शाला प्रवेश उत्सव में भड़की विधायक, बैठक व्यवस्था पर नाराज होकर हटाया नेमप्लेट, अधिकारियों को लगाई फटकार, बच्चों का उत्सव या वीआईपी प्रोटोकॉल?
MLA flares up at the school enrollment festival; upset over the seating arrangement, she removes the nameplate and reprimands officials—is this a celebration for children or a matter of VIP protocol?
बलरामपुर : बलरामपुर जिले के राजपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव के दौरान मंच व्यवस्था को लेकर विवाद की स्थिति बन गई. कार्यक्रम में पहुंचीं भाजपा की विधायक उदेश्वरी पैकरा ने बैठक व्यवस्था और नेमप्लेट को लेकर नाराजगी जताते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई.
मंच के सामने रखी नेमप्लेट हटाई
कार्यक्रम के दौरान विधायक उदेश्वरी पैकरा ने मंच के सामने रखी नेमप्लेट को खुद उठाकर किनारे रख दिया. बताया जा रहा है कि मंच पर अतिथियों के बैठने की व्यवस्था को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई.
बैठक व्यवस्था पर जताई नाराजगी
विधायक ने मंच पर वरिष्ठ और कनिष्ठ अतिथियों की बैठक व्यवस्था को अनुचित बताते हुए नाराजगी व्यक्त की. उनका कहना था कि प्रोटोकॉल के अनुरूप मंच की व्यवस्था की जानी चाहिए थी.
भाजपा पदाधिकारियों ने भी उठाया मुद्दा
कार्यक्रम में मौजूद भाजपा के जिला उपाध्यक्ष संजय सिंह, कोषाध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने भी मंच व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया। उन्होंने भी आयोजन की व्यवस्था पर सवाल उठाए.
शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लगाई फटकार
मंच व्यवस्था को लेकर विधायक ने सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को फटकार लगाई और भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बनने के निर्देश दिए. फिलहाल विधायक ने सहायक खंड शिक्षा अधिकारी को समझाइश देते हुए पार्टी पदाधिकारियों को मना लिया है लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले हाई वोल्टेज ड्रामे ने जनमानस के बीच चर्चा के लिये अपनी जगह बना ही ली.
जिस कार्यक्रम का केंद्र बच्चों का उत्साहवर्धन होना चाहिए था. वहां चर्चा मंच की कुर्सियों और प्रोटोकॉल की होने लगी. इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बच्चों के भविष्य से जुड़े ऐसे आयोजनों में प्रोटोकॉल का विवाद हावी होना चाहिए? क्या छोटे कार्यकर्ता और स्थानीय पदाधिकारी वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच साझा नहीं कर सकते? और क्या ऐसे आयोजनों में बच्चों से ज्यादा प्राथमिकता नेताओं की बैठने की व्यवस्था को मिलनी चाहिए?
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाना होता है. लेकिन जब मंच पर विवाद होता है तो उसका नकारात्मक प्रभाव बच्चों और अभिभावकों पर पड़ता है. कई अभिभावकों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नेताओं को ऐसे मौके पर संयम और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. घटना के संबंध में विधायक और शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है.
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