दहेज प्रताड़ना से परेशान नवविवाहिता फांसी के फंदे पर झूली, आरोपी पति गिरफ्तार, सास और ननंद फरार, तलाश में जुटी पुलिस

A newlywed woman, troubled by dowry harassment, hanged herself; her husband arrested, her mother-in-law and sister-in-law absconding; police engaged in the search.

दहेज प्रताड़ना से परेशान नवविवाहिता फांसी के फंदे पर झूली, आरोपी पति गिरफ्तार, सास और ननंद फरार, तलाश में जुटी पुलिस

बिलासपुर : शहर के चकरभाठा थाना क्षेत्र के बोदरी में एक नवविवाहिता की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. 8 सितंबर 2025 को एक महिला ने अपने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. प्रथम दृष्टया यह घटना घरेलू विवाद का मामला मालुम हुआ. लेकिन जांच और परिजनों के बयानों ने इसे दहेज प्रताड़ना से जुड़ा गंभीर अपराध साबित किया.
मिली जानकारी के मुताबिक मृतिका के परिजनों- पिता, माता और भाई ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि मृतिका को उसके पति शाहिद कुरैशी, सास नशीबा कुरैशी और ननद अनाया कुरैशी द्वारा दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था. परिजनों का आरोप है कि मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के चलते मृतिका गहरे अवसाद में थी और मजबूर होकर उसने खुदकुशी जैसा कदम उठा लिया.
मृतिका का पोस्टमार्टम कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराया गया. 23 सितंबर 2025 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद साफ हुआ कि यह खुदकुशी दहेज प्रताड़ना से जुड़ी हुई है. इसके आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु) के तहत जुर्म दर्ज किया.
मुख्य आरोपी और मृतिका का पति शाहिद कुरैशी उम्र 35 साल निवासी वार्ड नम्बर 7, वाशुमंगलम के पीछे, चकरभाठा, बिलासपुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है. वहीं बाकी आरोपी नशीबा कुरैशी और अनाया कुरैशी की तलाश जारी है. पुलिस का कहना है कि दोनों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
भारत में दहेज प्रताड़ना के मामलों पर रोक लगाने के लिए कानून मौजूद है. बीएनएस की धारा 80(2) (जो पूर्व में भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी से मेल खाती है) के तहत अगर शादी के सात साल के भीतर महिला की असामान्य या संदिग्ध मौत होती है और यह पाया जाता है कि उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था. तो इसे दहेज मृत्यु माना जाता है. ऐसे मामलों में पति या उसके परिजन दोषी पाए जाने पर कठोर सजा का प्रावधान है.
कानून होने के बावजूद देश भर में दहेज प्रताड़ना और उससे जुड़ी मौतों के मामले लगातार सामने आते रहते हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल हजारों महिलाएं दहेज की मांग पूरी न कर पाने के कारण प्रताड़ना झेलती हैं और इनमें से बड़ी तादाद खुदकुशी या संदिग्ध मौत के मामलों की होती है.
सामाजिक जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कानून बनाना पर्याप्त नहीं है. बल्कि समाज को भी मानसिकता बदलनी होगी. दहेज की प्रथा न सिर्फ महिलाओं के अधिकारों का हनन करती है बल्कि परिवारों को भी आर्थिक और मानसिक संकट में डालती है. जागरूकता, शिक्षा और कड़ी सामाजिक निंदा से ही इस कुरीति को खत्म किया जा सकता है.
पुलिस की अपील
इस मामले में पुलिस ने अपील किया कि अगर किसी महिला को दहेज प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है तो वह समय रहते इसकी शिकायत दर्ज कराए. पुलिस और प्रशासन ऐसे मामलों में पीड़िताओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है.
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