शराब दुकान हटाने महिला-पुरुषों ने दुकान के आगे दिया धरना, चूल्हा चौंका लेकर बैठी महिलाएं, शराब लेने आए ग्राहकों को पिलाया शरबत
Men and women staged a sit-in protest in front of the liquor shop to remove it, women sat with their stoves and offered sherbet to the customers who came to buy liquor
गरियाबंद : गरियाबंद जिला के सोनामुंदी में संचालित देशी विदेशी शराब दुकान को हटाने आज वार्ड पार्षद विनोद पांडे, पटेल भवरसिंह के नेतृत्व में वार्ड की महिला पुरुष भारी तादाद में दुकान के आगे इकठ्ठा होकर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए. प्रशाशन के खिलाफ जमकर नारे बाजी की. धरने को शिशु मंदिर संचालक संस्था पदाधिकारी, पालक और गायत्री परिवार के लोग भी देने पहुंचे.
आबकारी विभाग के प्रति महिलाओं का भी भारी आक्रोश देखा गया. सुबह से ही देवभोग पुलिस धरना स्थल पर मौजूद रहे. आबकारी विभाग के कर्मी अफसर भी पहुंच कर प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाइश में लगे रहे. लेकिन वार्ड सी दुकान हटाने के लिखित आदेश मिलने पर ही प्रदर्शन खत्म करने पर अड़े रहे.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कलेक्टर,प्रभारी मंत्री से लेकर सीएम तक मांग कर चुके हैं. सभी ने दुकान हटाने की कार्यवाही का निर्देश आबकारी विभाग को दिया था. लेकिन विभाग ने मांग, निर्देश और लोगों की भावना को दरकिनार कर अपनी दुकानदारी को प्राथमिकता में रखा. हटाने के बजाए भवन और अहाता का टेंडर पुराने स्थल पर दिया. जनप्रतिनिधियों के मांग के जवाब आबकारी विभाग ने मिलने वाले राजस्व का हवाला देकर, दुकान हटाने की प्रकिया को शासन स्तर पर करने का जिक्र जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया.
पार्षद विनोद पांडे ने कहा कि दुकान हटाने के पहले, नए स्थल का चयन प्रकिया, दुकान के लिए अलग से टेंडर निकालने की प्रकिया भी शुरू किया गया था.लेकिन पूर्व जिला आबकारी अधिकारी के हठ धर्मीता से दुकान हटाया नहीं जा सका.
10 साल पहले जब दुकान संचालित हुआ तो आबादी कम थी.अब आबादी बढ़ गई है. विद्यालय जाने वाले बच्चे को इसी दुकान स्थित रस्ते से आना-जाना होता है. शराबी विद्यालय प्रांगण और मुख्य दरवाजे तक पहुंच जाते हैं. अहाता में नियम के खिलाफ प्लास्टिक की बिक्री और फिर उसके बिखराव से इलाके भर फैले गंदगि से निजात पाने वार्ड वासी दुकान को किसी दुसरे स्थल संचालन की मांग कर की. आबकारी विभाग के सब इंस्पेक्तर रजत सिंह ठाकुर ने उच्च अफसरों के निर्देश पर लिखित आश्वासन देकर कहा कि 40 दिन के भीतर दुकान हस्तांतरण कर दिया जाएगा. लिखित आश्वासन के बाद लोगों ने धरना खत्म किया.
बता दें कि महिलाओं ने चूल्हा-चौका तक लगा लिया था. और साफ कर दिया था कि जब तक शराब दुकान नहीं हटती. आंदोलन जारी रहेगा. उनका कहना था कि यह आंदोलन सिर्फ दिखावा नहीं है. बल्कि वे पूरी तैयारी के साथ तब तक डटी रहेंगी. जब तक प्रशासन दुकान हटाने का ठोस फैसला नहीं लेता.
ग्रामीणों का आरोप है कि शराब दुकान के कारण क्षेत्र में आए दिन विवाद, झगड़े और अशांति की स्थिति बनी रहती है. नशे की वजह से पारिवारिक माहौल बिगड़ रहा है और महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रताड़ित हो रहे हैं.
वहीं स्थानीय गायत्री परिवार के सदस्यों ने सद्बुद्धि यज्ञ कर प्रशासन को जगाने की कोशिश की. ग्रामीणों, महिलाओं और शिशु मंदिर के बच्चों के साथ गायत्री परिवार के सदस्यों ने रविवार से धरना शुरु किया था. लगातार विरोध के बाद प्रशासन को मौके पर आना पड़ा. जब आबकारी विभाग ने लिखित में भरोसा दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर दुकान स्थानांतरित होगी, तब जाकर ग्रामीण धरना समाप्त करने के लिए तैयार हुए.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t



