देश में फसल उत्पादन को कम करना चाह रही सरकार, भारतीय किसान यूनियन खाद कटौती के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी, नीति विसंगति पूर्ण-प्रवीण क्रांति 

Government aims to reduce crop production in the country; Bharatiya Kisan Union prepares for a major protest against fertilizer cuts—Praveen Kranti.

देश में फसल उत्पादन को कम करना चाह रही सरकार, भारतीय किसान यूनियन खाद कटौती के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी, नीति विसंगति पूर्ण-प्रवीण क्रांति 

गरियाबंद/राजिम : खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को खाद की कमी और वितरण में कटौती का सामना करना पड़ रहा है. इसी मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन फिंगेश्वर ब्लॉक कमेटी और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी फिंगेश्वर के संयुक्त नेतृत्व में राजिम में हुए किसान आंदोलन की समीक्षा बैठक रेस्ट हॉउस राजिम में आयोजित की गई.
यह बैठक भारतीय किसान यूनियन(टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी प्रवीण क्रांति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण कुमार नरवाल, प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही, प्रदेश सचिव कमल सिंह कुशवाह, गरियाबंद जिला अध्यक्ष मदन लाल साहू, जिला महासचिव योगेंद्र साहू, जिला कोषाध्यक्ष उत्तम कुमार साहू, जिला संगठन मंत्री ललित कुमार साहू, फिंगेश्वर ब्लॉक अध्यक्ष रेखराम साहू की उपस्थिति में आयोजित की गई. जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष मदनलाल साहू ने की और आभार व्यक्त ब्लॉक अध्यक्ष रेखराम साहू ने किया.
बैठक में परेशान किसानों ने बताया कि खरीफ फसल की बुवाई का समय शुरू हो चुका है. लेकिन सहकारी समितियों और सोसायटियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है. शासन द्वारा खाद के कोटे में कटौती किए जाने से किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. किसानों का आरोप है कि खाद की कमी के कारण उन्हें निजी दुकानों से ज्यादा कीमत पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है.
संयुक्त किसान आंदोलन का समीक्षा करते हुए प्रदेश प्रभारी प्रवीण क्रांति ने कहा कि सरकारें कॉर्पोरेट घरानो के साथ जुगलबंदी कर जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण को लूट रही है. यह समय अमृतकाल नहीं बल्कि लूट काल बन गया है. जिसके खिलाफ सभी मेहनतकश जनता, मजदूर, किसानों को एक जुट होकर संघर्ष करना पड़ेगा. यह संघर्ष किसी एक पार्टी या संगठन का नहीं है बल्कि सभी की जिम्मेदारी है.
उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार अमेरिकी ट्रेड दिल की शर्तों के अधीन काम कर रही है. जिसमें कहा गया है अमेरिका भारत में सालाना 500 करोड़ रुपये सिर्फ कृषि उत्पाद से सम्बंधित व्यापार करेगा. जिसका मतलब है भारत में कृषि उत्पादन पर कमी लाना और इसके लिए उर्वरक खाद वितरण नीति को विसंगत बनाया गया है. छत्तीसगढ़ शासन कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रद्योगिकी विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा जा रहा है कि पिछले खरीफ सीजन 2025 में किसानों को वितरित उर्वरक यूरिया की 80% मात्रा और डीएपी की 60% मात्रा का ही वितरण खरीफ 2026 में किया जाना है. जबकि धरातल में इसका अलग ही मानक प्रति एकड़ दो बोरी यूरिया एक बोरी डीएपी मान लिया गया है. जिससे एक एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को डीएपी मिल नहीं रहा है और तो और ज्यादा जमीन वाले किसानों को आधा बोरी डीएपी ही मिल रही है जिससे खेती कर पाना आसान नहीं है और सरकार के पास कोई ठोस विकल्प नहीं होने के कारण बिचौलिए मनमाने दामों में खाद बेच रहे हैँ. सहकारी समितियों में उर्वरक नहीं है. लेकिन थोक विक्रेताओं का गोदाम भरा हुआ है. जिस पर प्रशासन को सख्त कार्यवाही करने की जरुरत है. 
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार नरवाल ने कहा कि किसान प्रकृति से जुडा हुआ है. लेकिन प्रकृति का विनाश ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है. जिससे जलवायु में भारी परिवर्तन का नुकसान किसानों को उठाना पडता है.
 प्रदेश सचिव कमल कुशवाह ने कहा कि सरकार द्वारा निर्मित समस्याओं से सामना करने के लिए हमें सांगठनिक रूप से मजबूत होकर संघर्ष को तेज करना होगा. वहीं प्राकृतिक समस्याओं से निपटने के लिए प्रकृति और मानव के बीच सहस्तित्व के सम्बन्ध को मजबूत करना होगा.
खाद नहीं मिलने पर विभाग में करेंगे पंचायत : तेजराम विद्रोही
खाद की बनावटी किल्लत को समझते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि थोक उर्वरक विक्रेता बड़े पैमाने पर कालाबाजारी को बढ़ावा दें रहे हैं आंदोलन के बाद भी किसानों को खाद उपलब्ध नहीं हो पाता है तो ब्लॉक स्तर पर किसान अपनी खाद की मांग अनुसार प्राप्ति के लिए कृषि विभाग के कार्यालय में बैठ कर पंचायत करेंगे और ज़ब तक खाद नहीं मिल जाता तब तक जारी रहेगा. 
जिला अध्यक्ष मदन लाल साहू ने कहा कि संगठन को गांव-गांव में मजबूत करने के लिए एक-एक सदस्य को पांच गांव की जिम्मेदारी लेकर एक-एक गांव में पांच पांच सदस्य बनाना चाहिए. जिससे ग्रामीण कमेटी और मजबूत होगी. 
इस बैठक में भूनूराम साहू, डेनिश साहू, शेषनारायण चंद्राकर, दाऊलाल साहू, गैदलाल देवांगन, गोविन्द तारक, बसंत साहू, हेमलाल साहू, ओमप्रकाश साहू, सेवक साहू, खिलेश साहू, नरेश साहू, विनोद ध्रुव, रघुनाथ साहू, मदन लाल साहू, चम्मन लाल, प्रेमशंकर साहू, पवन कुमार, रोमश साहू, डेश कुमार, कनक सिन्हा, नारायण साहू, कुलेश्वर साहू, इतवारी साहू, सुरेश यादव, होरीलाल, जुगलराम, जागेश राम, गिरधारी साहू, दौवा राम, शंकर लाल साहू, मंशाराम साहू, अर्जुन मरकाम, गुलाब कोमर्रा, हरख साहू, रमेश साहू, भारत साहू, नरेश तारक, तुकाराम साहू, नेमीचंद, अजीत साहू, तुलेश कुमार, रामसिंग ध्रुव आदि ग्राम प्रमुख एवं कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे.
बैठक में संगठन ने आगामी दिनों में व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर किसानों की मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया और खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो जिला एवं प्रदेश स्तर पर चरणबद्ध और उग्र आंदोलन किया जाएगा. किसानों ने शासन से तत्काल खाद आपूर्ति बढ़ाने और वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग की है.
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