वायनाड से उपचुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी वाड्रा, महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल और टीएस बाबा को मिली जिम्मेदारी
Priyanka Gandhi Vadra will contest by election from Wayanad former CM Bhupesh Baghel and TS Baba given responsibility for the upcoming assembly elections in Maharashtra
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तत्काल प्रभाव से एआईसीसी के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों (विभागवार) और राज्य चुनाव वरिष्ठ समन्वयकों की नियुक्ति की है. जिसमे भूपेश बघेल और टीएस सिंग देव का नाम शामिल है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुलाम अहमद मीर को जम्मू-कश्मीर का नया कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया है.
वायनाड से उपचुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी वाड्रा
दिल्ली : प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड संसदीय क्षेत्र से लोकसभा उपचुनाव लड़ेंगी. वहीं राम्या हरिदास और राहुल ममकूटथिल केरल विधानसभा उपचुनाव के लिए क्रमशः चेलाक्कारा और पलक्कड़ विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ेंगे.
आपको बता दें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत हासिल की थी. इसमें उत्तर प्रदेश की रायबरेली और केरल की वायनाड सीट शामिल थी. बाद में राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद यह सीट रिक्त थी. इस सीट से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा चुनाव लड़ेगी.
राजनीति में कब हुई एंट्री?
प्रियंका गांधी भले ही कभी चुनाव नहीं लड़ीं, लेकिन वो राजनीति में काफी पहले से सक्रिय हैं. प्रियंका गांधी ने 1999 में राजनीति में एंट्री ली थी, जब वो अपनी मां सोनिया गांधी के लिए चुनाव प्रचार करने उतरी थीं. इस दौरान उन्होंने पहली बार राजनीतिक मंच से बीजेपी उम्मीदवार अरुण नेहरु के खिलाफ प्रचार था. लेकिन इन 25 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ. जब प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ा हो. हालांकि उनके चुनाव लड़ने की कई बार चर्चा हुई. कांग्रेस समर्थक प्रियंका गांधी से यूपी में अपनी दादी और मां की विरासत को आगे बढ़ाने की आशा टिकाए हुए थे.
कांग्रेस के कई पदों को संभाला
प्रियंका गांधी अपनी सूझबूझ के लिए जानी जाती हैं. 2017 में यूपी विधानसभा में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन और सीट बंटवारे में प्रियंका गांधी ने बड़ी भूमिका निभाई. कांग्रेस ने यूपी चुनाव में 110 सीटों की मांग कर रही थी. जबकि अखिलेश यादव की पार्टी ने 100 सीटें देने की पेशकश की थी. जनवरी 2019 तक प्रियंका को पूर्वी यूपी में कांग्रेस का महासचिव बनाया गया था. जहां कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद सितंबर 2020 तक उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया था. हालांकि दिसंबर 2023 में संगठनात्मक फेरबदल में उनसे उत्तर प्रदेश का प्रभार छीन लिया गया. लेकिन वो पार्टी की महासचिव बनी रहीं.
वायनाड से चुनाव लड़ने का क्यों लिया फैसला?
प्रियंका गांधी वायनाड से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गई हैं. लेकिन ये बस इतनी सी कहानी नहीं है. दरअसल कांग्रेस दक्षिण भारत खासतौर पर केरल में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है. पार्टी कर्नाटक और तेलंगाना में सत्ता में है और अपनी सहयोगी डीएमके के साथ तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज है. उत्तर भारत के विपरीत जहां बीजेपी की पकड़ मजबूत है. वहीं कांग्रेस दक्षिण में जीत हासिल करने की कोशिश में है.
पहली बार संसद में हो सकते हैं गांधी परिवार के तीन सदस्य
अगर प्रियंका गांधी वायनाड से जीतती हैं. जिसे कांग्रेस के लिए सुरक्षित सीट माना जाता है. तो यह पहली बार होगा जब नेहरु-गांधी परिवार के तीन सदस्य एक साथ संसद में होंगे. पहली बार राहुल और प्रियंका गांधी लोकसभा में और सोनिया गांधी राज्यसभा में होंगी.
सबसे बड़ा सवाल है कि बीजेपी किसको मैदान में उनके ख़िलाफ़ उतारती है? क्योंकि 2024 में बीजेपी को एक लाख 41 हज़ार ही वोट मिले थे और सीपीआई की ऐनी राजा को 2 लाख 74 हज़ार वोट मिले थे. क्या इस बार भी सीपीआई किसी महिला उम्मीदवार, जैसे ऐनी राजा को ही टिकट देती है या कोई नया उम्मीदवार उतारेगी? उधर सबकी निगाहें बीजेपी पर होंगी की क्या वो किसी बड़े चेहरे को वायनाड में लाती है? क्या स्मृति ईरानी को बीजेपी यहां लड़ा सकती है? वरना वायनाड का यह उपचुनाव प्रियंका गांधी के चुनावी राजनीति में प्रवेश करने के लिए जाना जाएगा. साथ में इसके लिए भी कि क्या वो राहुल गांधी के जीत के अंतर को पार कर एक बड़ी जीत दर्ज कर पाती हैं या नहीं.
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