गैस सिलेंडर की कालाबाजारी से गर्माया सदन, CM ग्राम सड़क योजना का मुद्दा, धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम, चूहों के बहाने विपक्ष ने सरकार को घेरा

The House heated up over the black marketing of gas cylinders, the issue of the CM Gram Sadak Yojana, the political battle over paddy collection, and the opposition cornered the government on the pretext of rats.

गैस सिलेंडर की कालाबाजारी से गर्माया सदन, CM ग्राम सड़क योजना का मुद्दा, धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम, चूहों के बहाने विपक्ष ने सरकार को घेरा

गैस सिलेंडर की कालाबाजारी से गर्माया सदन

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में गैस सिलेंडर के दामों मे वृद्धि और कालाबाजारी का मामला जोर शोर से गूंजा। इस विषय पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की. जिसे आसंदी ने खारिज कर दिया. इससे नाराज़ होकर विपक्ष के सभी सदस्य गर्भगृह में पहुंच गए. नियमानुसार सभापति ने कांग्रेस के 30 विधायकों को निलंबित करने की घोषणा कर दी.
शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत और भूपेश बघेल ने यह मामला उठाते हुए कहा कि वर्तमान में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ते ही इसकी जमाखोरी और कालाबाजारी शुरू हो गई है. लोगो को सिलेंडर के लिए काफी परेशानियां हो रही है. इसलिए इस पर सदन की कार्यवाही रोक कर चर्चा कराई जाए. विपक्ष के स्थगन पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इसे केंद्र का विषय बताते हुए इसे विधानसभा से बाहर का विषय होने का हवाला दिया. भाजपा विधायक के ऐसा कहते ही विपक्ष खड़े होकर नारेबाजी करने लगे. इसके जवाब में सत्ता पक्ष से भी नारे लगने शुरू हो गए. लगातार हंगामा को देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी.
इसके बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू होते ही विपक्ष के नेताओं ने सिलेंडर की कालाबाजारी पर अपनी बात रखने का प्रयास किया. उनकी बातें सुनने के बाद सभापति धरम लाल कौशिक ने स्थगन प्रस्ताव खारिज करते हुए इस पर चर्चा की अनुमति नहीं दी. इससे नाराज होकर विपक्ष के सभी विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में घुस गए. सभापति ने 30 कांग्रेस विधायकों को निलंबित करने की घोषणा कर दी. सभी विपक्षी विधायक सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सदन से बाहर आ गए. थोड़ी ही देर बाद आसंदी ने सभी विधायकों का निलंबन वापस ले लिया.
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धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम, चूहों के बहाने विपक्ष ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ विधानसभा: धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम, चूहों के बहाने विपक्ष ने सरकार को घेरा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार को धान खरीदी और उसके भंडारण के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रही. विपक्ष ने धान के रख-रखाव में लापरवाही और चूहों द्वारा भारी तादाद में धान खाए जाने की खबरों को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखे हमले किए.
धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम,सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने धान संग्रहण केंद्रों में चूहों द्वारा धान बर्बाद किए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए तत्काल चर्चा की मांग की. खरसिया विधायक उमेश पटेल ने डॉ. महंत का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदेश भर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि चूहे सरकारी धान को चट कर रहे हैं. जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है.
पूर्व सीएम भूपेश बघेल का हमला: “कर्मचारी चूहों को कर रहे बदनाम”
धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम,मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सुशासन का दावा करने वाली सरकार में भारी अव्यवस्था व्याप्त है. उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि लगभग 22 लाख 71 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई है. जिसे अब तक जमा नहीं किया गया। बघेल ने चुटकी लेते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी अपनी कमियों को छिपाने के लिए चूहों को बदनाम कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि धान की इस कमी से राज्य के खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगा है.
खाद्य मंत्री का पलटवार: आंकड़ों के साथ दिया जवाब
धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम,विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने सदन में सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि “धान को चूहों द्वारा खाए जाने की बात पूरी तरह निराधार है।” मंत्री ने जानकारी दी कि:
प्रदेश में इस सीजन में 25 लाख किसानों से रिकॉर्ड 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है.
किसानों को 46 हजार 277 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे उनके खातों में किया जा चुका है.
वर्तमान में संग्रहण केंद्रों में केवल 67 हजार टन धान बाकी है और मिलिंग की प्रक्रिया तेजी से जारी है
धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम,मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले 78 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. लेकिन धान की कमी जैसी कोई बात नहीं है.
हंगामे के बीच विपक्षी विधायकों का निलंबन
धान संग्रहण को लेकर सियासी संग्राम,मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य सदन के बीचों-बीच (गर्भगृह) आकर नारेबाजी करने लगे। सभापति द्वारा स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर किए जाने के बाद कांग्रेस विधायकों का आक्रोश और बढ़ गया। गर्भगृह में प्रवेश करने के कारण नियमतः कांग्रेस के सभी विधायक स्वतः निलंबित हो गए. सदन में काफी देर तक शोर-शराबा और नारेबाजी का माहौल बना रहा.
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CM ग्राम सड़क योजना का मुद्दा, विधायक किरण देव ने बिना सर्वे टेंडर जारी करने पर जताई आपत्ति

छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़कों को लेकर सवाल उठे. विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विधायक किरण देव ने बस्तर क्षेत्र में प्रस्तावित एलेंगनार-उरकापाल-कांदानार सड़क निर्माण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिना सही सर्वे के टेंडर जारी कर दिए गए हैं. जिससे निर्माण कार्य में बाधाएं आ रही हैं.
विधायक किरण देव ने सदन में कहा कि यह सड़क क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. लेकिन योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के लिए पहले विस्तृत सर्वे किया जाना चाहिए था. लेकिन बिना पर्याप्त सर्वेक्षण के ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दी गई. इससे काम शुरू होने के बाद कई तरह की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आ रही हैं. 18 किलोमीटर की सड़क 31 जनवरी 2023 को टेंडर हुआ. तीन साल में कितना काम किया गया. कितनी राशि भुगतान हुआ?
इस सवाल का जवाब में मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि 18 किमी सड़क नक्सलवाद होने की वजह से सर्वे नहीं हुआ. तीन साल में अर्थ वर्क का काम हुआ. 4 करोड़ का भुगतान हुआ है. 8 करोड़ की राशि योजना में है. डीएमएफ की राशि भी है. एक वर्ष में कार्य पूरा करने कोशिश करेंगे.
किरणदेव ने कहा ने कहा कि 2 टेंडर में इस योजना को अब विभाजित किया जा रहा है. 18 किमी में सिर्फ मिट्टी मुरूम डालने और पुलिया निर्माण का काम ही हुआ है. बारिश में मुरूम मिट्टी धूल गए हैं. किरणदेव ने पूछा कि टेंडर की प्रक्रिया किस हालत में है. कब शुरू होगा. काम और कितने समय में यह काम पूरा कर लिया जाएगा? टीम गठित किया जाए, ताकि मॉनिटरिंग हो, यहां गलत जानकारी आ रही?
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि लंबे समय से सड़क निर्माण कार्य रुका है. सरकार की मंशा है जल्द काम पूरा होगा. घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, वन क्षेत्र की वजह से परिस्थितियां अलग है. 20 दिन के भीतर अधिकारी स्थल का अवलोकन करेंगे. इसके बाद एक्शन लिया जाएगा.
विधानसभा में गूंजा सरगुजा स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा
इसके बाद विधायक प्रबोध मिंज ने सरगुजा जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि जो भर्तियां हो रही वह शहरी क्षेत्रों में होती है. ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं जाना चाहते हैं. क्या केंद्रीय स्तर पर भर्ती प्रकिया करेंगे. जितने पद की स्वीकृति है कार्यरत बता रहे वह खाली है? रिक्त पद की संख्या अधिक है.
इस सवाल का जवाब में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि आपके क्षेत्र में पदों की संख्या कम है. लेकिन उतनी भी कम नहीं... 75 से 80% पद भरे हैं. अनावश्यक रूप से संलग्नीकरण हुए होंगे तो हटाया जाएगा. मैं सदन से सारे संलग्नीकरण को निरस्त करने की घोषणा करता हूं.
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अस्पतालों से समाप्त की जाएगी कर्मचारियों की संलग्नता

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में जिला जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संलग्न को समाप्त किए जाने की घोषणा की. इस संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया गया है.
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस बात की घोषणा विधायक प्रबोध मिंज के सवाल पर की. विधायक ने मंत्री से सरगुजा जिले अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वीकृत पद एवं उनके विरुद्ध वर्तमान में पदस्थ कर्मचारियों की जानकारी, विधानसभावार उपलब्ध कराने के साथ, कौन-कौन से कर्मचारी कब से एवं कहां अन्यत्र संलग्न किए गए हैं?, रिक्त पदों की पूर्ति कब तक कर कर्मचारी पदस्थ किए जावेंगे?, सरगुजा जिले में भवनविहीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जानकारी विधानसभावार उपलब्ध करावें एवं कब तक क्षेत्रों में भवन उपलब्ध करावेंगे?
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