तहसील में ‘काम के बदले दाम’ का आरोप, तहसीलदार व कर्मचारियों पर 10 हजार रिश्वत मांगने की शिकायत, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
Allegations of "pay for work" in the tehsil, complaints against the tehsildar and employees for demanding a bribe of 10,000 rupees, questions being raised about the functioning of the revenue department.
सूरजपुर : सूरजपुर जिले की प्रेमनगर तहसील में राजस्व प्रकरण के निराकरण के नाम पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप सामने आया है. ग्राम ब्रम्हपुर निवासी एक ग्रामीण ने सरगुजा संभाग के आयुक्त और सूरजपुर कलेक्टर को लिखित शिकायत भेजकर तहसीलदार प्रेमनगर और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर अवैध लेन-देन का आरोप लगाया है. शिकायत सामने आने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक़ ग्राम ब्रम्हपुर निवासी आनंद राम ने शिकायत में बताया है कि उनकी शासकीय पट्टा भूमि को भूमि-स्वामी अधिकार में दर्ज करने से संबंधित राजस्व प्रकरण तहसील प्रेमनगर में काफी समय से लंबित है. जबकि इस मामले में सक्षम न्यायालय द्वारा भूमि-स्वामी अधिकार स्वीकृत किया जा चुका है. साथ ही अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा भी इस बारे में अनुशंसा की जा चुकी है. इसके बावजूद अब तक मामले का निराकरण नहीं किया गया है.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले के निराकरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने के दौरान उनसे अवैध तरीके से पैसे की मांग की गई. आरोप के मुताबिक तहसीलदार प्रेमनगर श्रीमती माधुरी अंचला ने अपने अधीनस्थ कर्मचारी निर्मला साहू के जरिए करीब दो महीने पहले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग करवाई.
आवेदक का कहना है कि तहसील कार्यालय में काम अटकने के कारण मजबूरी में उसके भतीजे नेम साय द्वारा उक्त राशि दो किश्तों में नगद दी गई. शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पैसे देने के बाद उन्हें तहसीलदार की तरफ़ से हल्का पटवारी के पास भेजा गया.
हालांकि जब ग्राम नवापारा कला के हल्का पटवारी चन्दन केक्केट्टा से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में अभी तक कोई आदेश पारित नहीं हुआ है. इससे शिकायतकर्ता को शक हुआ कि पैसे लेने के बावजूद उसका काम जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है.
शिकायत में आगे यह भी कहा गया है कि कुछ समय बाद फिर से कर्मचारी के जरिए यह खबर भेजा गया कि “मैडम से मिल लो, जो खर्चा लगेगा यहीं देना पड़ेगा, तभी काम होगा.” इससे आवेदक को यह यकीन हो गया कि उसके वैध राजस्व प्रकरण को जानबूझकर रोका जा रहा है और उससे अवैध रूप से रिश्वत ली जा रही है.
आनंद राम ने अपनी शिकायत में कहा है कि जब सक्षम न्यायालय और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा भूमि-स्वामी अधिकार की अनुशंसा की जा चुकी है, तब भी मामले का निराकरण नहीं होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है.
ग्रामीण ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. साथ ही दोषी पाए जाने पर तहसीलदार प्रेमनगर तथा संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और लंबित राजस्व प्रकरण का तत्काल निराकरण कराने की मांग भी की है.
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस बारे में शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़, कलेक्टर सूरजपुर तथा अपर कलेक्टर सूरजपुर को भी भेजी गई है. शिकायत को स्पीड पोस्ट के जरिए प्रेषित किया गया है, ताकि मामले पर शीघ्र संज्ञान लिया जा सके.
इस शिकायत के सामने आने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आरोपों की जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है. फिलहाल प्रेमनगर तहसील में रिश्वत मांगने के आरोपों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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