टोकन न मिलने से किसान ने किया आत्महत्या का प्रयास, इधर राजिम कृषि उपज मंडी में अन्नदाता की मौत, मंडी परिसर में मचा हड़कंप

Farmer attempts suicide due to not receiving a token, meanwhile, a farmer dies at Rajim Agricultural Produce Market, causing panic in the market premises

टोकन न मिलने से किसान ने किया आत्महत्या का प्रयास, इधर राजिम कृषि उपज मंडी में अन्नदाता की मौत, मंडी परिसर में मचा हड़कंप

टोकन न मिलने से किसान ने किया आत्महत्या का प्रयास

रायगढ़/खरसिया : छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के कटघरे में खड़ी है. खरसिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बकेली से सामने आई यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती है, बल्कि अन्नदाता की टूटती उम्मीदों और बढ़ते मानसिक तनाव की भयावह तस्वीर भी पेश करती है. धान खरीदी का टोकन समय पर नहीं मिलने से मानसिक अवसाद में आए किसान कृष्ण कुमार गबेल ने आत्महत्या का प्रयास किया। गनीमत रही कि परिजनों ने समय रहते उन्हें बचा लिया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में इलाज जारी है.
यह घटना कोई एकल मामला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की देन है. जो कागजों में तो किसान हितैषी दिखती है. लेकिन जमीनी हकीकत में किसानों को दर-दर भटकने पर मजबूर कर रही है. ग्राम बकेली सहित आसपास के गांवों में धान खरीदी के नाम पर टोकन प्रणाली पूरी तरह चरमरा चुकी है. किसानों का आरोप है कि दिन-दिन भर समिति के चक्कर काटने, पोर्टल खुलने का इंतजार करने और बार-बार आवेदन करने के बावजूद उन्हें टोकन नहीं मिल पा रहा है.
कृष्ण कुमार गबेल भी इन्हीं परेशान किसानों में से एक थे. सीमित संसाधनों के बीच कर्ज लेकर खेती करने वाले इस किसान के सामने सबसे बड़ी उम्मीद यही थी कि धान समय पर बिकेगा और घर-गृहस्थी का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और पुराने कर्ज चुकाए जा सकेंगे. लेकिन जब हफ्तों बीत गए, टोकन नहीं आया. धान घर और खलिहान में पड़ा रहा और खर्च बढ़ता चला गया, तो मानसिक दबाव असहनीय होता चला गया. इसी दबाव ने आखिरकार उन्हें यह खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.
घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में सनसनी फैल गई. ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिला. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते परिजन मौके पर नहीं पहुंचते तो आज एक अन्नदाता इस सिस्टम की भेंट चढ़ चुका होता. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले धान खरीदी में दिक्कतें तो होती थीं. लेकिन इतनी अमानवीय स्थिति कभी नहीं देखी गई. आज किसान को अपने ही अनाज को बेचने के लिए आत्महत्या तक सोचनी पड़ रही है.
स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया कि टोकन वितरण में भारी गड़बड़ी है. कुछ लोगों को आसानी से टोकन मिल रहा है तो कई किसानों को बार-बार सिस्टम फेल होने, सर्वर डाउन होने और कोटा खत्म होने का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा है. इससे किसानों में असमानता और अन्याय की भावना पनप रही है. किसानों का कहना है कि धान देर से बिकने पर नमी बढ़ने, भंडारण की समस्या और संभावित कटौती का डर अलग से सताता है.
इस गंभीर मामले पर राजनीति भी गरमा गई है. पूर्व मंत्री एवं खरसिया विधायक उमेश पटेल ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि “सांय-सांय सरकार में किसान त्राहि-त्राहि कर रहा है. धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और उसकी कीमत अन्नदाता अपनी जान देकर चुका रहा है.” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है. तो फिर ऐसे हालात क्यों बन रहे हैं कि किसान को आत्महत्या का प्रयास करना पड़े?
किसान संगठनों ने भी इस घटना को चेतावनी करार दिया है. उनका कहना है कि अगर धान खरीदी व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं. संगठनों ने मांग की है कि टोकन प्रणाली को सरल किया जाए. अतिरिक्त खरीदी केंद्र खोले जाएं, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और पीड़ित किसान परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए.
वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. अधिकारियों का दावा है कि धान खरीदी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. लेकिन गांव के किसान प्रशासन के इन बयानों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे. उनका कहना है कि बयान बहुत सुने गए, अब जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए.
ग्राम बकेली की यह घटना पूरे जिले और प्रदेश के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गई है—क्या धान खरीदी व्यवस्था वाकई किसानों के लिए है, या फिर यह सिर्फ आंकड़ों और दावों तक सीमित रह गई है? एक अन्नदाता का आत्महत्या का प्रयास सिस्टम की असफलता का सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आया है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या फिर किसी और किसान की टूटती जिंदगी अगली सुर्खी बनेगी.
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राजिम कृषि उपज मंडी में अन्नदाता की मौत, मंडी परिसर में मचा हड़कंप

राजिम : राजिम कृषि उपज मंडी में एक हृदयविदारक घटना सामने आई. जहां एक किसान की अचानक हार्टअटैक से मौत हो गई. बताया जा रहा है कि किसान मंडी परिसर में धान के वर्तमान रेट की जानकारी लेने के लिए आया था. इस बीच उसकी तबीयत बिगड़ गई. घटना राजिम थाना क्षेत्र का है.
मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार दोपहर के समय मंडी परिसर में चहल-पहल बनी हुई थी. इसी दौरान ग्राम कोमा निवासी किसान राजाराम साहू उम्र 55 साल को अचानक सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और वे संतुलन खोकर वहीं गिर पड़े. आसपास मौजूद किसानों, व्यापारियों और मंडी कर्मचारियों ने उन्हें संभालने की कोशिश की. हालत नाजुक देख फौरन मंडी सचिव को खबर दी गई. जिन्होंने बिना देर किए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी.
किसान को आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है. घटना की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार कर आगे की प्रक्रिया शुरु कर दी है.
घटना की खबर फैलते ही मंडी परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। किसान की असामयिक मौत से मंडी में मौजूद अन्य किसानों और व्यापारियों में शोक की लहर दौड़ गई. कई किसानों ने बताया कि राजाराम साहू एक मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे. उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया.
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