि “सभी लोग तो 8 एमएम का ही सरिया लगा रहे हैं. हमें किसी अधिकारी ने 12 एमएम लगाने के नियम-कानून नहीं बताए. जैसा सब बना रहे हैं. हम भी वैसा ही बना रहे हैं.” यह बयान प्रशासन की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है.
4. अफसरों की ‘ओके’ रिपोर्ट और भुगतान का खेल
हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर निर्माण कार्य इतना घटिया है. वहीं विभाग के जिम्मेदार इंजीनियरों और ग्राम सचिवों ने कागजों पर ‘सब ठीक है’ लिखकर पूरा भुगतान भी जारी कर दिया है. ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच करने वाला कोई नहीं है.
5. कलेक्टर के निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरे हालात
बताया जा रहा है कि कलेक्टर और अन्य उच्च अधिकारियों ने पूर्व में इन इलाकों का दौरा किया था. इसके बावजूद ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं. पहाड़ी इलाकों में भूकंप या भारी बारिश की हालत में बिना पिलर के ये घर कभी भी ढह सकते हैं. सरगुजा जिले में कुल 2565 घर बनने हैं. जिनमें से 1260 बन चुके हैं. ऐसे में बाकी घरों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं.
जवाबदेही तय होना जरुरी
प्रधानमंत्री जनमन योजना का मकसद आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारना है. न कि उन्हें असुरक्षित घरों में धकेलना. अगर समय रहते इन निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई. तो सरकार का पैसा और आदिवासियों की सुरक्षा, दोनों दांव पर लग जाएंगे.
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