पांडुका रेज में दिखा बाघ के पंजे का निशान, ग्रामीणों ने सुबह-सुबह देखा जंगल का राजा, हाथियों संग बढ़ा रोमांच, वन विभाग ने गांवों में जारी किया हाई अलर्ट

Tiger's paw mark seen in Panduka Range, villagers saw the king of the jungle early in the morning, excitement increased with elephants, forest department issued high alert in villages

पांडुका रेज में दिखा बाघ के पंजे का निशान, ग्रामीणों ने सुबह-सुबह देखा जंगल का राजा, हाथियों संग बढ़ा रोमांच, वन विभाग ने गांवों में जारी किया हाई अलर्ट

गरियाबंद : गरियाबंद के पाण्डुका रेंज में बाघ की मौजूदगी नजर आने से क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया है. हालात को देखते हुए पाण्डुका वन विभाग ने दर्जन भर गांव में हाई अलर्ट जारी किया है.
मिली जानकारी के मुताबिक 9 सितंबर 2025 को पांडुका रेंज के नागझर जंगल में बाघ की मौजूदगी सामने आई है. क्षेत्र में कई जगह बाघ के पैरों के निशान देखे गए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि धमतरी जिले के सिंगपुर परिक्षेत्र से नदी पार कर बाघ पहुंचा है. क्षेत्र में पहले से ही दो हाथी मौजूद हैं. ऐसे में स्थानीय रहवासियों की चिंता बढ़ गई है.
ग्रामीणों की सूचना पर पांडुका रेंजर संतोष चौहान मौके पर पहुंचे. उन्होंने न सिर्फ बाघ के पैरों के ताजा निशान देखे. बल्कि इसकी आधिकारिक पुष्टि भी की. रेंजर ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले से दो हाथी लगातार विचरण कर रहे हैं. अब धमतरी जिले के सिंगपुर से एक बाघ पैरी नदी को पार कर यहां पहुंचा है.
जीपीएस कोऑर्डिनेट्स N 20.741597 और E 81.99682 पर बाघ देखा गया है. यह क्षेत्र पाडुका परिक्षेत्र के पोंड बिट के अंतर्गत आता है और वर्तमान में बाघ कक्ष क्रमांक 67 में विचरण कर रहा है.  बाघ की संख्या एक 1 नग है. जो लगातार जंगल से सटे गांवों की तरफ भी मूवमेंट कर रहा है.
महज कुछ दिन पहले ही उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के इलाके में भी बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई थी. यह साफ संकेत है कि गरियाबंद और धमतरी का पूरा जंगल बेल्ट बाघों की आवाजाही का प्रमुख कॉरिडोर बनता जा रहा है.
नागझर के ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करने से पहले अब उन्हें चारों ओर निगाहें दौड़ानी पड़ रही हैं. हाथियों का झुंड और बाघ की मौजूदगी ने गांववालों की दिनचर्या बदल दी है.
हाई अलर्ट वाले गांव
???????? टोइयामुडा, गाहदर, बारुका
अलर्ट वाले गांव
???????? नागझर, टोइयामुडा, राचरडेरा, विजयनगर, खरखरा, दिवना, तौरेगा, सांकरा, कुसुमपानी, तालेसर, गायडबरी, हरदी, कासरबाय

वन विभाग ने भी निगरानी तेज कर दी है. वन विभाग ने इन सभी गांवों के लोगों से अपील किया कि वे जंगल की तरफ अकेले न जाएं और पशुओं को चराने के लिए भी समूह में ही ले जाएं. रात के समय जंगल किनारे आवाजाही पूरी तरह से टालें. विभाग ने यह भी कहा है कि ग्रामीण एक-दूसरे को सतर्क करें. और बाघ की लोकेशन की खबर फौरन वन विभाग को दें.
मैं बाघों का रिसर्च करता हु और बाघों के संरक्षण संवर्धन के लिए मैं 10 साल से वन विभाग के अधिकारियों से लड़ रहा हु.| वन विभाग के सारे अधिकारी केवल भ्रस्ट्राचार करने में लगे रहे बाघों के संरक्षण संवर्धन के लिए कार्य नहीं किये. IFS वरुण जैन ने बाघों के संरक्षण संवर्धन के लिए 03 साल कार्य किया और वरुण जैन के प्रयास से अब 4 बाघ उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के आसपास मंडरा रहे है. बाघों के संरक्षण संवर्धन के लिए ध्यान दिये जाने पर बाघ स्थायी रूप से यहाँ रहने लगेंगे – तीव कुमार सोनी ( पत्रकार एवं रिसर्चर ), मैनपुर, जिला गरियाबंद (छ.ग.)
 पिछले कुछ महीनों से गरियाबंद जिले में हाथियों की मौजूदगी के साथ-साथ अब बाघ की सक्रियता भी ग्रामीणों के लिए खतरे का संकेत है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पांडुका का जंगल हाथी और बाघ की दोस्ती का गवाह बनेगा या फिर दोनों दिग्गज आमने-सामने आएंगे. फिलहाल पूरा इलाका वन्यजीव सफारी जैसा नजर आ रहा है. और ग्रामीणों की धड़कनें हर दिन तेज हो रही हैं.
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