मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में पहले से विवाहित जोड़े ने लिया स्कीम का लाभ, सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न, जांच की मांग तेज

Already married couples availed of the Chief Minister's Mass Marriage Scheme, raising serious questions about the verification process, and demands for an investigation intensified.

मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में पहले से विवाहित जोड़े ने लिया स्कीम का लाभ, सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न, जांच की मांग तेज

कांकेर : कांकेर जिले के गोविंदपुर में 10 फरवरी को आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के अंतर्गत एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इस कार्यक्रम में शामिल एक जोड़े द्वारा पहले से विवाहित होने के बावजूद दोबारा विवाह कर शासन की योजना का लाभ लेने की बात उजागर हुई है. इस घटना ने न सिर्फ संबंधित जोड़े के कथित फर्जीवाड़े को सामने ला दिया है, बल्कि योजना की सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पीव्ही 34 निवासी सुदीप विश्वास और ग्राम पीव्ही 64 निवासी स्वर्णा मिस्त्री ने 10 फरवरी को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में विधिवत भाग लिया. जबकि दोनों करीब आठ महिना पहले 3 जून 2025 को सामाजिक रीति-रिवाज से शादी कर चुके थे. शादी के बाद से युवती अपने पति के घर में ही रह रही थी. इसके बावजूद इस जोड़े का पंजीयन मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत कर लिया गया और उन्हें कार्यक्रम में शामिल भी कर लिया गया.
बताया जा रहा है कि पखांजूर परियोजना क्षेत्र से इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कुल 30 जोड़े भेजे गए थे. जिनमें यह जोड़ा भी शामिल था. इस जोड़े का पंजीयन सेक्टर हरणगढ़ से किया गया. आवेदन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जानवी साहा द्वारा किया जाना बताया जा रहा है. जबकि वधू पक्ष संगम सेक्टर अंतर्गत ग्राम पीव्ही 64 का निवासी है. नियमानुसार आवेदन वधू पक्ष के क्षेत्र की आंगनबाड़ी से किया जाना चाहिए और सत्यापन संबंधित सेक्टर की पर्यवेक्षिका द्वारा किया जाना जरुरी होता है. लेकिन इस मामले में नियमों की अनदेखी स्पष्ट रुप से दिखाई दे रही है.
योजना के प्रावधानों के मुताबिक मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में वधू पक्ष को आवेदन करना होता है. आवेदन के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सेक्टर पर्यवेक्षिका द्वारा पात्रता की जांच की जाती है. इसके साथ ही पंचायत से अविवाहित होने का प्रमाण पत्र अनिवार्य रुप से लिया जाता है. योजना के तहत कुल 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है. जिसमें 15 हजार रुपये आयोजन और व्यवस्था व्यय के लिए निर्धारित होते हैं और बाकी 35 हजार रुपये वधू के संयुक्त बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं.
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब फेसबुक पर ड्रीम गर्ल नामक आईडी से सामाजिक विवाह और सामूहिक विवाह की तस्वीरें एक साथ साझा की गईं. तस्वीरों के वायरल होते ही लोगों ने दोनों विवाहों की तारीखों और परिस्थितियों की तुलना की, जिसके बाद मामला चर्चा में आया. वायरल तस्वीरों में वधू के हाथों में शाखा स्पष्ट रुप से दिखाई दे रही है. जो बंगाली परंपरा के मुताबिक शादी के बाद ही पहनी जाती है. इससे यह शक और गहरा गया कि जोड़ा पहले से विवाहित था.
संगम सेक्टर की पर्यवेक्षिका उमेश्वरी बघेल ने इस बारे में साफ किया कि उनके द्वारा उक्त जोड़े का कोई सत्यापन नहीं किया गया है और यह जोड़ा अन्य सेक्टर से पंजीकृत हुआ है. उनके इस बयान के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर किस स्तर पर जांच में लापरवाही हुई और किस आधार पर अविवाहित होने का प्रमाण पत्र जारी किया गया.
घटना सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग उठने लगी है. लोगों का कहना है कि अगर योजना के पात्रता मापदंडों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया तो इससे वास्तव में जरूरतमंद परिवारों का हक मारा जाएगा. साथ ही यह भी जरुरी है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए.
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