राजिम कुंभ कल्प मेला शुभारंभ पर लीला रॉक बैंड मुंबई की भक्तिमय प्रस्तुति, मुख्य मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

A devotional performance by Leela Rock Band, Mumbai, marked the opening of the Rajim Kumbh Kalpa Mela.

राजिम कुंभ कल्प मेला शुभारंभ पर लीला रॉक बैंड मुंबई की भक्तिमय प्रस्तुति, मुख्य मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

गरियाबंद : राजिम कुंभ कल्प मेला में मुख्य मंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में मुंबई की प्रसिद्ध लीला रॉक बैंड ने अपनी शानदार और भक्तिमय प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. धार्मिक गीतों को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत करते हुए बैंड ने ऐसा समां बांधा कि पूरा मेला परिसर भक्ति और उल्लास से गूंज उठा. इस कार्यक्रम के दौरान जैसे ही मंच से भक्ति संगीत की सुरलहरियां बिखरीं, दर्शक स्वतः ही झूमने और तालियां बजाने पर मजबूर हो गए. युवा वर्ग के साथ-साथ बुजुर्ग और महिलाएं भी इस संगीतमय प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आए.
कार्यक्रम के समापन पर दर्शकों ने कलाकारों का जोरदार तालियों से स्वागत किया. मुख्य मंच पर चिरंजीवी हलधर द्वारा रिकॉर्डिंग गाने पर कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम की अगली कड़ी में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार दिनेश जांगड़े ने मंच पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पंथी नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति दी. उनके हैरतअंगेज करतबों और अनुशासित नृत्य शैली को देखकर दर्शक आनंदित हो उठे.
इसके बाद छुरा से आईं प्रसिद्ध पंडवानी गायिका खेमिन बाई निषाद ने महाभारत के 18 पर्वों का ओजपूर्ण शैली में बखान किया। उनकी सशक्त आवाज और भावनात्मक प्रस्तुति के दौरान पूरा पंडाल शांत होकर कथा श्रवण में लीन नजर आया. सभी कलाकारों का सम्मान जिला पंचायत के सीईओ श्री प्रखर चंद्राकर,  सहित प्रशासनिक अधिकारियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्मृति चिन्ह भेंटकर किया. इस दौरान मंच का संचालन निरंजन साहू एवं किशोर निर्मलकर द्वारा किया गया.
पंथी, सुवा, पंडवानी, जसगीत, रामायण, सतनाम भजन, देशभक्ति और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों से मेला परिसर दिनभर गुंजायमान रहा। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक पूर्व महोत्सव स्थल के नदी मंच और नया मेला स्थल के स्थानीय मंच पर कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया.
धरसींवा की यामिनी साहू ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी. वहीं राजिम के भोले साहू ने जसगीत के माध्यम से माता के भजनों को प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना बटोरी. परसदाजोशी के श्यामरतन साहू ने रामायण के बालकाण्ड पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामचरितमानस शिक्षा, संस्कार और जीवन मूल्यों को समझने का सशक्त माध्यम है. बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए रामायण पढ़ने और सुनने की परंपरा आवश्यक है. बकली के दुर्गेश कुमार भारती ने सतनाम भजन प्रस्तुत किया. जबकि मालगांव (गरियाबंद) के वामन नेताम ने सुंदरकाण्ड की प्रभावशाली व्याख्या की.
नवीन मेला मैदान चौबेबांधा स्थित स्थानीय मंच पर धौराभाठा के लखनलाल यादव ने पंडवानी के माध्यम से महाभारत के प्रसंग सुनाए। सुंदरकेरा के ओमप्रकाश ने जगराता में माता के भजनों की प्रस्तुति दी. चौबेबांधा के आत्मानंद चेलक की पंथी प्रस्तुति और गणेशपुर की मुस्कान मिश्रा के लोकनृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया. राजिम के भारत धीवर की फाग मंडली, गंजईपुरी के ललित धु्रव का सुगम गायन और सड़कपरसुली की टीना बेला के सुवा नृत्य ने कार्यक्रम को और रंगीन बना दिया. बारबाहरा के लेखपाल साहू ने लोककला मंच पर छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी. नवापारा के बंटी प्रजापति ने भजन संध्या की शानदान प्रस्तुति दी. कार्यक्रम का संचालन निरंजन साहू एवं किशोर निर्मलकर ने किया.
3 फरवरी को महोत्सव स्थल के नदी मंच पर मानस गान वीरेंद्र ठाकुर कपसीडीह, सतनाम भजन पन्ना लाल कुर्रे, बंगोली-करुद, रामधुनी अन्नू साहू लफंदी, रामायण ताम्रध्वज साहू, खुरसेंगा तथा रामधुनी द्रौपदी सिन्हा धमतरी की प्रस्तुतियां होंगी. इसी प्रकार नया मेला स्थल के स्थानीय मंच पर पंडवानी विष्णु प्रसाद साहू परसठी, जगराता गोपाल प्रसाद साहू परसठी एवं जगराता गोपाल चक्रधारी आरंग अपनी छाप छोंड़ेंगे. लोकनृत्य देविका नवापारा-राजिम, जस झांकी सकुन साहू, मांढर-रायपुर, सुगम गायन अजय साहू, अछोला एवं सतनाम भजन बासीन लोककला मंच मोहित सिन्हा की प्रस्तुतियां होंगी.
3 फरवरी को महोत्सव स्थल के नदी मंच पर मानस गान वीरेंद्र ठाकुर कपसीडीह, सतनाम भजन पन्ना लाल कुर्रे, बंगोली-करूद, रामधुनी अन्नू साहू लफंदी, रामायण ताम्रध्वज साहू, खुरसेंगा तथा रामधुनी द्रौपदी सिन्हा धमतरी की प्रस्तुतियां होंगी. इसी प्रकार नया मेला स्थल के स्थानीय मंच पर पंडवानी विष्णु प्रसाद साहू परसठी, जगराता गोपाल प्रसाद साहू परसठी एवं जगराता गोपाल चक्रधारी आरंग अपनी छाप छोंड़ेंगे। लोकनृत्य देविका नवापारा-राजिम, जस झांकी सकुन साहू, मांढर-रायपुर, सुगम गायन अजय साहू, अछोला एवं सतनाम भजन बासीन लोककला मंच मोहित सिन्हा की प्रस्तुतियां होंगी.
मुख्य मंच पर छैला बाबू आहि... की होगी रंगारंग प्रस्तुति
मुख्य मंच पर कत्थक नृत्य में आरोही तिवारी (दुर्ग) और नित्या शुक्ला (बिलासपुर), ओड़िसी नृत्य में भूमि सुता मिश्रा (रायपुर) तथा लोकमंच में हिम्मत सिन्हा (छुईहा) अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे.
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राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 में इस बार सांस्कृतिक मंच पर छत्तीसगढ़ के नामी कलाकारों की प्रस्तुतियां न होने से दर्शकों की संख्या नगण्य बनी हुई है. हालत यह है कि ज्यादातर समय पूरा दर्शक दीर्घा खाली पड़ा रहता है. अब तक पूरे कार्यक्रमों की लिस्ट भी सार्वजनिक नहीं किए जाने से लोगों में उत्सुकता नहीं बन पा रही है.
नगरवासियों का कहना है कि जब अच्छे और आकर्षक कार्यक्रम नहीं होंगे तो लोग मेला क्षेत्र तक आने की प्रेरणा ही नहीं महसूस करेंगे। इस बार मेला शहर से काफी दूरी पर लगाया गया है. मेला क्षेत्र भी पहले की तुलना में बहुत बड़ा हो गया है. ऐसे में लोगों को आने-जाने में ज्यादा समय और ऊर्जा लग रही है.
लोगों का कहना है कि मेला घूमकर थक जाने के बाद वे सांस्कृतिक मंच पर बैठकर मनोरंजन के जरिए अपनी थकान मिटाने की उम्मीद करते हैं. लेकिन मंच पर चल रहे फीके आयोजनों के कारण उन्हें निराशा हाथ लग रही है.
नगर के प्रबुद्धजनों और व्यापारियों का मानना है कि अगर छत्तीसगढ़ के नामी लोक कलाकारों, सांस्कृतिक दलों और प्रसिद्ध गायकों की प्रस्तुतियां होतीं और कार्यक्रमों की पूरी लिस्ट समय रहते जारी की जाती तो मेले की रौनक जरुर बढ़ती.
अब जरूरत इस बात की है कि मेला प्रशासन और आयोजन समिति जल्द से जल्द आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की घोषणा करे. ताकि दर्शकों की उपस्थिति बढ़े और राजिम कुंभ कल्प मेले की खोई हुई चमक फिर से लौट सके.
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