गरियाबंद में खास व्यापारी घर से बेच रहे पटाखा, बाकी गांधी मैदान में, भेदभाव पर फूटा गुस्सा, धमतरी के रिहायशी इलाके में अवैध पटाखों पर कार्यवाही
In Gariaband, certain traders are selling firecrackers from their homes, while others are selling them at Gandhi Maidan. Anger erupts over discrimination. Action taken against illegal firecrackers in a residential area of Dhamtari.
गरियाबंद में खास व्यापारी घर से बेच रहे पटाखा, बाकी गांधी मैदान में, भेदभाव पर फूटा गुस्सा
गरियाबंद : गरियाबंद में दीपावली से पहले पटाखा बाजार में सबका साथ, सबका विकास नहीं, बल्कि कुछ का साथ, कुछ का विकास वाला सीन चल रहा है. गरियाबंद के पटाखा व्यापारी जिला प्रशासन के इस अनोखे न्याय से खासे नाराज हैं. प्रशासन ने फरमान तो जारी कर दिया कि सब लोग नियम-कानून से गांधी मैदान में दुकान लगाओ, लेकिन लगता है ये नियम सिर्फ आम व्यापारियों के लिए ही बने हैं. आरोप है कि कुछ पहुंच वाले और राजनीतिक पकड़ रखने वाले वीआईपी लोगों के लिए प्रशासन ने वर्क फ्रॉम होम की स्पेशल सुविधा दे रखी है.
गरियाबंद जिला प्रशासन ने शहर के सभी पटाखा व्यापारियों को सुरक्षा कारणों से गांधी मैदान में स्टॉल लगाकर ही पटाखे बेचने का आदेश दिया. बेचारे आम व्यापारी प्रशासन के आदेश का पालन करते हुए गांधी मैदान की धूल फांकने पहुंच गए. लेकिन असली खेल तो शहर के अंदर चल रहा है. सूत्रों की मानें तो कुछ अति-विशिष्ट व्यापारी अपने आलीशान घरों और दुकानों से ही पटाखों का शुभ-लाभ कर रहे हैं. और प्रशासन मौन व्रत धारण किए बैठा है. इन्हें न तो गांधी मैदान जाने की जहमत उठानी पड़ रही है. और न ही किसी नियम का डर है.
गांधी मैदान में बैठे व्यापारियों का आरोप है कि ये स्पेशल ट्रीटमेंट पाने वालों में एक पोस्ट ऑफिस के पीछे वाले छुट भैया नेता जी के परिजन शामिल हैं. बताया जा रहा है कि नेता जी हर साल की तरह इस साल भी बेधड़क होकर अपने घर से ही पटाखा सेवा दे रहे हैं. वहीं, किसान राइस मिल के पीछे स्थित भी घर पर पटाखा योजना का भरपूर लाभ उठा रहे हैं. इसके अलावा भी कुछ लोगों की शिकायत पटाखा व्यापारियों ने लिखित में की है शिकायत नहीं होने के चलते इन्हें देखकर गांधी मैदान के व्यापारी बस यही सोच रहे हैं कि हमसे का भूल हुई. जो ये सजा हमको मिली.
गांधी मैदान में दुकान लगाए बैठे गरियाबंद के पटाखा व्यापारी अब मक्खी मारने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि जब शहर के अंदर ही गली-गली में वीआईपी पटाखे उपलब्ध हैं. तो कोई ग्राहक इतनी दूर मैदान तक कष्ट करने क्यों आएगा? व्यापारियों ने रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें तो नियम-कायदों का लंबा-चौड़ा लेक्चर देता है. लेकिन अपने चहेतों को इन्हीं नियमों की किताब फाड़कर फेंकने की खुली छूट दे रखी है. इस सेटिंग के खेल से उनका पूरा धंधा चौपट हो रहा है.
प्रशासन के इस दोहरे मापदंड और भेदभाव पूर्ण रवैये से तंग आकर व्यापारियों ने एकजुट होकर अनुभागीय अधिकारी (SDO) गरियाबंद के दफ्तर में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है. उन्होंने अपनी पूरी व्यथा सुनाई और उन खास लोगों के नाम भी बताए जो घर से बिक्री कर रहे हैं. मगर अब तक इस मामले में किसी भी तरह की कोई जांच या एक्शन नहीं हुआ है.
अब सवाल यह उठता है कि क्या गरियाबंद में नियम सिर्फ आम आदमी के लिए हैं? क्या जिला प्रशासन इन वीआईपी पटाखा व्यापारियों पर कोई कार्रवाई करेगा, या फिर गांधी मैदान के व्यापारी यूं ही न्याय की आस में प्रशासन का मुंह ताकते रह जाएंगे?.
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धमतरी के रिहायशी इलाके में अवैध पटाखों पर कार्यवाही
धमतरी : अवैध पटाखों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है और कॉलोनी के एक मकान से लाखों का अवैध छिपा पटाखा ढूंढ निकाला. हालांकि जिला और पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई की तारीफ हो रही है. मगर दूसरी तरफ यह चर्चा भी शोर मचा रही कि दिवाली में जिले भर में सिर्फ एक कार्रवाई यह बड़ा सवाल है क्योंकि अवैध पटाखे तो शहर के अलावा जिले के भी कई स्थानों में डंप है ऐसा कहां जाता है हालांकि हर साल का यह रिकॉर्ड है कि महज एक या दो कार्रवाई इस तरह के अवैध कारोबार में होती है उसके बाद मामला ठंडा पड़ जाता है जबकि अक्सर ही खासकर दिवाली के समय ऐसा पता चलता है कि चंद रुपयों की लालच में पटाखों को यहां वहां छिपाकर रखा गया है. जिससे कॉलोनी और मोहल्ले वालों के साथ आम लोगों को भी हादसे का खतरा बना रहता है. हालांकि ऐसा कोई बड़ा हादसा अब तक हुआ नहीं है. मगर हर बार ऐसा होगा नहीं यह कहना मुश्किल है. फिर इसका जिम्मेदार कौन होगा? यह भी बड़ा सवाल है. क्योंकि त्यौहार आने से पहले ही इसके गोदाम भी तैयार हो जाते है. जहां अवैध पटाखे बारुद डंप किए जाते हैं. जिससे खतरा तो आमजनमानस को है मगर यह दहशत पैसों की लालच के पीछे दबी हुई नजर आती है. फिर ऐसा भी नहीं है कि ऐसा माल कहां छिपा है कोई जानता नहीं। इसकी खबर भी सबको है. मगर किसी को खबर भी नहीं है. यह भी एक बड़ा सवाल है. बहरहाल इस दिवाली में एक कार्रवाई से जिला और पुलिस प्रशासन की टीम काफी खुश है. जबकी जनता में अवैध पटाखों का खतरा बना ही हुआ है.
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