मर्डर के आरोप में 4 लोग पहुंचे जेल, दो महीने बाद मरा हुआ युवक लौटा जीवित, बोला- साहब मैं जिंदा हूं, सवालों के घेरे में हत्या और गिरफ्तारी
Four men were jailed for murder. Two months later, a young man who had died returned to life, saying, "Sir, I am alive." The murder and arrest remain in question.
जशपुर : त्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिला जशपुर में जिस युवक को मृत मानकर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया और उसके दोस्तों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया. वही युवक सीमित जिंदा हालत में थाने पहुंच गया. उनसे पुलिस से कहा- मैं तो जिंदा हूं, रोजगार की तलाश में झारखंड गया था. युवक के वापस आने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं. मर्डर का पूरा केस ही बदल गया है. आरोपी वर्तमान में जेल में ही हैं. यह मामला छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिला जशपुर का है.
करीब 60 दिन पहले पुलिस को उसका शव अधजली हालत में मिला था. हत्या के आरोप में पुलिस ने उसके साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. सीमित को सामने खड़ा देख पुलिस अधिकारी, परिजन और ग्रामीणों के होश उड़ गए. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जिसकी लाश मिली थी वह व्यक्ति कौन था. उसकी हत्या किसने की है. इस तरह के तमाम सवाल अब खड़े हो रहे हैं. हत्या, गिरफ्तारी, कबूलनामा और जेल सब कुछ एक पल में सवालों के घेरे में आ गया.
मिली जानकारी के मुताबिक जशपुर जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पुरनानगर-तुरीटोंगरी जंगल में 22 अक्टूबर को एक युवक की अधजली लाश पुलिस को मिली थी. पुलिस ने जांच के बाद ग्राम सिटोंगा निवासी सीमित खाखा उम्र 30 साल का शव मानते हुए हत्या का केस दर्ज किया. हत्या के आरोप में रामजीत राम, विरेंद्र राम, शीतल मिंज, जीतू राम और एक नाबालिग को पकड़कर जेल भेज दिया गया. मृतक के माता-पिता और भाई ने कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के सामने शव की पहचान की. जांच के बाद पुलिस ने केस फाइल बंद कर दी.
शनिवार रात को हत्या का यह मामला उस समय पलट गया. जब मृत घोषित किया गया सीमित खाखा ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना खलखो के साथ खुद सिटी कोतवाली पहुंचा. उनसे पुलिस को बताया कि मेरी हत्या नहीं हुई. मैं जिंदा हूं. सीमित खाखा ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह मजदूरी करने के लिए झारखंड गया था और गिरिडीह के सरईपाली गांव में काम कर रहा था. मोबाइल नहीं होने की वजह से किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था.
इस पूरे मामले को लेकर एसडीओपी चंद्रशेखर परमा ने कहा कि पुलिस ने शव की पहचान और हत्या का आरोप स्वीकार करने समेत सभी कानूनी प्रक्रियाएं मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पूरी की थी. सीमित खाखा के जीवित मिलने के बाद अब पूरे मामले की जांच नए सिरे से की जा रही है. जेल में बंद आरोपियों की रिहाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरु कर दी गई है. असल मृतक की पहचान के लिए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर जांच जारी है.
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