गरियाबंद में रात 10 बजे सड़क पर तड़पते मिले दो घायल, 108 का इंतजार, फिर 112 बनी जिंदगी की उम्मीद, हालत नाजुक, दोनों रायपुर रेफर

Two injured individuals were found writhing in pain on the road in Gariaband at 10 PM; after a wait for the '108' ambulance, the '112' service emerged as a lifeline. Both are in critical condition and have been referred to Raipur.

गरियाबंद में रात 10 बजे सड़क पर तड़पते मिले दो घायल, 108 का इंतजार, फिर 112 बनी जिंदगी की उम्मीद, हालत नाजुक, दोनों रायपुर रेफर

गरियाबंद : गरियाबंद जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर दूर झालखम्हार-छुरा मार्ग पर शुक्रवार रात करीब 10 बजे नाला के पास हुए सड़क हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आपातकालीन मदद की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए. हादसे में दो लोग बुरी तरह घायल हो गए.
मिली जानकारी के मुताबिक झालखम्हार के नाला के टर्निंग के पास दोनों युवक एक ही बाइक से  अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए. हादसे में रूपनारायण निषाद पिता दिलीप राम और सुरेश पिता जयप्रकाश, निवासी परसदा कला, गंभीर रूप से घायल हो गए.
बताया जा रहा है कि हादसे के बाद दोनों घायल गंभीर हालत में सड़क पर पड़े थे. उन्हें फौरन इलाज की जरूरत थी. घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस का इंतजार किया गया. लेकिन एंबुलेंस के नहीं पहुंचने के हालात बनने पर डायल 112 की टीम ने फौरन जिम्मेदारी संभाली.
जब 108 का इंतजार लंबा हुआ, 112 बनी सहारा
डायल 112 की मदद से दोनों घायलों को जिला चिकित्सालय गरियाबंद लाया गया. जहां उनका प्राथमिक उपचार के बाद दोनों ज्यादा क्रिटिकल होने की वजह से उन्हें रायपुर फौरन रेफर किया गया. गंभीर रूप से घायल दोनों लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में पुलिस की तत्परता अहम रही.
इस पूरे घटनाक्रम में आ. 515 कृष्ण कुमार राय और चालक भानु प्रताप ठाकुर की सराहनीय भूमिका रही। टीम ने बिना देर किए घायलों को अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई।
सवाल सिर्फ हादसे का नहीं…
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी घायल की जिंदगी चंद मिनटों की देरी पर टिकी हो, तब आपातकालीन एंबुलेंस सेवा कितनी तेजी से मौके तक पहुंचती है? फिलहाल दोनों घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है. हादसा कैसे हुआ. इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है.
झालखम्हार-छुरा रोड पर हुए इस हादसे ने जहां सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है. वहीं डायल 112 की तत्परता ने यह भी दिखाया कि मुश्किल वक्त में समय पर मिली मदद किसी की जिंदगी बचाने में कितनी अहम हो सकती है.
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