नई आबकारी नीति के खिलाफ प्रदर्शन, प्लास्टिक बोतल में शराब बिक्री का विरोध, कैंसर होने की बात पर बोले मंत्री, अनुभव नहीं पहले लूंगा फिर बताऊंगा

Protests against the new excise policy, opposition to the sale of liquor in plastic bottles, and the minister, on the issue of cancer, said, "I will first gather experience and then tell you."

नई आबकारी नीति के खिलाफ प्रदर्शन, प्लास्टिक बोतल में शराब बिक्री का विरोध, कैंसर होने की बात पर बोले मंत्री, अनुभव नहीं पहले लूंगा फिर बताऊंगा

दुर्ग/भिलाई : छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति के कारण कई लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है. नई आबकारी नीति के तहत शराब बेचने के लिए अगले वित्तीय वर्ष में कांच के बजाय प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसे लेकर बॉटलिंग का काम करने वाले लोगों के बीच आक्रोश है. उन्होंने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है.
इस फैसले के विरोध में सोमवार को सैकड़ों लोग दुर्ग कलेक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी तादाद में दिव्यांगजन भी शामिल हुए. जिन्होंने “प्लास्टिक हटाओ, देश बचाओ” जैसे नारे लगाए. बोतल कारोबार से जुड़े श्रमिकों और व्यापारियों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल न सिर्फ लाखों लोगों के रोजगार को खत्म करेगा. बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करेगा.
वहीं जब इस बारे में प्रदेश के जिम्मेदार मंत्री से सवाल पूछा गया तो उन्होंने ऐसा बयान दिया जिससे सुनने के बाद आपको समझ में नहीं आएगा कि हंसे या गंभीर हो. मंत्री जी ने नई आबकारी नीति के तहत प्लास्टिक की बोतल में शराब बेचने को लेकर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने के खतरे पर अजीब जवाब दे दिया. मंत्री जी का कहना था कि उन्हें इस बात का अनुभव नहीं है. जब अनुभव लूंगा तो बताएंगे.
मंत्री रामविचार नेताम के इस बयान से आपको अंदाजा लग ही गया होगा कि मंत्री जी को जनता की सेहत से कितना सरोकार है. मंत्री जी मान लिया कि आपको अनुभव बिल्कुल भी नहीं है कि कैंसर कांच की बोतल में रखी शराब पीने से होता है या प्लास्टिक की बोतल से. लेकिन महोदय कम से कम आपको इतना तो पता होगा कि प्रदेश में हर रोज लाखों शराब की बोतलें बिक जाती हैं. अब अगर ये शराब प्लास्टिक की बोतलों में बिकेगी तो लाखों प्लास्टिक बोतल का कचरा का निपटारा करने के लिए आपकी सरकार ने क्या प्लान तैयार किया है. चलिए अगर प्लान नहीं भी बनाया है तो कोई बात नहीं. कम से कम शराब की प्लास्टिक बोतलों की व्यवस्था कैसे होगी ये तो जरुर सोचा होगा. तो जो भी आपकी सरकार ने सोचा है, वो जनता के बीच में जरुर रखें. वैसे मंत्री जी को भले ही शराब की बोतल और शराब के बारे में जानकारी नहीं हो लेकिन खाली बोतलों से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने वालों के लिए ये आदेश किसी वज्र प्रहार से कम नहीं है.
बॉटलिंग कारोबारी मनोज मालिक ने कहा कि लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे. छोटे से लेकर बड़े तक इस काम में लगे हुए हैं. बॉटलिंग प्लांट से लेकर कॉलोनियों तक लोग हर जगह से शराब की बोतलों को इकट्ठा करते हैं. हर कोई एक दूसरे से जुड़ा हुआ है. लाखों लोगों को दो पैसे मिलते हैं. लेकिन सरकार के फैसले के बाद ये सभी लोग बिना काम के हो जाएंगे-
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने कैबिनेट की बैठक में हाल ही में आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी दी है. इसमें एक बड़ा बदलाव किया गया है. इसके तहत शराब की बोतलें कांच की बजाए अब प्लास्टिक की बोतलों में बिकेंगी. ये नियम अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगा. सभी शराब निर्माता कंपनियों को अपने उत्पाद प्लास्टिक पैकिंग में ही सप्लाई करने का निर्देश दिया गया है. लेकिन इस फैसले का विरोध शुरु हो गया है. एसोसिऐशन से जुड़े लोगों के मुताबिक प्लास्टिक बोतलों में देशी विदेशी मदिरा के चलन से बॉटलिंग प्लांट में काम करने वाले करीब 10 लाख से ज्यादा लोगों का रोजगार छीन जाएगा. वहीं सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व भी नुकसान होगा. इससे हर महीने 10 करोड़ खाली बोतलें शहर में कचरा के तौर पर निकलेंगी. इनका निष्पादन नहीं होने से प्रदूषण भी बढ़ेगा.
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