भाजपा ने भारी विवाद के बाद हटाया वीडियो, FIR दर्ज, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, सरमा को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का हक नहीं, सजा की मांग
BJP removes video after massive controversy, FIR filed, case reaches Supreme Court, claims Sarma has no right to continue as Chief Minister, demands punishment
8 फरवरी 2026 को असम बीजेपी X हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया. जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा मुसलमानों को गोली मारते दिख रहे हैं. वीडियो पर बढ़ते विरोध और हिंसा भड़काने के आरोपों के बाद अब वीडियो डिलीट कर दिया गया है. CM हिमंत खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. हैदराबाद के सांसद और AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है.
कांग्रेस का कहना है कि वीडियो हटाना पर्याप्त नहीं है. केरल से कांग्रेस सांसद और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बीजेपी के वीडियो को नरसंहार की खुली अपील करने वाला बताया है. और कहा है कि उसे ट्रोल कंटेंट बोलकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. केसी वेणुगोपाल ने न्यायपालिका से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है. कांग्रेस नेता का आरोप है, इस तरह का संदेश ऊपर से फैलाए जा रहे जहर को दर्शा रहा है.
तृणमूल कांग्रेस की असम इकाई ने बीजेपी के वीडियो को 'नफरत का प्रदर्शन' बताया है, और आरोप लगाया है कि ये सब नफरत को न्यू नॉर्मल बनाने का प्रयास है. टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बीजेपी के वीडियो को आपराधिक कृत्य और हिंसा के लिए साफ उकसावा बताया है. और कड़ी सजा की मांग की है.
हिमंत ने राजीव गांधी और राहुल गांधी को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी. इस बयान के बाद हिमंत के ख़िलाफ़ कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया था. कई जगह उन पर आपराधिक मामले दर्ज करने की बात भी सामने आई थी.
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने X पर लिखा कि बीजेपी असम प्रदेश के X हैंडल ने वीडियो डिलीट कर दिया। लेकिन यह इतनी देर तक था कि कई लोगों ने इसे डाउनलोड कर आगे फैला दिया। बेशर्मी से, EC नफरत और राजनीतिक टारगेट करने के इस सबसे घटिया रुप को नजरअंदाज करेगा.
वरिष्ठ पत्रकार समीर पुरकायस्थ कहते हैं कि हिमंत की शुरु से एक राजनीतिक शैली रही है. वो इस तरह के विवादित बयान देकर पार्टी आलाकमान को खुश करने का प्रयास करते रहे हैं. 2014 में उन्होंने नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ भी ऐसा विवादित बयान दिया था. जिससे बीजेपी के कई शीर्ष केंद्रीय नेता ख़फ़ा हो गए थे,
यह उम्मीद करना तो बेकार ही है कि भाजपा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा पर उनके विवादास्पद विडियो को लेकर कोई कार्रवाई करेगी. जिसमें वह मुस्लिम समुदाय के लोगों के चित्रों पर फायरिंग करते नजर आए थे. भले ही असम भाजपा ने भारी विवाद के बीच अपने एक्स हैंडल से ये वीडियो हटा लिया है. लेकिन यह विडियो एक्स सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अब भी उपलब्ध है.
दरअसल सवाल देश के संविधान के प्रति जवाबदेह असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और केंद्र की मोदी सरकार से है कि क्या यह वीडियो उनके संज्ञान में नहीं आया. जिसमें मुख्यमंत्री सरमा संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों के चित्रों पर राइफल से गोलियां दागते नजर आते हैं?
‘पाइंट ब्लैंक शूट’ के नाम से जारी किए गए इस वीडियो के पीछे की मंशा को लेकर किसी को शक नहीं होना चाहिए. यह उस राजनीतिक कथानक का ही हिस्सा है. जिसके जरिये भाजपा और खासतौर से हिमंता बिस्व सरमा असम में कथित रुप से मुस्लिम बांग्ला घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना चाहते हैं.
ज्यादा दिन नहीं हुए जब सरमा ने मियां मुस्लिम रिक्शावालों के खिलाफ विवादास्पद बयान देकर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को धूमिल किया था.
असम में जब एनआरसी की कवायद सात साल पहले ही पूरी कर ली गई है और इसी वजह से चुनाव आयोग ने वहां मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) भी नहीं करवाया है. तो फिर हिमंता बिस्व सरमा किस आधार पर मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं?
यह बात तो भाजपा और उसकी आईटी सेल भी जानती होगी कि सोशल मीडिया के इस दौर में किसी एक हैंडल से कोई वीडियो भले हटा लिया जाए. लेकिन उसके असीमित प्रसार को रोकना लगभग असंभव है.
सच बात तो यह है कि मियां मुस्लिमों या कथित घुसपैठियों के नाम पर दिए जाने वाले भड़काऊ और धमकाने वाले बयानों और वीडियो जारी करने के बाद हिमंता बिस्व सरमा को एक भी पल मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का हक नहीं है. उनकी हरकतें भारतीय लोकतंत्र और उसके संविधान का खुलेआम अपमान है.
अक्टूबर, 2025 में भी असम बीजेपी ने ऐसे ही एक वीडियो शेयर किया था. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था. और, उसे भी डिलीट किया गया था. सवाल है कि क्या चुनाव आयोग को भी ये सब दिखाई दे रहा है? ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में दखल देने की मांग की है - सवाल है कि इतना कुछ होने के बावजूद क्या चुनाव आयोग को नहीं लगता कि ये मामले संज्ञान लेने लायक है?
वीडियो को लेकर असम बीजेपी के प्रवक्ता रंजीब कुमार सरमा का कहना है कि इसमें कहने को कुछ नहीं है, क्योंकि पोस्ट हटा दी गई है.
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