बिना काम किये लाखों का फर्जीवाड़ा, सिर्फ कागजों पर विकास कार्य, सचिव और रोजगार सहायक पर भ्रष्टाचार के लगे गंभीर आरोप
Fraud of lakhs without any work development work only on paper serious allegations of corruption against secretary and employment assistant
रायगढ़ : रायगढ़ जिले के लैलूँगा तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत झगरपुर में झूठे विकास कार्यों के नाम पर मूलभूत राशि के लाखों रुपए आहरित किये जाने का मामला सामने आ रहा है.
ग्राम पंचायत झगरपुर के ग्रामीणों ने अपने नाम का खुलासा न करने की शर्त पर बताया कि झगरपुर के कई मोहल्ले में नाली निर्माण, पानी टंकी निर्माण, नहानी घर निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण एवं कई अन्य विकास कार्यों के नाम पर मूलभूत राशि के लाखों रुपए निकाले जा चुके हैं. जहां आम जनता के साथ मिल कर पारदर्षिता के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ना चाहिए वहीं ग्राम सभा के नाम पर सिर्फ कागजों पर ग्राम सभाएँ की जाती हैं. ऐसे में जनता न तो सच्चाई जान पाती है और न ही विकास कार्यों की जानकारी ले पाती है.
ग्राम पंचायत झगरपुर के किसी भी मोहल्ले में न ही नाली निर्माण किया गया. न ही पानी टंकी बनाया गया. न ही नहानी घर बनाया गया. न ही तालाबों का सौंदर्यीकरण किया गया और न ही अन्य विकास कार्य किया गया है.
ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल का हिसाब ऑनलाइन के जरिए साफ तौर पर देखा जा सकता है कि इन सभी विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपए निकाले जा चुके हैं.
आपको बता दें कि पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 49 के अंतर्गत ग्राम पंचायत को मूलभूत कार्यों को संपादित करने का दायित्व सौंपा गया है. जनसंख्या वर्ष 2011 के मुताबिक सभी ग्राम पंचायत को मूलभूत की राशि दी जाती है. जिससे कि ग्राम पंचायतों में मूलभूत सेवाओं का ग्रामवासियों को फायदा मिल सके. लेकिन ग्राम के सेवकों द्वारा नियमों से हटकर विकास कार्यों के नाम पर पैसे निकाल लिए जाते हैं. ये विकास कार्य सिर्फ कागजों पर देखी जा सकती है. जबकि हकीकत कुछ और ही है, ऐसे में ग्रामवासी सरकार के सभी योजनाओं एवं सेवाओं से वंचित रह जाते हैं.
अब सवाल यह है कि ग्राम पंचायत झगरपुर की सरपंच श्रीमती भारती राठिया, पंचायत सचिव मनकेश्वर राठिया एवं रोजगार सचिव श्रीमती प्रतिमा प्रधान द्वारा बिना किसी निर्माण कार्यों के विकास के नाम पर लाखों रुपए कैसे निकाले जा रहे हैं? क्या ग्राम पंचायतों में किसी तरह के निर्माण कार्यों के बाद ग्रामीण विकास अधिकारी द्वारा उन कार्यों का निरीक्षण नहीं किया जाता या जानबुझकर पैसों के लालच में अधिकारी अपनी आँखे मूंद लेते हैं? अगर मामले की जाँच की गई तो और भी तथ्य सामने आयेंगे.
सरपंच पति ललित राठिया का आरोप है कि सचिव और रोजगार सहायक द्वारा अग्रिम चेक में साइन करवा कर रखते हैं. जब पैसा निकालते हैं. तो नही बताते जिसकी शिकायत उच्च अधिकारियों को मेरे द्वारा पत्र के जरिए किया गया है. पिछले 4 सालो से कोई सामान्य सभा की बैठक भी नही किया गया है.
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