अंधविश्वास बना मौत की वजह, पीलिया से परेशान अधेड़ ने काटा अपना गला, झाड़-फूंक से बिगड़ी हालत, हॉस्पिटल में इलाज के दौरान चली गई जान

Superstition became the cause of death, a middle-aged man suffering from jaundice slit his throat, his condition worsened due to witchcraft, and he died during treatment in the hospital.

अंधविश्वास बना मौत की वजह, पीलिया से परेशान अधेड़ ने काटा अपना गला, झाड़-फूंक से बिगड़ी हालत, हॉस्पिटल में इलाज के दौरान चली गई जान

सरगुजा : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला में अंधविश्वास और समय पर इलाज न मिलने का एक बेहद दुखद मामला सामने आया है. एक हफ्ते से पीलिया से पीड़ित अधेड़ व्यक्ति का परिजन डॉक्टर से इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक कराते रहे. लगातार बिगड़ती हालत और बीमारी से परेशान होकर अधेड़ ने चाकू से अपना गला काट लिया. गंभीर रुप से घायल व्यक्ति की इलाज के दौरान अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में मौत हो गई. मृतक की पहचान अबू चंद यादव के रुप में हुई है. जो मूल रुप से धरमजयगढ़ का निवासी था.
मिली जानकारी के मुताबिक यगढ़ जिले के धरमजयगढ़ निवासी अबू चंद यादव उम्र 45 साल पिछले करीब दो साल से अपनी बड़ी बहन के घर पत्थलगांव में रह रहा था. करीब एक हफ्ते पहले उसे पीलिया होने की शिकायत हुई थी. परिजनों ने चिकित्सकीय इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक और घरेलू टोटकों का सहारा लिया.
परिजनों का कहना है कि झाड़-फूंक कराने के बावजूद अबू चंद यादव की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी. कमजोरी बढ़ने, शारीरिक कष्ट और बीमारी से मानसिक रुप से परेशान होकर उसने रविवार को चाकू से अपना गला काट लिया. घटना के बाद उसके गले से ज्यादा खून बहने लगा. जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई. घटना के बाद परिजन उसे इलाज के लिए पत्थलगांव अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रेफर कर दिया. अंबिकापुर में डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की. लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
चिकित्सकों के मुताबिक गले की नस कटने से ज्यादा रक्तस्राव हुआ. जो उसकी मौत का असल वजह बना. घटना की खबर मिलने पर पुलिस ने मामले की जांच शुरु की. पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है.
पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज किए हैं. परिजनों ने आशंका जताई है कि पीलिया से परेशान होकर और लंबे समय तक राहत न मिलने की वजह से ही अबू चंद यादव ने यह आत्मघाती कदम उठाया.
डॉक्टरों ने बताया कि पीलिया कोई रहस्यमय बीमारी नहीं. बल्कि लिवर से जुड़ा संक्रमण है. यह आमतौर पर हेपेटाइटिस ए या हेपेटाइटिस ई वायरस की वजह से होता है. जो दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलता है. समय पर जांच और सही चिकित्सा उपचार से पीलिया पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरगुजा और आसपास के इलाकों में आज भी पीलिया जैसी बीमारियों में झाड़-फूंक कराने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है. यह पूरी तरह अंधविश्वास है और इससे मरीज की हालत और नाजुक हो जाती है. कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है.
यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है. बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है कि बीमारी की हालत में अंधविश्वास छोड़कर वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार को प्राथमिकता देना ही जीवन बचाने का सही रास्ता है.
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