फिंगेश्वर का कृषि युद्ध, आज से अनिश्चितकालीन धरना शुरु, प्रशासन के किरवई प्रेम पर भड़के शहरवासी, चक्काजाम और भूख हड़ताल की चेतावनी
Fingeshwar's agricultural war: An indefinite sit-in protest begins today; residents furious over the administration's love for agriculture, warning of road blockades and hunger strikes.
गरियाबंद/फिंगेश्वर : गरियाबंद कहते हैं कि सरकारी फाइलें जब चलती हैं तो अक्सर रास्ता भटक जाती हैं फिंगेश्वर में भी कुछ ऐसा ही हुआ है. मांग थी फिंगेश्वर में कृषि महाविद्यालय भवन की लेकिन प्रशासन की मेहरबानी किरवई पर बरस गई इस लोकेशन शिफ्टिंग के विरोध में आज से फिंगेश्वर की जनता ने नगर विकास सेवा संघर्ष समिति के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का बिगुल फूंक दिया है.
याद दिला दें कि यह वही मांग है जिसे लेकर पिछले एक साल से फिंगेश्वर के लोग भजन से लेकर ज्ञापन तक सब आजमा चुके हैं. लेकिन प्रशासन ने ऐसी गुगली फेंकी कि भवन की जगह फिंगेश्वर से खिसक कर किरवई जा पहुंची. अब इसी भूमि आबंटन के खिलाफ नगर विकास सेवा संघर्ष समिति ने फिंगेश्वर में अनिश्चितकालीन धरना शुरु कर दिया है.
फिंगेश्वर का कृषि युद्ध गरियाबंद जिला के फिंगेश्वर में कृषि महाविद्यालय भवन को लेकर आज से अनिश्चितकालीन धरना शुरु हो गया है. किरवई में भूमि आबंटन आदेश को रद्द करने की मांग कर रहे शहरवासियों ने अब चक्काजाम और भूख हड़ताल की चेतावनी दी है.
फिंगेश्वर की जनता का कहना है कि जब मांग फिंगेश्वर की थी. राजिम विधायक जी ने विधानसभा में दहाड़ फिंगेश्वर के लिए मारी थी तो फिर कलेक्टर के सरकारी आदेश में किरवई का नाम कैसे छप गया? इसे कहते हैं मांगा था आम, और थमा दिया गया इमली.. पिछले एक साल से शांति से अपनी मांग रख रहे शहरवासियों का सब्र आज टूट गया.
स्थानीय जानों का कहना है कि जब विधायक जी ने खुद विधानसभा में फिंगेश्वर के लिए आवाज उठाई थी तो फिर कलेक्टर ने किरवई में भूमि आबंटन का यह चमत्कारी आदेश कहां से टपक पड़ा.. क्या प्रशासन को फिंगेश्वर के नक्शे में कॉलेज के लिए जगह नहीं मिली या फिर यह कोई नया राजनीतिक गणित है?
अनिश्चितकालीन मोर्चा आज दोपहर शुरू हो गया और प्रदर्शनकारी इस बार आर पार का मूड में हैं. साफ संदेश है जब तक आदेश रद्द नहीं तब तक घर वापसी नहीं... आदेश रद्द करने की जिद शहरवासियों की एक ही मांग है किरवई के भूमि आबंटन आदेश को तत्काल कचरे के डिब्बे में डाला जाए और फिंगेश्वर में ही कॉलेज बनाया जाए. चेतावनी का डोज यह तो बस शुरुआत है. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दिया है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो अगला कदम चक्काजाम और भूख हड़ताल होगा यानी अब प्रशासन की नींद उड़ने वाली है.
प्रशासन की फाइलें किरवई की तरफ मुड़ गईं तो क्या हुआ फिंगेश्वर की जनता ने भी अब सड़क की तरफ रुख कर लिया है. अब देखना है कि साहब की कलम तेज चलती है या जनता का प्रदर्शन....
फिंगेश्वर की जनता पिछले एक साल से उम्मीद लगाए बैठी थी कि उनके शहर में शिक्षा का नया मंदिर कृषि महाविद्यालय बनेगा. लेकिन जब आदेश आया तो पता चला कि मंदिर कहीं और बन रहा है. अब शहरवासी इस डेस्टिनेशन चेंज को स्वीकार करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं.
सवाल यह है कि जब विधानसभा में गूँज फिंगेश्वर की थी तो आदेश किरवई का कैसे हो गया. इस रहस्यमयी बदलाव का जवाब जानने के लिए जब कलेक्टर भगवान दास उईके को फोन लगाया गया. तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.. साहब के फोन न उठाने से अब प्रशासन का पक्ष हवा में लटका है. और जनता के मन में यह सवाल गहरा गया है कि क्या सिस्टम वाकई जनता को जवाब देना जरुरी नहीं समझता.
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