थाना प्रभारी पर विकलांग से मारपीट का आरोप, CCTV फुटेज के साथ SP से शिकायत, दिव्यांग व्यापारी को इंसाफ की जगह मिला सॉरी

Station House Officer accused of assaulting a disabled shopkeeper, complaint filed with SP with CCTV footage, serious questions raised, demand for investigation

थाना प्रभारी पर विकलांग से मारपीट का आरोप, CCTV फुटेज के साथ SP से शिकायत, दिव्यांग व्यापारी को इंसाफ की जगह मिला सॉरी

बिलासपुर : प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. आरोप है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की नजरों में ‘हीरो’ बनने की होड़ में सिविल लाइन थाना प्रभारी ने मानवता की सारी सीमाएं लांघते हुए एक दिव्यांग होटल व्यापारी के साथ मारपीट की. जब पीड़ित ने इंसाफ की गुहार लगाई तो कार्रवाई के बजाय सिर्फ “सॉरी” कहकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया. थ मामला बीती रात सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है.
मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय नगर स्थित शाहनूर बिरयानी सेंटर होटल का संचालक मोहम्मद नफीस अपनी दुकान चला रहा था. रात करीब 12 बजने में करीब 10 मिनट बाकी थे. उस समय आसपास की अन्य होटल और दुकानें भी खुली हुई थीं. तभी थाना प्रभारी सुम्मत राम साहू अपने दल-बल के साथ गश्त करते हुए वहां पहुंचे.
आरोप है कि उन्होंने उसे अपशब्द कहे और शारीरिक रुप से प्रताड़ित किया. दिव्यांग व्यापारी को धमकाते हुए उसकी पिटाई कर दी. मारपीट से आहत व्यापारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से मिलकर इंसाफ की गुहार लगाई. और इस मामले का वीडियो और लिखित शिकायत भी मीडिया को उपलब्ध करवाया.
पीड़ित को उम्मीद थी कि जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ जरुर कड़ी कार्रवाई होगी. लेकिन हुआ इसके उलट... विभागीय सूत्रों के मुताबिक मामला दबाने की कोशिशें शुरु हो गईं. बाद में थाना प्रभारी ने एसएसपी के सामने ही दिव्यांग व्यापारी से माफ़ी मांग ली. और अपनी हरकत पर शर्मिंदगी जताई.
इसी “माफी” के साथ पूरे मामले को खत्म मान लिया गया. होटल संचालक से मिली जानकारी के मुताबिक इसके लिए उसने बाकायदा अपने साथ की है गाली-गलौज, अभद्रता और मारपीट की शिकायत लिखित में बनाकर सिविल लाइन प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग का आवेदन भी बनाया हुआ था. बातचीत में होटल संचालक ने यह भी साफ़ किया कि उसे होटल संचालन की अनुमति रात 12 बजे तक मिली हुई है. उसके बाद भी यह कृत्य उसके साथ किया गया. फिलहाल दिव्यांग शिकायतकर्ता ने सॉरी शब्द सुनने के बाद फिलहाल शिकायत वापिस ले ली है.
इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एक दिव्यांग के सम्मान और अधिकारों की कीमत महज एक सॉरी भर है? रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे व्यापारी के साथ हुई इस बर्बरता पर पुलिस महकमे का रवैया आम लोगों में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है. नागरिकों का कहना है कि अगर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस की छवि और ज्यादा धूमिल होगी. 
पीड़ित के मुताबिक यह पूरी घटना न सिर्फ अमानवीय है बल्कि कानून और संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है. दुकानदार का कहना है कि वह अपनी आजीविका के लिए दुकान चलाता है और इस तरह की पुलिस कार्रवाई ने उसे मानसिक और शारीरिक दोनों रुप से तोड़ दिया है. मारपीट की बल्कि जातिसूचक और अपशब्दों का प्रयोग कर उसका अपमान किया. पीड़ित के मुताबिक जब उसने इसका विरोध किया तो उसे और ज्यादा धमकाया गया. इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. और अन्य दुकानदार भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. दुकानदार का दावा है कि फुटेज में साफ नजर आ रहा है कि किस तरह उसके साथ बल प्रयोग किया गया.
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में आक्रोश है. सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना की निंदा की है. और निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
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