राजिम कुंभ कल्प का आज होगा समापन, CM से होंगे शामिल, महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी, निकलेगी भव्य शाही शोभायात्रा

Rajim Kumbh Kalp will end today, CM will attend, devotees will take a dip of faith on Mahashivratri, grand royal procession will take place

राजिम कुंभ कल्प का आज होगा समापन, CM से होंगे शामिल, महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी, निकलेगी भव्य शाही शोभायात्रा
राजिम कुंभ कल्प मेला के संत समागम परिसर में स्वामी सच्चिदानंद श्री चक्र महामेरू पीठम दंडी स्वामी के पंडाल में सोमवार को साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। जिसमें अंचल के कवि एवं साहित्यकारों के साथ ही स्वामी श्री विश्वानंद तीर्थ महाराज जी प्रमुख रूप से उपस्थित थे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत देश की संस्कृति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। वेदों को श्रुति कहा जाता है। श्रुति का मतलब श्रवण करना होता है। किसी समय पर सभी शास्त्र यहां तक की वेद, पुराण, उपनिषद को श्रुति इसलिए कहते थे क्योंकि गुरु के द्वारा श्रवण किया जाता था और कंठस्थ करके उसको आगे प्रचलन में लाते थे। एक दूसरे से ऐसा क्रम चलता था परंतु अब वह समय नहीं रह गया है। पुस्तकों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी यह जान पाती है कि ज्ञान कैसे अर्जित करना है। ज्ञान क्या है। साहित्यकार एवं विद्वतजन कविताओं के माध्यम से रचना करके हमारे संस्कृति एवं शास्त्रों के बारे में बताते हैं। जिसके माध्यम से आने वाली पीढ़ी जान पा रही हैं।
ब्रम्हदत्त शास्त्री ने संत कवि पवन दीवान को याद कर कविताएं पढ़ी
कार्यक्रम में उपस्थित पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने संत कवि पवन दीवान को याद करते हुए उन्हें प्रणाम किया। उन्होंने भगवान श्री राजीव लोचन तुम्हें प्रणाम, हमारे संकट मोचन तुम्हें प्रणाम की पंक्ति सुनाई। कवि डॉ. मुन्नालाल देवदास ने प्रभु राम को याद करते हुए शानदार पंक्ति पढ़ी। कहा कि राजा बनने से पहले बनवासी बन गए राम, चौदह वर्ष पैदल चलकर किए अनूठे काम, हे कौशल्या के राम, तुम्हें कोटि-कोटि प्रणाम।
मां सरस्वती का रूप लेकर नन्हीं बिटिया प्यार फैलाती हैं - संतोष सोनकर
कवि संतोष कुमार सोनकर मंडल ने बेटियों पर शानदार रचना पढ़ी और अलग-अलग रूपों का वर्णन किया। जिसमें जन्म देती जब वह बुढ़ी माई कहलाती है, बहन बना प्रेम लुटाती, राखी बांध संतोषी हो जाती है, पत्नी के रूप में सेवा करती जब वह, देवी लक्ष्मी सा मान पाती है, मां सरस्वती का रूप लेकर नन्हीं बिटिया प्यार फैलती है। कवि मकसूदन साहू बरीवाला ने राजिम संगम की महिमा का गुणगान किया। सुश्री सरोज कंसारी ने नारी शक्ति को जागृत करते हुए कहा कि नारी तुम अदम्य शक्तिमान हो, सृष्टि की सुंदर सी रचना हो, जीवन की छंद व अलंकार हो, हे जग जननी तुम्हारी सदा विजय हो। कवि नूतन लाल साहू, डॉ रमेश सोनसायटी, जोइधाराम तारक ने शानदार रचना पर खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का सुंदर काव्यात्मक संचालन करते हुए राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक किशोर निर्मलकर ने अपनी सुंदर गीत हरिहर लुगरा दाई पहिरी सुग्घर एकर कोरा...ऐला कही थे धान के कटोरा.. पढकर सभी का मन मोह लिया। आभार प्रकट कवयित्री डॉ. केंवरा यदु ने किया।
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राजिम कुंभ कल्प के सांस्कृतिक मंच पर कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति
राजिम कुंभ कल्प के सांस्कृतिक मंच पर रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई। गरियाबंद जिले की लोक कलामंच हमर धरोहर के कलाकारों द्वारा छत्तीसगढ़ के लोकगीतों का भावपूर्ण प्रदर्शन और लोकनृत्य की प्रस्तुति देखकर दर्शक झूम उठे। हमर धरोहर लोक मंच के गायक मनेश्वर एवं उनके साथी कलाकारों की प्रस्तुति देखकर दर्शकों ने तालियों की बौछार कर दी। हिमानी वासनिक ने भरतरी में कई प्रसंगो का भावपूर्ण प्रदर्शन की। जिसे दर्शको ने काफी सराहना की। नरेश कुमार समुन्द्र द्वारा मानस की चौपाईयों पर व्याख्यान सुनाकर पूरे मंच को श्रद्धा और भक्ति से लबालब कर दिया। लीला बाई ने अपने साथी कलाकारों के साथ सुआ नृत्य की प्रस्तुति दी। सेवकराम यादव एवं उनके सहयोगी कलाकारों द्वारा लोकमंच की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। खेमकुमार सेन ने मानस गायन की प्रस्तुति दी।
रेखा जलक्षत्री ने भी राजा भरथरी प्रेम गाथा को अपनी पुरानी चिर-परिचित आवाज में प्रस्तुति किया। जिसे सुनकर दर्शक भी मंत्रमुग्ध हो गए। नोहर निषाद जगराता में मां शेरावाली के भजनों की प्रस्तुति देकर भक्तिमय माहौल बना दिया। श्रवण कुमार निषाद ने लोक कलामंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ का लोक संस्कृति की प्रस्तुति दी। राउत नाचा के कलाकारों ने पारंपरिक वेष-भूषा धारण कर हाथों मे डंडा लेकर दोहा बोलते हुए मनमोहक प्रस्तुति दी। योगेंन्द्र दास मानिकपुरी ने लोककला के द्वारा अपनी प्रस्तुति दी। जिसमे गणेश वंदना के पश्चात् छत्तीसगढ़ी गीतों का बौछार किया, जिसमें दर्शक भी खूब आनंद लेते हुए दिखाई दिए। कलाकारों का सम्मान आयोजक समिति ने गुलदस्ता और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
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12 फरवरी से प्रारंभ हुए राजिम कुंभ कल्प मेला अब समापन की ओर अग्रसर है। कुंभ कल्प के 13वें दिन मुख्य मंच पर प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा ने श्याम, शिव और  माता के भजनों से ऐसा समां बांधा कि श्याम जी और हर-हर महादेव के जयकारों से सारा वातावरण गुंजायमान हो उठा। उन्होंने अपने पसंदीदा माता के भजन प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी... की प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय कर दिया और पंडाल में बैठे दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक सुपरहिट भजन गाए जिन पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। प्यारा सजा है, तेरा द्वार भवानी..., लक्खा को मां तेरा सहारा..., भोला शिव हर-हर भोला..., राम जी से कह देना जय सिया राम..., बांके बिहारी लाल गोपाल..., मन रखियो चरण में..., अरे द्वार पालो..., श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में..., मुझे काल से डर नही लगता, महाकाल मेरे रखवाले है..., जैसे भजनों को सुनकर दर्शक भी गदगद हो गए। गरियाबंद कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने भी कार्यक्रम का आनंद लिया।
मुख्य मंच पर सांस्कृतिक की छटा बिखेरने 11 साल की बालिका राधिका शर्मा ने शिव की शक्ति एवं भक्ति पर आधारित शानदार कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसे देकर दर्शक भी अचंभित रह गए। इसी मंच पर 10 साल की बालिका भूमि सूता का ओड़िसा नृत्य की प्रस्तुति देकर ओडिसा की संस्कृति एवं वेश-भूषा का परिचय कराया। मंच पर कृष्ण कुमार पाटिल ने सुगम संगीत की प्रस्तुति दी। जिसमें संत पवन दीवान के रचित रचना कण-कण में आतुर होता है.... जिनका लेकर पावन नाम.... इस गीत को सुनकर दर्शकों ने तालियों के साथ संत पवन दीवान को स्मरण किया। कृष्ण कुमार ने बासी, चटनी खावईया छत्तीसगढ़ियॉ आवन गा.... गीत की शानदार प्रस्तुति दी। लोक कलामंच के आस्था भट्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य की राजगीत अरपा पैरी के धार, महानदी है अपार..., संगी रे झूलना झूलाबे आमा के डार मा..., कोसा के साडी...,  जैसे छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को बांधे रखा। कलाकारों का सम्मान प्रतीक चिन्ह और राजकीय गमछे से किया गया।
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माघ पूर्णिमा 12 फरवरी से प्रारंभ हुए राजिम कुंभ कल्प मेला का समापन आज 26 फरवरी महाशिवरात्रि के अवसर पर होगा. समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय शामिल होंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कृषि विकास एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री राम विचार नेताम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल, वन एवं जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंकराम वर्मा शामिल होंगे।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, कुरूद विधायक श्री अजय चंद्राकर, अभनपुर विधायक श्री इंद्रकुमार साहू, राजिम विधायक श्री रोहित साहू, बिन्द्रानवागढ़ विधायक श्री जनक धु्रव, सिहावा विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम, नगर पंचायत राजिम अध्यक्ष श्री महेश यादव, नगर पंचायत देवभोग अध्यक्ष राजेश कुमार तिवारी, नगर पंचायत छुरा अध्यक्ष श्रीमती लुकेश्वरी निषाद, नगर पंचायत कोपरा अध्यक्ष श्री रूपनारायण साहू, नगर पालिका परिष गोबरा नवापारा अध्यक्ष श्रीमती ओमकुमारी संजय साहू, नगर पंचायत फिंगेश्वर अध्यक्ष श्री राजेंद्र (धनराज) सूर्यवंशी, नगर पंचायत मगरलोड अध्यक्ष श्रीमती लीलेश सुरेश साहू, नगर पालिका परिषद गरियाबंद अध्यक्ष श्री रिखीराम साहू उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद गिरी, महामंडलेश्वर साध्वी पुष्पांजलि पुरी जी, महामंडलेश्वर दीनबंधु दास जी, राजेश्री महंत राम सुंदरदास जी महाराज, दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद जी महाराज, दंडी स्वामी श्री सच्चिदानंद तीर्थ जी महाराज, श्री द्वारकेश जी महाराज, महंत नरेंद्र दास जी महाराज, स्वामी राजीव लोचनदास जी महाराज, बाल योगेश्वर बालयोगी रामबालक दास जी महाराज, साध्वी महंत प्रज्ञा भारती जी, स्वामी गंगादास उदासीन जी महाराज, साध्वी अरुणा भारती जी, स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद अक्रिय जी महाराज, संत परमात्मानंद जी महाराज, संत युधिष्ठिर लाल जी महाराज, संत गोवर्धन शरण जी महाराज, महंत रामरूप दास जी महात्यागी, महंत दिव्य कांत जी महाराज, महंत त्रिवेणी दास जी महाराज, महंत श्री राधेश्याम दास जी महाराज, महंत उमेशानन्द गिरि जी महाराज, आचार्य राकेश आर्य जी महाराज, गुरु माँ सुमीरण माई जी, संत कौशलेंद्र रामजी महाराज, संत विचार साहेब जी महाराज, महंत रविकर साहेब जी, नारायण भाई प्रजापिता ब्रह्मकुमार, पुष्पा बहन प्रजापिता ब्रह्मकुमारी, हेमा बहन ब्रह्मकुमारी, स्वामी अखिलेशानंद जी, संत पुरषोत्तम आचार्य, संत गोपाल आचार्य, बाल योगिनी जयश्री माता, संत श्री सिद्धेश्वरा नंद जी महाराज, आचार्य त्रिभुवन मिश्रा, महंत अनुसुइया दास जी समेत साधु-संतों की गरिमामय उपस्थिति रहेगी।
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12 फरवरी से प्रारंभ हुए दुनियाभर में ख्याति प्राप्त देश के पांचवें कुंभ के नाम से प्रसिद्ध राजिम कुंभ कल्प मेला का समापन आज 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होगा। इस अवसर पर सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुण्य स्नान करके अपने आप को धन्य करेंगे। समापन अवसर पर देशभर से पहुंचे साधु-संत एवं विभिन्न अखाड़ों के नागा साधुओं की उपस्थिति में विशाल शोभायात्रा शाही स्नान के लिए निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा सुबह 6.30 बजे संत समागम परिसर से निकलेगी, जो नवापारा शहर और राजिम शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कुंभ मेला क्षेत्र में बने शाही कुंड में पहुंचकर शाही स्नान करेंगे।
महाशिवरात्रि के एक दिन पहले ही राजिम कुंभ कल्प में श्रद्धालु की भारी भीड़ देखी गई। 25 फरवरी को दोपहर बाद लोगों की भीड़ बढ़ती गई, जो रात होते होते अधिक हो गई। पर्व स्नान करने दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालु एक दिन पहले ही राजिम नगरी में पहुंच जाते हैं। रात्रि कार्यक्रम देखकर तड़के सुबह स्नान पश्चात त्रिवेणी संगम में दीपदान कर भगवान श्री कुलेश्वरनाथ महादेव और भगवान श्री राजीव लोचन मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
प्रसिद्ध बॉलीवुड पार्श्व गायक सुरेश वाडकर की होगी प्रस्तुति
राजिम कुंभ कल्प के समापन अवसर पर मुख्य मंच पर प्रतिदिन अंतर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कुंभ कल्प के समापन अवसर पर बॉलीवुड पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर के सुमधुर गीत सुनने मिलेगा। मुख्य सांस्कृतिक मंच पर रात्रि 9 बजे के बाद श्री वाडेकर जी की प्रस्तुति होगी।
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राजिम कुंभ कल्प मेले की सुरक्षा को लेकर पुलिस की तगड़ी व्यवस्था की गई है। मेला क्षेत्र से लगे तीन जिलो क्रमशः गरियाबंद, धमतरी और रायपुर की सीमा पर पुलिस कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है जहाँ पर पुलिस के जवानों सहित अर्द्धसैनिक बल, होमगार्ड के जवान तैनात है। इन कंट्रोल रूम के नियंत्रण के लिए मेला क्षेत्र में मुख्य मंच के पास एक पुलिस कंट्रोल रूम बनाया गया है जिसमें पुलिस के आला अधिकारी-एसपी, एएसपी, सहित अन्य पुलिस अधिकारी सम्पूर्ण मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुए है।
1000 पुलिस जवान और 250 सीसीटीवी कैमरों से हो रही निगरानी
गरियाबंद जिले के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सुश्री निशा सिन्हा ने बताया कि राजिम मेला की सुरक्षा के मद्देनजर लगभग 1000 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात है जिसमें जिला बल, एसडीआरएफ, होमगार्ड, पेट्रोलिंग टीम सुरक्षा व्यवस्था पर तैनात हैं। आपराधिक घटना को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाये गए हैं जिसे कंट्रोल रूम में बैठकर पूरे मेला परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि 250 सीसीटीवी कैमरे की सहायता से पूरे मेला परिसर सहित लगभग 5 कि.मी. के सराउंडिंग एरिया में सुरक्षा व्यवस्था की गई है। मेला स्थल की ओर आने जाने वाले सभी रास्तों के चौक-चौराहों पर कैमरे से निगरानी की जा रही है।
सादी वर्दी में पुलिस बल तैनात
अनुविभागीय अधिकारी पुलिस गरियाबंद सुश्री निशा सिन्हा, निरीक्षक अमृत लाल साहू साथ ही 02 चार पहिया व 03 बाईक पेट्रोलिंग, अग्निशमन विभाग द्वारा फायर ब्रिगेड गाड़ियां भी मुस्तैदी के साथ चौबीसों घंटे किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए खड़ी है। मीना बाजार, मेला परिसर सहित मंदिरों में सादी वर्दी में बल तैनात किए गए हैं, जो हर प्रकार के अपराधी और अपराधिक घटनाओं जैसे चौन स्नेचिंग से निपटने के लिए तैयार है।
सुव्यवस्थित यातायात के लिए पुलिस तैनात
इसी तरह यातायात की व्यवस्था को सुचारू रूप से व्यवस्थित करने के लिए आवागमन के दबाव वाले क्षेत्र में यातायात पुलिस की तैनाती की गई है। 17 पार्किंग पॉइंट बनाये गये है। जहाँ मेला स्थल पर आने वाले श्रद्धालु दर्शनार्थी अपने वाहनों को रख सकते है। यातायात जाम होने की स्थिति से निपटने के लिए भी विभाग द्वारा पर्याप्त व्यवस्था की गई है। जिसमे जिला बल, एसडीआरएफ, होमगार्ड पेट्रोलिंग सुरक्षा व्यवस्था पर तैनात हैं। जो व्यवस्था बनाये रखने मे शिफ्ट वाइस राउंड द क्लाक ड्यूटी दे रहे है। इसी तरह नेहरू घाट पर रायपुर पुलिस द्वारा कंट्रोल रूम बनाया गया है।
बताया कि सायरन हूटर, वायर लेस व ‘‘पब्लिक एड्रेस सिस्टम’’ (सार्वजनिक घोषणा प्रणाली) से लैस 4 पहिया पेट्रोलिंग, 15 बाइक पेट्रोलिंग पूरे मेला में कार्य कर रही है। इसके अलावा एसडीआरएफ के जवान स्नान कुंड के स्थान पर ड्यूटी में है जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सकता हैं। पुलिस द्वारा सुरक्षा बैंड मेला में आने वाले छोटे बच्चों के हाथों में बांधा जा रहा है। जिसमें उनके अभिभावक का नाम, पता व मोबाईल नम्बर लिखा जा रहा है। जिससे बच्चों के गुम होने पर आसानी से पता लगाया जा सके। तीनो कंट्रोल रूम में खोया पाया केंद्र भी बनाया गया है जिसकी मदद से गुम हुए बच्चों, परिजनों, मोबाईल नम्बर व अन्य सामानों को सुरक्षित किया जा रहा है।
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राजिम कुंभ कल्प में पहुंची किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर सौम्या सखी
वैष्णव किन्नर आखाड़े से सौम्या सखी पहली बार राजिम कुंभ कल्प मेला में पहुंची हुई है। चर्चा के दौरान सौम्या जी ने बताया कि वे संत समागम समिति और अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण समाज के बैनर तले राजिम आई है। उन्हें इसी वर्ष कुंभ में श्री श्री 108 साध्वी और महामंडलेश्वर की उपाधि मिली है। उन्होंने बताया कि गुरु हिमानीगिरी से दीक्षा लेकर सन्यास ग्रहण किया है। वे वर्तमान में छत्तीसगढ़ी की प्रभारी है। सुरेश्वर महाराज मेरे पिता तुल्य है। उनके दिशा निर्देश पर हम धार्मिक कार्य अनुष्ठान करते हैं। वह सनातन धर्म को आगे ले जाना चाहती है। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए हमेशा खड़ी रहेगी और धर्म के क्षेत्र में हमेशा काम करती रहेंगी।
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संत समागम मंच पर संतों का विचार मंथन
 राजिम कुंभ कल्प के संत समागम स्थल पर मंगलवार को संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संतों ने अपने-अपने विचार रखे। अमरकंटक आश्रम से पहुंचे महंत प्रभाजन मुनी उदासीन ने संतों सहित उपस्थित जनता एवं संतो को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा, गीता और गाय की रक्षा ही धर्म है। सनातन धर्म की रक्षा के लिए गीता, गंगा और गाय की रक्षा जरूरी है।
दुनिया में एक ही धर्म है वो है सनातन धर्म - सर्वेश्वर दास
महामंडलेश्वर सर्वेश्वर दास ने कहा कि विविधता में एकता ही हमारी विशेषता है। इसी उद्देश्य से संत समाज का गठन किया है। हमने 1 माह में 4500 कि.मी. की यात्रा कर संतों को जोड़ने का काम किया। महाराज जी ने कहा कि दुनिया में एक ही धर्म है वो है सनातन धर्म। अनेक धर्म नहीं हो सकते। मानवता ही सनातन धर्म है जो मानवता की रक्षा करता है। वहीं हमारा धर्म है। जो बनावटी संत और स्वयंभू संतो से समाज और संतो को सावधान रहना होगा। अखिल भारतीय क्षुत्रसमिति में संतो को जोड़ने का काम किया जा रहा। विविधता मे एकता का दर्शन ही हमारा दर्शन है। हम सभी सनातनी है।
मतांतरण और धर्मांतरण रोकने की जरूरत - रामबालक दास
बालयोगी रामबालक दास महाराज ने कहा कि संतों की धार्मिक व्याख्या और मंथन चल रहा है। जिसका अमृत यकीनन समाज और जनकल्याण सहित सनातन धर्म की रक्षा में उपयोगी साबित होगा। मतांतरण और धर्मांतरण को रोकना होगा। अंधविश्वास फैलाकर धर्मांतरण किया जा रहा है। ऐसे लोगों से मिलकर उनकी समस्या को जानना होगा, तभी धर्मांतरण रोका जा सकता है। वनांचल क्षेत्रों में बेरोजगारी, गरीबी के कारण लोग धर्मांतरण करते हैं। उन्होंने कहा कि पाटेश्वर धाम संस्कार समिति धर्मांतरण रोकने का काम कर रही है। उन्होंने संतों और पुजारियों को जोडकर एक समिति बनाने का सुझाव दिया। ताकि संत समाज सहित समस्त मंदिरो के पुजारियो एवं गृहस्थों को भी जोड़कर धर्म की रक्षा किया जा सके।
दिव्य ज्योति संस्थान के अखिलेशानंद ने संत समागम और संतों के दर्शन को दुर्लभ माना। उन्होंने धर्म परिवर्तन कराने वाले घुसपैठिये से सावधान रहने की बात कही। कहा कि संगठन बनाकर काम करना होगा ताकि धर्म परिवर्तन को रोका जा सकें।
शक्ति पाठ कर कार्यक्रम का हुआ समापन
संतो के उद्बोधन के बाद शक्ति पाठ कर संत समागम का समापन किया गया। इस संत समागम में महामंडलेश्वर सर्वेश्वर दास महाराज, महंत नरेंन्द्र दास, महंत राधेश्याम दास, महंत रामबालक दास, महंत त्रिवेणी दास, महंत संत दास, महंत श्याम सुंदर दास, महंत देवा दास, गुरू मां सुमिरन माई, ब्रह्मकुमार नारायण भाई, महंत प्रभंजन मुनी, आचार्य रघुनाथ प्रसाद, महंत राधामोहन दास, महंत अखिलेशानंद सहित कई संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उपस्थित थी.