दिल दहला देने वाला मामला, खाकी की संवेदनहीनता!, इंसाफ के लिए पिता ने लुटाए 62 हजार, फिर भी अपहरणकर्ता के पास ही मासूम को छोड़ आई पुलिस!

A heartbreaking case, the insensitivity of the police! The father spent 62 thousand rupees for justice, yet the police left the innocent child with the kidnapper!

दिल दहला देने वाला मामला, खाकी की संवेदनहीनता!, इंसाफ के लिए पिता ने लुटाए 62 हजार, फिर भी अपहरणकर्ता के पास ही मासूम को छोड़ आई पुलिस!

धमतरी/कुरुद : धमतरी जिले के ग्राम खर्रा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. जहां इंसाफ की रक्षा करने वाली पुलिस खुद सवालों के घेरे में है. एक पीड़ित पिता, जिसका घर पहले ही उजड़ चुका था. उसे पुलिस ने न सिर्फ आर्थिक रूप से निचोड़ा, बल्कि उसके 5 साल के मासूम बेटे को उसकी आंखों के सामने ही उस व्यक्ति को सौंप दिया जिस पर अपहरण का शक था.
क्या है रूह कंपा देने वाला पूरा घटनाक्रम?
ग्राम खर्रा निवासी सुरेश साहू ने आरोप लगाया है कि 14 जून 2025 को उसकी पत्नी नूतन साहू, 5 साल का बेटा उमंग और घर में रखे सामान, 1.70 लाख रुपये नगद और 2 लाख के जेवर लेकर अचानक लापता हो गई. सुरेश ने बिरेझर चौकी में अपहरण का शक जताया था. लेकिन पुलिस ने इसे सिर्फ ‘गुमशुदगी’ की मामूली रिपोर्ट (गुम इंसान क्रमांक 48/2025) में दर्ज किया.
पंजाब में मिली लोकेशन, पीड़ित के खर्च पर गई पुलिस
इस मामले की पतासाजी में जब मोबाइल लोकेशन पंजाब के श्री मुक्तसर जिले में मिली. तो बिरेझर पुलिस की टीम जांच के लिए रवाना हुई. विडंबना देखिए कि सरकारी ड्यूटी पर गई इस टीम के आने-जाने, रहने और खाने-पीने का पूरा खर्च (करीव 62,000 रुपये) पीड़ित सुरेश साहू से ही कराया गया. जैसा कि पीड़ित ने बताया है.. एक तरफ सुरेश की जमापूंजी चोरी हो चुकी थी. दूसरी तरफ इंसाफ की उम्मीद में उसने कर्ज लेकर पुलिस का ‘प्रायोजक’ बनना स्वीकार किया.
पंजाब के थाना बरीवाला के अंतर्गत ग्राम जोन्डेके में पुलिस ने केवल सिंह नामक व्यक्ति के पास से महिला और बच्चे को बरामद किया. सुरेश के मुताबिक “मेरा 5 साल का बेटा उमंग मुझे देखते ही ‘पापा-पापा’ बोलकर रोने लगा और मेरे साथ आने की जिद करने लगा.” लेकिन यहाँ पुलिस ने नियमों की धज्जियां उड़ा दीं. चूंकि मामला छत्तीसगढ़ का था. कायदे से पुलिस को सभी पक्षों को छत्तीसगढ़ लाकर न्यायालय या बाल कल्याण समिति के सामने पेश करना था. मगर बिरेझर पुलिस के अधिकारियों ने कथित तौर पर वहीं एक ‘पंचनामा’ तैयार किया और मासूम बच्चे और महिला को उसी संदिग्ध व्यक्ति (केवल सिंह) के पास छोड़कर वापस आ गए. जिसके बाद से पीड़ित अपने मासूम बच्चे की सुरक्षा को लेकर आशंकित है.
पंचनामे पर उठते गंभीर कानूनी सवाल
पुलिस द्वारा तैयार दस्तावेज में महिला के प्रेम-प्रसंग का हवाला देकर उसे अपनी मर्जी से रहने की बात कही गई है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या एक 5 साल का नाबालिग बच्चा अपनी मर्जी तय कर सकता है? एक पिता की मौजूदगी में पुलिस ने किस कानून के तहत बच्चे को एक अनजान व्यक्ति को सुपुर्द किया? क्या यह सीधे तौर पर जेजे एक्ट (Juvenile Justice Act) का उल्लंघन नहीं है?
“आरोप गलत, असंतुष्ट हैं तो कोर्ट जाएं”
इस पूरे मामले में कुरुद एसडीओपी रागिनी मिश्रा ने आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि: “पुलिस ने कहीं कोई गलत कार्रवाई नहीं की है. पुलिस पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत हैं. वह भी घटना के इतने दिनों बाद.. अगर वे पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं. तो कोर्ट की शरण ले सकते हैं.”
इंसाफ की गुहार: दर-दर भटक रहा पीड़ित पिता
ठगे गए सुरेश साहू ने अब कलेक्टर धमतरी, पुलिस अधीक्षक (SP), बाल कल्याण समिति और SDM के पास अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उसकी मांग है कि:
उसके पुत्र उमंग साहू को फौरन पंजाब से वापस लाकर उसे सौंपा जाए.
जांच के नाम पर उससे खर्च कराए गए 62 हजार रुपये की वसूली दोषी पुलिसकर्मियों से की जाए.
कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले बिरेझर चौकी के संबंधित स्टाफ पर सख्त कार्रवाई हो.
अब देखना यह है कि प्रशासन इस लाचार पिता की पुकार सुनता है या खाकी अपनी गलतियों पर पर्दा डालने का प्रयास करती है. यह मामला धमतरी पुलिस की साख पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है.

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