ऑनलाइन दवा कंपनियों के खिलाफ गरजे केमिस्ट, गरियाबंद में निकली बाइक रैली, बंद रहे मेडिकल स्टोर, मंत्री बोले- Online ज्यादा फायदेमंद

Chemists protested against online pharmaceutical companies, a bike rally took place in Gariaband, medical stores remained closed, and the minister said online was more profitable.

ऑनलाइन दवा कंपनियों के खिलाफ गरजे केमिस्ट, गरियाबंद में निकली बाइक रैली, बंद रहे मेडिकल स्टोर, मंत्री बोले- Online ज्यादा फायदेमंद

गरियाबंद : अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और क्विक कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते दखल के खिलाफ गरियाबंद जिले के दवा व्यापारियों ने बुधवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल कर अपनी सभी मेडिकल दुकानें बंद रखीं. जिलेभर के केमिस्ट और दवा विक्रेता एकजुट होकर सड़क पर उतरे और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. वही केमिस्ट संघ के पदाधिकारी और सदस्य आज विरोध स्वरूप बाइक रैली निकाल कर नगर के मुख्य चौक चौराहे से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुचे और पीएम मोदी के नाम पर अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौपते हुए अपनी बाते रखी.
गरियाबंद जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले दवा व्यापारियों ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर के जरिए ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में ऑनलाइन के जरिए हो रही दवा बिक्री को जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई.
संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्रा, कोषाध्यक्ष अमीन मेमन ने कहा कि बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन और अनियंत्रित होम डिलीवरी के जरिए दवाओं की बिक्री मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है. उनका कहना है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद कई ऑनलाइन कंपनियां सालों से धड़ल्ले से कारोबार कर रही हैं.
दवा व्यापारियों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट और प्रेडेटरी प्राइसिंग के जरिए छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों का कारोबार खत्म करने में लगे हैं. इससे लाखों लाइसेंसधारी छोटे केमिस्टों का भविष्य संकट में पड़ गया है.
संघ ने कहा कि कोविड काल में अस्थायी जरूरतों को देखते हुए लागू किए गए कुछ प्रावधानों का अब दुरुपयोग हो रहा है. क्विक कॉमर्स कंपनियां इन्हीं नियमों की आड़ में बिना पर्याप्त निगरानी के घर-घर दवाइयां पहुंचा रही हैं. जो बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है.
ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी गईं —
अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल कड़ी कार्रवाई
बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवा बिक्री और होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध
जीएसआर 817(ए) और जीएसआर 220(ए) को वापस लेने की मांग
ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट और प्रेडेटरी प्राइसिंग पर रोक
दवा व्यापारियों ने कहा कि देशभर के केमिस्ट स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं. कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा देश संकट में था. तब मेडिकल स्टोर संचालकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक दवाइयां पहुंचाईं. इसके बावजूद अब ऑनलाइन कंपनियों को बढ़ावा देकर छोटे व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा किया जा रहा है.
गरियाबंद जिले में मेडिकल स्टोर बंद रहने से दिनभर लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना भी करना पड़ा. हालांकि संघ ने कहा कि यह आंदोलन जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है.
फिलहाल दवा व्यापारियों की इस एकजुटता और ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ उठी आवाज ने पूरे जिले में चर्चा तेज कर दी है. तो वही ग्राहक ऑनलाइन दवा बिक्री को समर्थन दे रहे हैं.
एक ग्राहक ने कहा, "ऑनलाइन दवा खरीद पर छूट मिलती है और समय पर दवा भी मिल जाती है. ऑनलाइन दवा मंगाने पर भी कोई चार्ज नहीं लिया जाता है. इसलिए वह काफी फायदेमंद है. आपात स्थिति में ऑफलाइन दवा ले सकते हैं. इसलिए दोनों ही ऑप्शन ग्राहकों के लिए अच्छे होते हैं.
हालांकि मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हो रही केमिस्टों की हड़ताल को गलत ठहराया। उन्होंने कहा, मेडिकल वालों की हड़ताल बिल्कुल गलत है. ऑनलाइन दवाइयां मंगाने पर ग्राहकों को कम परेशानी होती है. ऑनलाइन दवाई सस्ती भी पड़ती है. इसलिए केमिस्ट हड़ताल कर गरीबों के साथ ही गलत कर रहे हैं.
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