खेत में काम कर रहे ग्रामीण पर तेंदुए का हमला, गंभीर घायल, सूझबूझ से बची जान, पाण्डुका वन क्षेत्र में दहशत, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
Leopard attacks villager working in field, seriously injured, saves life due to presence of mind, panic in Panduka forest area, questions on the functioning of Forest Department
गरियाबंद/छुरा : पाण्डुका वन परिक्षेत्र अंतर्गत तिलईदादर बीट से एक चिंताजनक मामला सामने आया है. जहां जंगल से लगे खेत में काम कर रहे एक ग्रामीण पर अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया. इस हमले में ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया. हालांकि उसने साहस और सूझबूझ से अपनी जान बचा ली.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम गिधनी निवासी तुलसी राम ठाकुर मंगलवार सुबह अपने खेत में काम करने गए थे। खेत के समीप घना जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से वहां जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है. इसी दौरान अचानक झाड़ियों से निकलकर एक तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया. तेंदुए के इस अचानक हमले से तुलसी राम ठाकुर संभल भी नहीं पाए और जमीन पर गिर पड़े। हमले में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं. जानलेवा स्थिति के बीच उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और किसी तरह खुद को छुड़ाकर शोर मचाया, जिससे तेंदुआ जंगल की तरफ भाग गया.
हमले में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं. घायल हालत में तुलसी राम ठाकुर ने किसी तरह खुद को बचाया और परिजनों को खबर दी. परिजन उन्हें छुरा उपस्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे. जहां उनका इलाज जारी है. चिकित्सकों के मुताबिक घायल की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है.
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में जंगली जानवरों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जिससे जान-माल का खतरा बना हुआ है. वर्तमान में तेंदूपत्ता तोड़ाई के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण रोज जंगल की तरफ जाते हैं. ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता और बढ़ा रही हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार खबर देने के बाद भी वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंचती, जिससे आमजन की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है,
ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए. तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं. उन्होंने क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने और जंगली जानवरों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है.
खबर मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल ग्रामीण से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया. विभाग द्वारा तत्काल सहायता के रूप में 1000 रुपये की राशि प्रदान की गई. साथ ही ग्रामीणों को अकेले जंगल न जाने और सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.
फिलहाल गांव में भय का माहौल बना हुआ है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. अब देखना होगा कि वन विभाग इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से ठोस कार्रवाई करता है. ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.
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