अधिकारियों ने बिना छत वाले घर में ही करवा दिया ‘गृह प्रवेश’, जांच में खुली पीएम आवास योजना की पोल, जमकर गड़बड़ी के लगे आरोप

Officials conducted a 'griha pravesh' ceremony in a house without a roof; an investigation exposed the PM Awas Yojana, and widespread irregularities were suspected.

अधिकारियों ने बिना छत वाले घर में ही करवा दिया ‘गृह प्रवेश’, जांच में खुली पीएम आवास योजना की पोल, जमकर गड़बड़ी के लगे आरोप

गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां पीएम आवास योजना के तहत मंजूर किए गए निर्माणाधीन आवासों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. मामले में पीएम आवास योजना के तहत अधूरे आवासों को कागजों में पूरा दिखाकर अफसरों ने उनका सामूहिक गृह प्रवेश करवा दिया. हैरानी की बात है कि जिन हितग्राहियों के आवासों की छत तक नहीं बनी थी. उनके नाम भी गृह प्रवेश की लिस्ट में शामिल कर उन्हें कार्यक्रम में शामिल किया गया.
इस मामले में पीएम आवास योजना के तहत मंजूर, निर्माणाधीन आवास कागजों में ये पूरा बताए गए हैं. शासन को आवास योजना में प्रगति चाहिए थी. लिहाजा अफसरों ने 30 फीसदी अधूरे आवास को भी पूरा बता दिया जो अभी निर्माणाधीन है. इन अफसरों की करतूत यही नहीं थमीं। इन लोगों ने हद पार करते हुए अधूरे आवासों का गृह प्रवेश तक करवा दिया.
मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हाथ मैनपुर जनपद में सामूहिक गृह प्रवेश करने वाले 3817 लोगों के नाम की लिस्ट हाथ लगी. इसकी पड़ताल करने के बाद उन्होंने दावा किया कि इनमें से एक तिहाई से ज्यादा आवास अभी भी अधूरे हैं. 
इससे एक महीने पहले भी अधूरे आवास को पूरा बताने के खेल का भंडा फूटा था. तब देवभोग से लेकर छूरा ब्लॉक तक के आधा दर्जन आवास मित्र, देवभोग के तत्कालीन जनपद सीईओ से लेकर जिला पंचायत सीईओ तक हटा दिए गए. ताकि इस महत्वाकांक्षी योजना का बेहतर क्रियान्वयन हो.
मैनपुर जनपद सभापति परमेश्वर जैन ने बताया कि वे अपने निर्वाचित क्षेत्र के सरईपानी पंचायत के हितग्राही गोवर्धन नागेश, कन्हल राम, गजेंद्र का आवास देखा. उसरी जोर में दुर्गा टांडिया का आवास देखा. वही गुढियारी में सुखचंद का आवास अधूरा है. जैन ने बताया कि सामूहिक गृह प्रवेश की लिस्ट में शामिल 40 से ज्यादा आवास में आधा अधुरा था. मनरेगा से मिलने वाले मजदूरी राशि भी दूसरे के नाम आहरण हो गई. हितग्राहियों का काम रुका हुआ है. जैन ने दावा किया है कि मैनपुर जनपद के सामूहिक आवास प्रवेश की लिस्ट में शामिल 3700 नाम में से 1 हजार से ज्यादा आवास में छत की ढलाई तक नहीं हुई है. आरोप है आंकड़े बढ़ाने और वाहवाही लूटने शीर्ष के अफसरों ने भी इस गड़बड़ी को अनदेखी कर पीएम के हाथों प्रवेश कराया.
अफसर बदले गए गांव-गांव मॉनिटरिंग होती रही. कई गांवों में लोग महीनों से शिकायत कर आवास योजना में गड़बड़ी उजागर कर जांच की मांग उठाते रहे. लेकिन जिले में आवास निर्माण की प्रगति दिखाने के धुन में सवार अफसरों ने सारी गड़बड़ियां नजर अंदाज करते रहे.
ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर सचिव तक अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आए और इस पर बोलने से परहेज किया. जनपद के अफसर गांव-गांव घूमकर सिर्फ निर्माण का लक्ष्य पूरा करने की हिदायत देते रहे. शिकायतें संज्ञान में होने के बावजूद मौके पर जाकर रिकॉर्ड का मिलान तक नहीं किया. अब सवाल पूछने पर वे रिकॉर्ड के आधार पर भौतिक सत्यापन की बात कह रहे हैं.
श्वेता वर्मा,सीईओ जनपद पंचायत मैनपुर_ जिन आवासों की स्लैब ढलाई हुए, फ्लोरिंग प्लास्टर हो गए थे. ऐसे को रिपोर्ट बनाते समय पूर्ण मान लिए थे.अगर स्लैब ढलाई नहीं हुई उसे भी पूर्ण बताया गया है तो जांच कराएंगे. समय समय पर मिली शिकायत की जांच कराई गई है. धनोरा में मनरेगा मजदूरी गड़बड़ी के मामले की भी जांच हुई थी.
प्रखर चंद्राकर,सीईओ जिला पंचायत गरियाबंद_
अधूरे आवास को अगर पूर्ण कही बताया गया है तो जांच कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी. आप मुझे जानकारी भेजिए कहा कहा ऐसा हुआ है. मैं जांच कर कार्यवाही कराता हूं. धनोरा मे मनरेगा मजदूरी के मामले में राशि वसूली के निर्देश दिए गए हैं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t

कलेक्टर के निर्देश पर जिला स्तरीय टीम ने छह ग्राम पंचायतों में स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की. निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत सरईपानी में हितग्राही गोर्वधन नागेश, कन्हल राम और गजिन के आवासों को पूर्ण पाया गया. उसरीजोर में दुर्गासिंह का आवास अभी लिंटल स्तर पर पाया गया. जिसका जियोटैग प्लिंथ स्तर पर किया गया था और निर्माणाधीन होने के कारण वहां गृह प्रवेश नहीं कराया गया था.
ग्राम पंचायत गोढियारी में सुखचंद का आवास पूरी तरह पूर्ण मिला. वहीं धनोरा में प्रधानसिंह का आवास लिंटल स्तर पर पाया गया. जबकि उनके आवास का जियोटैग पूर्ण स्थिति में किया गया था.
इसी तरह हितग्राही दुर्जन का आवास छत स्तर पर मिला. लेकिन जियोटैग उनकी बहू के पूर्ण आवास का किया गया था. इस ग्राम पंचायत में पूर्व शिकायतों की जांच के बाद दोषी रोजगार सहायक से वसूली की कार्रवाई की जा चुकी है. और रोजगार सहायक एवं आवास मित्र दोनों ने त्यागपत्र दे दिया है. मुडगेलमाल में भंवर का आवास पूर्ण स्थिति में मिला. जबकि अमलीपदर पंचायत में हितग्राहियों धनमती और निरोबाई के आवास भी पूर्ण पाए गए.
कलेक्टर उईके ने बताया है कि सभी स्थलों पर किए गए भौतिक निरीक्षण तथा आवास सॉफ्टवेयर में उपलब्ध जियोटैग के मिलान से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी अपूर्ण आवास में गृह प्रवेश नहीं कराया गया है और सभी जियोटैग नियमानुसार ही किए गए हैं.