पटवारियों ने सरकारी नोटिस की जलाई होली!, आर-पार के मूड में पटवारी, संघ जिला अध्यक्ष सस्पेंड, 155 को कारण बताओ नोटिस, लोग परेशान
Patwaris burn government notices; prepared for a showdown. District president of the association suspended, 155 others issued show-cause notices; public faces inconvenience.
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : सरकारी व्यवस्था में जब कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आम जनता के जरूरी काम ठप पड़ने लगें और इसका खामियाजा विद्यार्थियों को अपनी छात्रवृत्ति गंवाकर भुगतना पड़े, तब सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जनता की परेशानी का जिम्मेदार कौन है? बलरामपुर जिले में पटवारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है. कोरबा में संघ जिला अध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया गया है.
मामला सिर्फ सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित होने तक सीमित नहीं है. बल्कि इसका सीधा असर आम नागरिकों के भविष्य और उनके अधिकारों पर पड़ रहा है. इसका उदाहरण परासी निवासी कीर्ति है. जो JK ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट में अध्ययनरत है. छात्रा को छात्रवृत्ति का लाभ लेने के लिए आय प्रमाण पत्र बनवाना था. निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रमाण पत्र जमा करना जरुरी था. लेकिन पटवारियों की हड़ताल की वजह से उसका आय प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन सका. नतीजा यह हुआ कि छात्रवृत्ति आवेदन की आख़री तारीख निकल गई और कीर्ति छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित रह गई.
सोचने वाली बात है कि जिस छात्रा को पढ़ाई में आर्थिक सहायता मिलनी थी. वह सरकारी व्यवस्था की बाधा के कारण उस लाभ से ही वंचित हो गई. उसके परिवार के लिए यह महज एक प्रमाण पत्र का मामला नहीं, बल्कि पढ़ाई से जुड़ी आर्थिक सहायता का सवाल है. अब अगर छात्रवृत्ति की समय सीमा खत्म हो चुकी है. तो क्या संबंधित विभाग उसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगा? क्या विशेष अनुमति से आवेदन स्वीकार कराने का प्रयास होगा? या फिर छात्रा को यह कहकर छोड़ दिया जाएगा कि समय निकल चुका है?
कीर्ति का मामला एक उदाहरण भर है. जिले में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कई ऐसे काम हैं जिनकी समय सीमा निर्धारित होती है. समय पर प्रमाण पत्र या राजस्व दस्तावेज नहीं मिलने से विद्यार्थियों, किसानों, नौकरी के अभ्यर्थियों और आम नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
किसी विद्यार्थी को छात्रवृत्ति के लिए प्रमाण पत्र चाहिए, किसी अभ्यर्थी को भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज जमा करना है. तो किसी किसान को जमीन संबंधी काम पूरा कराना है. ऐसे में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है.
सवाल यह भी है कि जब प्रशासन को पता है कि हड़ताल के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है. तो आम नागरिकों के जरूरी कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या जिले में ऐसे विद्यार्थियों और जरूरतमंद लोगों की पहचान की गई. जिनकी समय सीमा प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण निकल गई? क्या प्रभावित आवेदनों का कोई रिकॉर्ड तैयार किया गया?
बलरामपुर में सस्पेंड की कार्रवाई
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा 1 नवंबर 2026 को पटवारी धीरेंद्र उरमलिया के निलंबन का आदेश जारी किया गया. आदेश में 15 दिनों से ज्यादा समय तक निर्धारित मुख्यालय में अनुपस्थित रहने, बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कर्तव्य पर उपस्थित नहीं होने और कार्यभार ग्रहण नहीं करने का उल्लेख किया गया है. आदेश में संबंधित सेवा नियमों के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है.
कोरबा में भी एक्शन
कोरबा में राजस्व पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश कुमार वर्मा को रविवार को कलेक्टर ने शासकीय कार्यदायित्वों के प्रति लापरवाही उदासीनता बरतने कारण बताओ नोटिस का समय पर संतुष्टिकारक जवाब पेश नहीं करने पर सिविल सेवा आचरण नियमों के खिलाफ कार्य व्यवहार पाए जाने पर सस्पेंड कर दिया है.
सरगुजा में सरकारी नोटिस की जलाई होली!, 819 पटवारियों को नोटिस
सरगुजा : सरगुजा में हड़ताली पटवारियों ने काम पर लौटने का नोटिस मिलने के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है. सोमवार को धरना स्थल पर पटवारियों ने नोटिस की प्रतियां जलाईं। सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा के निर्देश पर संभाग में हड़ताल कर रहे सभी 819 पटवारियों को नोटिस जारी किया गया है.
पटवारी संघ ने कहा कि वे प्रशासनिक धमकियों से डरकर अपना आंदोलन खत्म करने वाले नहीं है. संविधान ने सभी नागरिकों को अपनी मांग रखने का हक दिया है.
सरगुजा संभाग के 6 जिलों में 819 पटवारी 13 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं. पटवारी पीवी एप के जरिए फसलों के सत्यापन का विरोध कर रहे हैं. पटवारियों का कहना है कि यह एप काम करने के लिहाज से सही नहीं है. इसके अलावा वे निलंबित पटवारियों का निलंबन वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं.
सरगुजा कमिश्नर के निर्देश के बाद सरगुजा जिले के 216, सूरजपुर के 192, कोरिया के 60, एमसीबी के 51, जशपुर के 150 और बलरामपुर के 150 पटवारियों को फौरन काम पर लौटने का नोटिस जारी किया गया है.
सोमवार को पटवारी नोटिस की कापी लेकर धरना स्थल पर पहुंचे और नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया. नोटिस मिलने के बाद भी पटवारियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है.
राजस्व पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने कहा कि संविधान ने हर नागरिक को अपनी मांग रखने का अधिकार दिया है. शासन दमनात्मक कार्रवाई कर आंदोलन खत्म कराने का प्रयास कर रहा है, जो उचित नहीं है.
पटवारी डिम्पल गुप्ता ने कहा कि पदोन्नति सभी का अधिकार है और पटवारी इसे लेकर रहेंगे. संघ पदाधिकारियों ने दोहराया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं होता, हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी.
एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी
कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा ने कहा है कि नोटिस मिलने के बाद तय समय पर मुख्यालय में हाजिर नहीं होने और जवाब नहीं देने वाले पटवारियों के खिलाफ नियमों के एकतरफा कार्रवाई की जाएगी. बलरामपुर जिले में मुख्यालय में नहीं रहने के कारण 5 पटवारियों को सस्पेंड भी किया गया है. सोमवार को सरगुजा में भी कार्रवाई की तैयारी की गई है.
ताजा खबर के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb
कांकेर में 155 को ‘ब्रेक इन सर्विस’ का कारण बताओ नोटिस
उत्तर बस्तर कांकेर : हड़ताल पर गए कांकेर जिले के 155 पटवारियों को सेवा में व्यवधान (ब्रेक इन सर्विस) की कार्रवाई के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
उल्लेखनीय है कि जिले के पांच राजस्व अनुविभाग कांकेर, चारामा, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ एवं पखांजूर में कुल 175 पटवारी पदस्थ हैं. इनमें से 155 पटवारी वर्तमान में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. हड़ताल प्रारंभ होने के बाद से अब तक इन पटवारियों द्वारा अपने कर्तव्यों पर उपस्थित होकर शासकीय कार्यों का संपादन प्रारंभ नहीं किया गया है। पटवारियों की लगातार अनुपस्थिति से राजस्व विभाग के कई अहम काम प्रभावित हो रहे हैं.
ताजा खबर के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb
ये है प्रमुख मांगे
पीवी ऐप का विरोध और व्यावहारिक दिक्कतें: पटवारी संघ का कहना है कि नए पीवी ऐप के जरिए फसल भौतिक सत्यापन (गिरदावरी) करने में तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं आ रही हैं. और इसमें सुधार या इसे बंद करने की मांग की जा रही है.
दंडात्मक कार्रवाई का विरोध: पीवी ऐप के बहिष्कार के चलते पटवारियों पर किए जा रहे तबादलों, नोटिस और निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाइयों को तुरंत निरस्त करने की मांग है.
वेतन विसंगति का निराकरण: वर्ष 2017 में ग्रेड-पे 2200 रुपये से बढ़ाकर 2400 रुपये किए जाने के बाद तहसील और जिला स्तर पर हुई विसंगतियों को दूर करने की मांग.
पदोन्नति: वर्षों से लंबित पटवारियों की पदोन्नति का रास्ता खोलने की मांग (नायब तहसीलदार आदि पदों पर समय पर प्रमोशन दिए जाएं)
अन्य स्थानीय मांगें: भुइयां पोर्टल में मैनुअल फसल प्रविष्टि का विकल्प शुरू करना और राजस्व सर्वेक्षण से जुड़ी मांगें शामिल हैं.
यहां सवाल किसी कर्मचारी के आंदोलन करने के अधिकार का विरोध करना नहीं है. कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का अधिकार है. लेकिन उस दौरान आम जनता के जरूरी कार्यों की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है. आखिर सरकारी व्यवस्था जनता की सुविधा के लिए है या जनता को कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चक्कर काटने के लिए छोड़ देने के लिए?
हड़ताल के कारण प्रभावित हुए विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों के मामलों की समीक्षा कब होगी? जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई? क्या राजस्व विभाग के कामकाज की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
सरकारी कर्मचारियों की मांगें अपनी जगह हैं. लेकिन किसी गरीब परिवार की बेटी की छात्रवृत्ति छूट जाना, किसी किसान का जरूरी काम अटक जाना और किसी जरूरतमंद का प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन पाना सामान्य प्रशासनिक समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
जनता को आश्वासन नहीं, व्यवस्था चाहिए. विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र चाहिए. किसानों को राजस्व सेवाएं चाहिए और आम नागरिकों को समय पर सरकारी काम चाहिए. अब जिला प्रशासन को बताना होगा कि जनता को राहत कब मिलेगी और लापरवाही की जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?
ताजा खबर के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb



