पाटेश्वर धाम विवाद ने फिर पकड़ा तूल, आदिवासी नेताओं को रोका गया, नाराज आदिवासी समाज ने दी संरक्षण जातरा की चेतावनी, इलाके में बढ़ी हलचल

The Pateshwar Dham dispute has flared up again; tribal leaders were stopped, the aggrieved tribal community has threatened to hold a 'Sanrakshan Yatra' (Conservation March), and tension is mounting in the area.

पाटेश्वर धाम विवाद ने फिर पकड़ा तूल, आदिवासी नेताओं को रोका गया, नाराज आदिवासी समाज ने दी संरक्षण जातरा की चेतावनी, इलाके में बढ़ी हलचल

बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का शांत इलाका इन दिनों एक बड़े सामाजिक और धार्मिक विवाद की वजह से सुर्खियों में है. डौंडीलोहारा ब्लॉक के तुएगोंदी गांव के जंगलों में स्थित पाटेश्वर धाम आश्रम और सर्व आदिवासी समाज के बीच का टकराव बढ़ता जा रहा है. बीते 1 जून को कलेक्ट्रेट के घेराव और बैरिकेडिंग टूटने के बाद, अब आदिवासी समाज ने आगामी 20 जून को संरक्षण जातरा का शंखनाद कर दिया है. इस संवेदनशील मुद्दे पर न तो बाबा कुछ बोल रहे हैं और न ही प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी इस पर कुछ बोलने को तैयार है.
जल, जंगल, जमीन और आस्था से जुड़ा मामला
ये पूरा विवाद जल, जंगल, जमीन और आस्था की लड़ाई में तब्दील हो चुका है. सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि पेसा कानून के दायरे में आने वाले इस रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में बगैर अनुमति के करोड़ों का निर्माण कराया जा रहा है. और समाज के पारंपरिक देव स्थल का रास्ता बंद कर दिया गया है. इसी की जमीनी हकीकत जानने जब समाज का प्रतिनिधिमंडल भौतिक निरीक्षण के लिए जा रहा था तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. यही आक्रोश 1 जून को कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट को तोड़ने की वजह बना.
4 साल पुराना विवाद
इस विवाद की जड़ें चार साल पुरानी हैं. एक मई को आदिवासी समाज के देव पूजन के दौरान पशुबलि को लेकर बाबा समर्थकों और ग्रामीणों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था. जिसका मामला आज भी कोर्ट में है. अब ताजा विवाद आश्रम परिसर के भीतर मौजूद दो देव स्थलों को लेकर है. ऊपर जामड़ीपाठ और नीचे एक कुंड. समाज का आरोप है कि कुंड का नवनिर्माण कर उनके पारंपरिक स्वरूप को बदला गया है और ऊपर जाने का रास्ता तकरीबन बंद कर दिया गया है.
हम प्रकृति के पूजक हैं, हमारी अलग मान्यताएं हैं. उस जगह पर अनाधिकृत रूप से करोड़ों का निर्माण हो रहा है, सागौन की लकड़ियां काटी गई हैं और 12 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कब्जा किया गया है. हम अपने देव स्थल पर जाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन हमें रोका जा रहा है -प्रेमलाल कुंजाम, समाज प्रमुख
बाबा बालक दास ने क्या कहा ?
एक तरफ समाज जहां आंदोलित है. वहीं दूसरी तरफ आश्रम परिसर के भीतर राजस्थान के लाल पत्थरों से तीन मंजिला भव्य मां कौशल्या धाम का निर्माण जारी है. ऑन-कैमरा कुछ भी बोलने से इंकार करते हुए बाबा बालक दास का कहना है कि संत हमेशा निष्पक्ष होते हैं. उनका दावा है कि उनके गुरु को दशकों पहले आदिवासियों ने ही यहां बैठाया था और अब वे सिर्फ सनातन धर्म के प्रचार के लिए यह भव्य मंदिर बना रहे हैं. बातचीत के रास्ते हमेशा खुले हैं.
हम तेंदूपत्ता तोड़ने और काम के सिलसिले में जंगलों में जाते हैं. हमारी परंपराएं यहीं से जुड़ी हैं, लेकिन अब वहां जाने में डर लगता है. प्रशासन हमारी बात नहीं सुन रहा है -प्रतिमा दुग्गा, ग्रामीण
आदिवासी समाज ने दी संरक्षण जातरा की चेतावनी
प्रशासन इस शीत युद्ध को शांत करने में अब तक पूरी तरह नाकाम रहा है. नतीजतन, अब आगामी 20 जून को एक और बड़े आंदोलन यानी संरक्षण जातरा की चेतावनी दी गई है. जिसमें जिले के तीनों विधायकों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. 1 जून को कलेक्ट्रेट के भीतर चूल्हा जलाने वाले ग्रामीणों का अगला कदम क्या होगा. इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं.
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