रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को अदालत ने लगाई जबरदस्त फटकार, कहा- हद पार मत कीजिए, अशोभनीय भाषा का प्रयोग गलत
Republic TV editor-in-chief Arnab Goswami was severely reprimanded by the court, saying, "Don't cross the limits, use of indecent language is wrong."
नई दिल्ली : बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को न्यूज़ चैनल रिपब्लिक टीवी और उसके प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को निर्देश दिया कि वे उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच से जुड़ी खबरें दिखाते समय अपमानजनक आलोचना’ करने से बचें.
लाइव लॉ की ख़बर के मुताबिक जस्टिस मिलिंद जाधव की अध्यक्षता वाली एकल-न्यायाधीश पीठ ने अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को मौखिक रुप से निर्देश दिया कि वे अपनी बयानबाजी को संयमित रखें और ऐसी खबरों को अतिशयोक्तिपूर्ण शीर्षक न दें, जिन्हें किसी व्यक्ति पर हमला माना जा सकता है.
पीठ ने कहा, ‘कृपया विशेषणों का प्रयोग किए बिना या किसी को अपमानित किए बिना खबरें चलाएं. आप सालों से इस क्षेत्र में हैं. आप सभी घोटालों आदि से अवगत हैं.” उल्लेखनीय है कि अदालत अनिल अंबानी द्वारा रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई कर रही थी.
इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि रिपब्लिक टीवी और गोस्वामी ने अंबानी को उन कंपनियों से जोड़ा है. जिनकी स्थापना उन्होंने की थी, लेकिन अब उन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है- जैसे, रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड. ये मामले ईडी द्वारा चल रही उन जांचों से संबंधित हैं, जिनमें कथित तौर पर ऋण धोखाधड़ी का आरोप है.
अपनी याचिका में अंबानी ने कहा है कि ईडी की इन तीनों कंपनियों से जुड़ी कार्रवाई के बारे में रिपब्लिक टीवी पर लगातार कवरेज से उनकी प्रतिष्ठा को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंची है. उद्योगपति ने दावा किया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप भ्रामक हैं. क्योंकि उन्होंने नवंबर 2019 में आरकॉम के गैर-कार्यकारी निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया था और उसके बाद तीनों कंपनियों में कोई कार्यकारी या प्रबंधकीय भूमिका नहीं निभाई है.
उन्होंने आगे कहा कि गोस्वामी को यह बात पता थी, लेकिन फिर भी उन्होंने उन्हें इन मामलों से जोड़ना जारी रखा और उन्हें ‘वित्तीय घोटाले का मास्टरमाइंड, धोखेबाज, मनी लॉन्डरर और जालसाज’ बताया.
याचिका में कहा गया है, ‘इन आरोपों ने अपराध की झूठी धारणा पैदा कर दी है और याचिकाकर्ता को जनता की नफरत, उपहास और तिरस्कार का पात्र बना दिया है.’
याचिका में यह भी कहा गया है कि इससे अंबानी की प्रतिष्ठा और पेशेवर गरिमा को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंची है. याचिका में रिपब्लिक टीवी की मालिक कंपनी एआरजी आउटलायर, गोस्वामी और अन्य संबंधित संस्थाओं के खिलाफ अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई है.
वहीं, बुधवार को सुनवाई के दौरान गोस्वामी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने अपने शो में ‘सच्ची और निष्पक्ष टिप्पणी’ की थी।उन्होंने दावा किया कि कई न्यायिक अधिकारियों ने अपने आदेशों में इसी तरह की भाषा का प्रयोग किया है और कहा है कि अंबानी ‘वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ नहीं, बल्कि वित्तीय घोटालेबाज’ हैं.
हालांकि अंबानी का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता मयूर खांडेपारकर ने दावा किया कि समाचार चैनल ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में उनके मुवक्किल के खिलाफ ‘लक्षित अभियान’ चलाया था।उन्होंने उन उदाहरणों का हवाला दिया जिनमें अंबानी की तस्वीर चैनल पर ‘वित्तीय घोटालेबाज और जालसाज’ जैसे शब्दों के साथ प्रदर्शित की गई थी.
उच्च न्यायालय ने अंबानी के खिलाफ रिपब्लिक टीवी द्वारा की गई टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी कई तरह से व्याख्या की जा सकती है. न्यायालय ने कहा, ‘आप समाचार देने का अपना कर्तव्य निभा रहे हैं. जो ठीक है, लेकिन ‘अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है.’
गोस्वामी के शो में की गई टिप्पणियों को ‘अनुचित’ बताते हुए न्यायालय ने कहा कि चैनल को कुछ शब्दों का प्रयोग करने से बचना चाहिए और ‘संयम बरतना चाहिए.’
जस्टिस जाधव ने कहा, ‘मैं किसी भी मीडिया चैनल पर पाबंदी नहीं लगा रहा हूं. आखिर, जनता को जानने का अधिकार है. आज के समय में यह सबसे निष्पक्ष माध्यमों में से एक है. मैं बस इतना कह रहा हूं कि अपनी खबरें चलाएं और इस तरह की टिप्पणियों का सहारा न लें. आप अपनी खबरें जारी रखें. दरअसल, आपकी खबरें ही वो हैं जो पूरा देश जानना चाहता है. लेकिन अशोभनीय भाषा का प्रयोग न करें.”
अदालत ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश की ओर इशारा करते हुए अधिवक्ता जेठमलानी से कहा, ‘दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस मनमोहन को आपके क्लाइंट (अर्णब) के खिलाफ आदेश जारी करने पड़े थे। अगर मेरे कोर्ट में आपके क्लाइंट मेरी बात नहीं सुनते और इस बात की शिकायत सामने आती है, तो मैं अंतरिम आदेश जारी कर दूंगा. मैं नहीं चाहता कि मेरे कोर्ट में दिल्ली वाली घटना (शशि थरूर केस) की पुनरावृत्ति हो. आप अपनी खबरें चलाते रहें- बस ‘हद पार न करें.”
मालूम हो कि सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में कथित अपमानजनक प्रसारण पर रोक लगाने की शशि थरूर की याचिका सुनते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अर्णब गोस्वामी से कहा कि किसी आपराधिक मामले में जांच लंबित होने के दौरान मीडिया को समानांतर सुनवाई, किसी को दोषी कहने या निराधार दावे करने से बचना चाहिए.
सुनवाई के दौरान जहां, जेठमलानी ने अदालत को आश्वासन दिया कि रिपब्लिक टीवी भविष्य में ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करेगा. वहीं अदालत ने चैनल को अंबानी की याचिका पर औपचारिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया
अदालत ने अंत में कहा, ‘सभी के लिए समान अवसर होने चाहिए. निम्न स्तर की भाषा का प्रयोग न करें। मेरे आदेशों का इंतजार करें और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने से बचें।’ अदालत ने मामले को 16 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया है.
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