हिंसा के बाद कानून-व्यवस्था संभालने में लापरवाही पड़ी भारी, अधिकारी पर गिरी गाज, संभागायुक्त ने तत्काल प्रभाव से नायब तहसीलदार को किया सस्पेंड
Negligence in managing law and order following an outbreak of violence has proven costly; the Divisional Commissioner has suspended a Naib Tehsildar with immediate effect.
सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्रशासनिक लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है. सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने बिहारपुर में पदस्थ नायब तहसीलदार और प्रभारी तहसीलदार करमचंद जाटवर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. यह कार्रवाई 17 अक्टूबर 2026 को ग्राम कुबेरपुर में हुई ट्रैक्टर हादसे के बाद उत्पन्न कानून-व्यवस्था की स्थिति को कंट्रोल करने में कथित लापरवाही बरतने के मामले में की गई है. जिला प्रशासन से मिले प्रतिवेदन के आधार पर संभागायुक्त ने मामले को गंभीर मानते हुए निलंबन आदेश जारी किया है.
मिली जानकारी के मुताबिक सूरजपुर जिले के चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुबेरपुर में 17 अक्टूबर को ट्रैक्टर हादसा हुआ था. गिट्टी से लदे ट्रैक्टर की टक्कर से स्कूटी सवार एक महिला की मौत हो गई थी. इस हादसे के बाद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई और क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई. हादसे के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भूमिका जरुरी थी. घटना के दौरान बिहारपुर के प्रभारी तहसीलदार करमचंद जाटवर पर स्थिति को संभालने में देरी करने और अपने प्रशासनिक दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन नहीं करने के आरोप लगे. मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित घटनाक्रम की समीक्षा की गई.
बताया गया है कि सूरजपुर कलेक्टर की ओर से भेजे गए पत्र और जांच प्रतिवेदन में नायब तहसीलदार की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे. प्रतिवेदन में प्रशासनिक शिथिलता और कर्तव्य के प्रति उदासीनता का उल्लेख किया गया. इसके बाद सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा ने मामले का मुआयना करते हुए सस्पेंड की कार्रवाई की. संभागायुक्त द्वारा जारी आदेश में करमचंद जाटवर के आचरण को शासकीय सेवक के अपेक्षित दायित्वों के खिलाफ माना गया है. आदेश के मुताबिक संबंधित अधिकारी का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के प्रावधानों के खिलाफ पाया गया. इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है.
निलंबन अवधि के दौरान करमचंद जाटवर का मुख्यालय कार्यालय संभागीय पटवारी प्रशिक्षण शाला, अंबिकापुर, जिला सरगुजा निर्धारित किया गया है. आदेश में यह भी साफ किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी. गौरतलब है कि कुबेरपुर में हुई हादसे के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था. हादसे से नाराज ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था. ऐसे संवेदनशील हालात में राजस्व और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है.
कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने और स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है. इस मामले में प्राप्त प्रशासनिक प्रतिवेदन के आधार पर प्रभारी तहसीलदार की भूमिका पर सवाल उठे. संभागायुक्त ने इन परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए निलंबन का फैसला लिया. प्रशासनिक स्तर पर हुई
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