प्लांट में चार मजदूरों की मौत, छह घायल, मरम्मत के 10 दिन बाद लिफ्ट गिरने से हड़कंप, ग्रामीणों में आक्रोश, अब सिर्फ संवेदना नहीं, जवाबदेही चाहिए
Four workers died and six were injured at the plant. Ten days after the repair, the elevator collapsed, causing widespread outrage. They demanded accountability, not just sympathy.
सक्ती : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से भीषण हादसे की खबर सामने आई है. यहां RKM पॉवर प्लांट में अचानक लिफ्ट गिरने से 4 मजदूरों की मौत हो गई. जबकि 6 से ज्यादा मजदूर गंभीर रुप से घायल हो गए. हादसे के बाद पूरे प्लांट में अफरा-तफरी मच गई. आनन-फानन में लोग घायलों की मदद के लिए दौड़े. इसके बाद हादसे की जानकारी पुलिस को दी गई. खबर मिलते ही मौके पर पहुंची. पुलिस और प्रशासन की टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
सक्ती जिले के डभरा में स्थित RKM पावर प्लांट में लिफ्ट गिरने से 4 मजदूरों की मौत हो गई. मिली जानकारी के मुताबिक पावर प्लांट के बॉयलर की मरम्मत के लिए कुछ मजदूर लिफ्ट से दूसरी मंजिल पर जा रहे थे. तभी तकनीकी खराबी की वजह से अचानक लिफ्ट तेजी से नीचे आ गिरी. इसके बाद पूरे प्लांट में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान मजदूरों की मौत हो गई.
इस हादसे में करीब 6 मजदूर गंभीर रुप से घायल बताए जा रहे हैं. उन्हें इलाज के लिए फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया. हादसे की खबर मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. हादसे के बाद प्लांट पहुंचकर पीड़ित परिजनों ने जमकर हंगामा किया. घटना को लेकर पीड़ित परिजन पावर प्लांट पर लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं. वहीं, पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरु कर दी है.
पुलिस हादसे की वजह को लेकर चरश्मीदों और प्लांट के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ कर रही है. इस हादसे को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है. आपको बता दें कि ऐसा ही एक मामला पिछले महीने 26 सितंबर को रायपुर की स्टील फैक्ट्री में हुआ था. स्टील फैक्ट्री की छत गिरने से 6 मजदूरों की मौत हो गई थी. जबकि कई घायल हो गए. रायपुर के एसपी ने छह शव बरामद होने की पुष्टि की थी और कहा था कि 6 लोग घायल हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस हादसे पर दुख जताया था.
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मरम्मत और निगरानी पर उठते सवाल
1. लिफ्ट की मरम्मत का ऑडिट किस प्रमाणित एजेंसी ने किया था?
2. क्या लोड टेस्ट और सुरक्षा प्रमाणन रिपोर्ट तैयार की गई थी?
3. मरम्मत के बाद सुरक्षा निरीक्षण हुआ या सीधे ऑपरेशन की अनुमति दी गई?
4. क्या ठेकेदार या साइट मैनेजर ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी की?
इन सवालों के जवाब ही यह तय करेंगे कि यह तकनीकी त्रुटि थी या प्रशासनिक अपराध.
हादसे के बाद अब जनता और श्रमिक संगठनों ने इसे सिर्फ दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की है। जिसने मांग की जा रही है कि
1 : – फॉरेंसिक जांच व एसआईटी गठन
राज्य सरकार से माँग है कि घटना की जाँच के लिए स्वतंत्र फॉरेंसिक टीम और विशेष जांच दल (SIT) गठित हो. जिसमें श्रम विभाग, तकनीकी विशेषज्ञ और न्यायिक अधिकारी शामिल हों.
2 : – FIR और आपराधिक मुकदमा
अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है. तो कंपनी प्रबंधन, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर आईपीसी की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए.
3 : – पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता
मृतक मजदूरों के परिजनों को तत्काल आर्थिक मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और घायलों के इलाज की संपूर्ण जिम्मेदारी कंपनी व शासन को लेनी चाहिए.
4 : – ठेकेदार और आपूर्तिकर्ता पर कार्रवाई
अगर खराब मरम्मत या घटिया उपकरण हादसे का कारण पाए जाते हैं तो संबंधित हैदराबाद स्थित कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए और भुगतान रोकने का आदेश हो.
5 : – मुख्य सचिव स्तर की समीक्षा
इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा सार्वजनिक की जाए. मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस मामले में तत्काल जवाबदेही तय होनी चाहिए.
राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ा
घटना के बाद अब सवाल सीधे प्रशासन की तरफ मुड़ रहे हैं क्या उद्योगों के सुरक्षा निरीक्षण सिर्फ कागजों पर हो रहे हैं? क्या श्रम निरीक्षक, फैक्ट्री एक्ट अधिकारी और पर्यवेक्षण तंत्र सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं? मरम्मत के बाद सर्टिफिकेशन प्रक्रिया क्यों नहीं की गई?
अगर जांच में रिपोर्ट छिपाने या लापरवाही की पुष्टि होती है. तो यह मामला न सिर्फ कंपनी, बल्कि प्रशासनिक शीर्ष स्तर तक पहुँच सकता है.
स्थानीय प्रतिक्रिया
घटना के बाद डभरा और आसपास के क्षेत्रों में आक्रोश और शोक दोनों है. स्थानीय निवासियों ने कहा कि यह कोई हादसा नहीं, यह सिस्टम की असफलता है. मजदूर रोज जान हथेली पर रखकर काम करते हैं और सुरक्षा सिर्फ बोर्डों में लिखी रहती है. श्रमिक संघों ने एलान किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे प्लांट गेट पर धरना प्रदर्शन करेंगे.
अब संवेदना नहीं, जवाबदेही जरूरी
राज्य में औद्योगिक परियोजनाओं की चमक के बीच सुरक्षा, जिम्मेदारी और श्रमिक जीवन का प्रश्न बार-बार उठ रहा है. सरकार को अब तय करना होगा क्या वह इस हादसे को दुर्भाग्य कहकर टाल देगी, या न्याय, जवाबदेही और पारदर्शिता के रास्ते पर चलेगी? मृतकों के परिजन अब केवल सांत्वना नहीं चाहते उन्हें जवाब चाहिए, जिम्मेदार चाहिए, और ऐसे हादसे रोकने के ठोस कदम चाहिए.
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