भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का जमकर विरोध, छत्तीसगढ़ किसान यूनियन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, समझौता निरस्त करने की मांग

Chhattisgarh Farmers Union submits memorandum to Collector, demanding cancellation of India-US bilateral trade agreement

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते का जमकर विरोध, छत्तीसगढ़ किसान यूनियन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, समझौता निरस्त करने की मांग

धमतरी : भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के विरोध में छत्तीसगढ़ किसान यूनियन जिला धमतरी (गैर राजनीतिक संगठन) ने सोमवार को कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के जरिए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा. किसानों ने इस समझौते पर दस्तखत न करने और इसे फौरन रोकने की मांग की.
ज्ञापन में किसानों ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते से देश के किसानों और भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर हालात पैदा हो सकते हैं. किसानों का आरोप है कि यह समझौता भारत की आत्मनिर्भरता और संप्रभुता के लिए खतरा साबित हो सकता है. किसान यूनियन ने कहा कि अंतरिम समझौते में जिन शर्तों की चर्चा सामने आई है. वे भारतीय किसानों के हित में नहीं हैं. पत्र में उल्लेख किया गया कि भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 30 से 150% तक लगने वाले शुल्क को शून्य करने पर सहमति जताई है. जबकि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगभग 18% शुल्क लगाने की बात कर रहा है, जो पहले के औसत से कई गुना ज्यादा है. इसे 50% राहत बताना किसानों के मुताबिक चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है.
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी और आधुनिक तकनीक का फायदा मिलता है. वहां करीब 18.65 लाख किसान हैं, जबकि भारत में किसान परिवारों की तादाद करीब 11.10 करोड़ है. अमेरिका में प्रति किसान औसतन करीब 21 लाख 56 हजार रुपये के बराबर सब्सिडी मिलती है. जिससे वे कम लागत में उत्पादन कर पाते हैं. इसके विपरीत भारत के किसानों को सीमित सहायता ही मिलती है. किसानों ने आशंका जताई कि अगर विदेशी कृषि उत्पादों का शुल्क मुक्त आयात हुआ तो डेयरी, फल-सब्जी, कपास, गन्ना, मक्का, धान और गेहूं जैसे फसलों के उत्पादक किसानों पर गंभीर असर पड़ेगा और फसलों के दाम गिरने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. किसान यूनियन ने मांग किया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को किसान हित में नहीं मानते हुए इसे फौरन रद्द किया जाए.
इस दौरान छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष घनाराम साहू, दीनदयाल, देवनारायण साहू, महावीर साहू, नारायन, रामविशाल, रामनिहोरा निषाद, सुदर्शन ठाकुर, महिपाल साहू, भुवन सिन्हा सहित अन्य किसान मौजूद रहे.
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